शेयर चैट की रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया में क्षेत्रीय भाषाओं का कंटेंट देखने में पुरुषों का रहा वर्चस्व

नई दिल्ली। भारत के रु1 रिजनल सोशल मीडिया प्लेटफार्म शेयर चैट ने साल 2018 की वार्षिकी रिपोर्ट आज पेश की। इसमें शेयर चैट के 14 भारतीय भाषाओं के यूजर्स के साल 2018 के ट्रैंडस और खोजे गए विषयों का उल्लेख है। पहली बार इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों ने भी साल 2018 में सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। इन लोगों ने अपनी क्षेत्रीय भाषा में सोशल मीडिया के कंटेंट का इस्तेमाल किया और अपनी भाषा में सक्रियता से कंटेंट भी लिखा। शेयर चैट की साल 2018 की वार्षिकी के अनुसार भारत की क्षेत्रीय भाषाओं के यूजर्स ने अपनी भाषा के शब्दों को बिल्कुल सही ढंग से लिखा। इन लोगों ने 250 मिलियन पोस्ट डाले जो इमेज, वीडियो, गिफ्स आदि थे।

क्षेत्रीय भाषा की सोशल मीडिया की मार्केट पर पुरुषों का रहा वर्चस्व
सभी 14 क्षेत्रीय भाषाओं में प्लेटफार्म में शामिल होने और कंटेंट लिखने में पुरुषों का वर्चस्व रहा। रिपोर्ट में यह भी पता चला कि पुरुष शेयर चैट पर अधिक समय बिता रहे हैं जबकि वे शेयर चैट प्रतिस्पर्धियों प्लेटफार्म पर कम समय व्यतीत करते हैं। क्षेत्रीय भाषा में केवल मलयालम में ही पुरुष और महिला यूजर्स लगभग बराबर से रहे।

साल 2018 के चर्चित विषय
शेयर चैट पर हैशटैग के विश्लेषण से यह पता चला कि क्षेत्रीय भाषाओं के इंटरनेट यूजर्स में कई पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले भी थे। पहले से इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे और नए इंटरनेट यूजर्स ने सामाजिक और राजनीतिक मामलों पर अत्यधिक जागरूक रहे और इन लोगों ने अपनी आवाज जोरदार ढंग से उठाई। इन लोगों ने अपनी सोच और चिंताओं को पहली बार इतने मुखर ढंग से उठाया। साल 2018 में सामाजिक विषयों से लेकर प्राकृतिक आपदाएं ज्यादा सुर्खियों में रहीं, ये हैं:
1. कठुआ रेप कांड की नाबालिग पीड़िता (आसिफा) की न्याय की गुहार
2. निप्पा वायरस
3. केरल में बाढ़
4. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का देहांत
5. श्रीदेवी की मौत
6. सबरीमाला पर कोर्ट का फैसला
इन पर चर्चा के दौरान रोचक तथ्य यह रहा कि यह मुद्दे राष्ट्रीय थे और यह एक खास क्षेत्र में हुए थे। ये एक खास क्षेत्र से ही जेनरेट नहीं हुए बल्कि सभी क्षेत्रों में जेनरेट हए। जैसे सबरीमाला पर कोर्ट का फैसला और केरल में बाढ़ केवल केरल में ही चर्चा नहीं हुई बल्कि इनकी बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश आदि क्षेत्रों में बहुत चर्चा हुई।

इमेज पर लिखे संदेश रहे पसंदीदा
शेयर चैट की साल की समाप्ति पर जारी वार्षिकी के अनुसार क्षेत्रीय भाषाओं के यूजर्स ने इमेज के साथ लिखी वस्तुओं का अधिक इस्तेमाल किया। हालांकि सामान्य धारणा यह है कि कंटेंट में सबसे ज्यादा वीडियो भेजे जाते हैं। हालांकि क्षेत्रीय भाषाओं में वीडियो अधिक भेजे जा रहे हैं। लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं में इमेज पर लिखे गए संदेशों को अधिक बनाया गया है और इन्हें अधिक भेजा गया है।
शेयर चैट के सीईओ अंकुश सचदेवा ने कहा “क्षेत्रीय भाषाओं के लोग सोशल मीडिया पर अपनी भाषा का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में इनके द्वारा लिखा गया संदेश बहुत तेजी से बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। इसमें आम आदमी अपने कस्बे और शहर में होने वाली वास्तविक घटनाओं पर कंटेंट बनाएगा। साथ ही वे लोग अपने आसपास होने वाली घटनाओं को दर्ज करेंगे। कैमरे की एडवांस तकनीक और मशीनों की बदौलत यूजर्स पहले से कहीं अधिक कंटेंट बनाएंगे। इससे यूजीसी में बहुत अधिक बढ़ेगी और यह स्टूडियो में बनने वाले कंटेंट से कहीं अधिक हो जाएगी।”
उन्होंने कहा “क्षेत्रीय भाषाओं के यूजर्स ने यूजीसी गेम की मार्केट को बढ़ाया है। हम बहुत जल्दी देखेंग कि कई समुदायों के बीच बोलचाल के आम शब्द मेनस्ट्रीम में इस्तेमाल होने के कारण पॉपुलर हो जाएंगे। हमें लगता है कि भारत में जिस तरह ई कॉमर्स बढ़ रहा है, उससे लगता है कि ई कामर्स जल्द ही लोकल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया पर हाइपरलोकल हो जाएगा। इसके चलते छोटी दुकानें भी सोशल मीडिया पर अपनी आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के बारे में सोचना शुरू करेंगी।

भारत में प्यार और दिल टूटना अधिक
शेयरचैट में सबसे ज्यादा सामाजिक और प्राकृतिक आपदाओं पर चर्चा हुई। टॉप कंटेंट के इस्तेमाल में प्यार और संबंध रहे। टूटे दिलों से जुड़ी शायरी, प्यार से जुड़ी टिप्पणियां व कविताएं रहीं। शेयर चैट ने पाया कि रोजाना ऐसे लाखों चैट हो रहे हैं।

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