कंप्यूटर नेटवर्किंग है आईटी का आधार

– एन.के. महापत्रा
(सीईओ, इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल)
बड़े व छोटे संस्थानों में कंप्यूटर आज कामकाज का आधार बन चुकी है। खास बात यह है कि विज्ञान से इतर विशयों में शिक्षा प्राप्त कर चुके व्यक्ति भी कंप्यूटर नेटवर्किंग के कार्य में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे कई विघार्थी है, जो किसी कारण 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई करने में समक्ष नहीं हैं। एन.के. महापत्रा सीईओ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल के अनुसार ऐसे युवा कोई प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, जिसे पूरा करने के बाद उन्हें ठीक-ठाक नौकरी मिल जाए। आईटी युग में ऐसे कई कोर्स उपलब्ध है। उनमें से एक कोर्स है नेटवर्किंग का। नेटवर्किंग के तहत एक कंप्यूटर को उसी जगह या किसी अन्य शहर या देश में स्थित कंप्यूटरों से जोड़ा जाता है, ताकि उनके डेटा आपस में षेयर किए जा सकें। नेटवर्किग का काम मुख्यतः तीन तरह के माध्यमों से किया जाता है।
1. लैन यानी लोकल एरिया नेटवर्क
2. मैन यानी मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क
3. वैन यानी वाइड एरिया नेटवर्क।
क्या है नेटवर्किंग :- नेटवर्किंग शब्द नेट यानी जाल से बना है, जिसका अर्थ है दो से अधिक चीजों को आपस में जोड़ना। कंप्यूटर के संदर्भ में नेटवर्किंग का मतलब है दो या दो से अधिक कंप्यूटरों को एक कंपनी, एक शहर, एक देश में विभिन्न स्थानों को आपस में जोड़ना व उनके संस्थानों को एक्सेस करना तथा विश्व के किसी भी कोने में स्थित कंप्यूटरों को आपस में जोड़ना। इंटरनेट मोबाइल कम्युनिकेशन, सेटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्किंग का ही नतीजा है। कंप्यटूरों नेटवर्किंग को निम्न भागों में बांटा जा सकता है।

लोकल एरिया नेटवर्किंग :- इस तरह नेटवर्किंग को लैन का नाम से जाना जाता है। इसमें किसी एक इमारत में रखें कंप्यूटरों को आपस में जुड़ा जाता है। इसके तहत जोड़े जाने वाले कंप्यूटरों के बीच की दूरी 100 मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसका कारण यह है कि इस तरह की नेटवर्किंग में कंप्यूटरों को केबल द्वारा एक दूसरे से जोड़ा जाता है। ज्यादा दूरी होने के पर डेटा लॉस की आशंका रहती है।

मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्किंग :- इसमें वायरलेस तथा वायर दोनों तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी नेटवर्किंग में एक शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित विभिन्न इमारतों या कंपनियों में रखें कंप्यूटरों को आपस में जोडा जाता है। इसमें सामान्य ऑप्टिकल केवल, फाइबर केवल, राउटर, स्विच, रिपीटर इत्यादि एडवांस इंस्ट्रूमेंट उपयोग किए जाते हैं। आईटी रिवोल्यूशन के इस दौर में नेटवर्किंग बेहद जरुरी है। कंप्यूटर नेटवर्किग के मुख्य लाभ रिसोर्स शेयरिंग और इंफॉर्मेशन शेयरिंग है। रिसोर्स शेयरिंग की सहायता से उपकरणों तथा सर्विसेज के उपयोग को कम करके किसी एक या दो कंप्यूटर के साथ जोड़ दिया जाता है। इससे हर कंप्यूटरों के लिए अलग-अलग उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती और कंपनियों के खर्च मे काफी बचत होती है। इतनी ही नहीं इसकी मदद से हम वॉयस फोटो, लाइव टेलिकास्ट आदि भी शेयर कर सकते हैं।

वाइड एरिया नेटवर्क :- इसमें भौगोलिक दूरी कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि यह पूर्णतया वायरलेस टेक्नोलॉजी पर आधारित होता है। इसमें कंप्यूटरों को सेटेलाइट, राउटर, आईएसडीएन स्विच, वैन लाइनों से जोड़ा जाता है।

स्टोरेज एरिया नेटवर्क :- इस तरह की नेटवर्किंग का उपयोग प्रायः बड़ी कंपनियों तथा इंटरनेट सर्विसेज प्रदान करने वाली कंपनियों द्वारा किया जाता है। इसके तहत एक सर्वर तथा स्टोरेज डिवाइसों को अनेक सर्वरों और स्टोरेज डिवाइसों के साथ सीधें जोड़ा जाता है।

प्रवेष के लिए योग्यता :- कंप्यूटर नेटवर्किंग से संबंधित अधिकांश कोर्से में प्रवेश के लिए 12वीं उर्तीण होना अनिवार्य है। हालांकि इन कोर्सेज को ग्रेजूएट या ऊंची षिक्षा प्राप्त स्टूडेंट भी कर सकते हैं। अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त योग्यता होगी। साइंस बैकग्राउंड और कंप्यटूर की बेसिक नॉलेज रखनें वाले छात्रों को थोड़ी सुविधा होती है। हालांकि आर्ट्स स्ट्रीम के छात्र भी यह कोर्स आसानी से कर सकते हैं।

कौन सा कोर्स करें :- नेटवर्किंग कोर्स मुख्यतः दो तरह के होते हैं- नेशनल और इंटरनेशनल। इंटरनेशनल कोर्स के तहत वे कोर्स आते हैं, जिनके सर्टिफिकेट अंतर्राष्ट्रीय  संस्थानों द्वारा किए जाते हैं। इनकी विष्व में हर जगह मांग होती है। इंटरनेशनल कोर्स में प्रमुख है। एससीएसई यानी माइक्रोसाफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम इंजीनियर, एमसीएसए यानी माइक्रोसाफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर, सीसीएनए यानी सिस्को सर्टिफाइड नेटवर्क असोसिएट। इसके अलावा, डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी एंड डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेशन, एडवांस डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी एंड सिक्योरिटी एक्सपर्ट, मास्टर इन नेटवर्क इंजीनियरिंग।

संभावनाए :- आज पूरे विश्व में जिस तरह से कंप्यूटर का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि नेटवर्किंग इंजीनियरिंग में अपास संभावनाएं है। ऐसी स्थिति में आने वाले दशक में भारत में ही लाखों स्किल्ड लोगां की जरुरत होगी। एक स्किल्ड नेटवर्किंग इंजीनियर भी छोटी या बड़ी कंपनी में नेटवर्क इंजीरियर, नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट आदि के पद पर कार्य कर सकता है।

स्वरोजगार :- निकट भविष्य में टीवी की तरह घर-घर में कंप्यूटर होंगे। जिस रफ्तार से कंप्यूटरों की संख्या बढ़ रही है और हर क्षेत्र का कंप्यूटरीकरण हो रहा है, उसे देखते हुए सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि कंप्यूटर करीगरों, तकनीषियनों की मांग बढ़ेगी। चिप लेवल कोर्स करने के बाद राष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय कंप्यूटर ठीक करने, सर्विसिंग करने, एसेम्बलिंग करने का स्वतंत्र कारोबार शुरू कर सकते हैं। बैंक से लोन लेकर कारोबार शुरू करने पर अच्छी आमदनी प्राप्त हो सकती है।

वेतन :- वेतन योग्यता के अनुसार शुरू होता है। तनख्वाह 15 से 40 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है। इसके अलावा अन्य विभाग भी होते है, जिनसे चिप लेवल इंजीनियरिंग के कई लोग जुड़े होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *