सफलता प्राप्त करने के लिए आप को उपयुक्त साफ्टवेयर की आवश्यकता

-सक्सेस गुरु ए.के. मिश्रा
डायरेक्टर, चाणक्य आई ए एस एकेडमी
सफलता की विशेषताओं के बारे में जानना एवं विश्लेषण करना सरल है, परंतु इनको अपने व्यक्तित्व में समाहित करना एक वास्तविक चुनौती है। सफलता की विशेषताओं में सकारात्मक सोच, स्वयं पर विश्वास, साहस, लक्ष्य के प्रति समर्पण, कुशल समय प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन आदि गुण सम्मिलित होते हैं. इनसे एक सजग व्यक्ति भली-भांति परिचित होता है। हर व्यक्ति इन गुणों को स्वयं में उतारने एवं बनाए रखने का इच्छुक होता है। किंतु जब उसका वास्तविकता से सामना होता है, तो पता चलता है कि इनका अभ्यास करना कठिन है, ऐसा आकांक्षा एवं इच्छाशक्ति के बीच एक बड़ा अंतर होने की वजह से होता है।
सफलता के कारकों की सूची काफी लंबी हो सकती है, यदि इनको विभिन्न शीर्षकों-उपर्शीषकों में रखा जाए, परंतु सरल बनाने के क्रम में उनको चार शीर्षकों के अंतर्गत रखना पसंद करता हूं। जिनको सफलता के पहिए की चार तीलियां कहा जा सकता है। ये हैं-मस्तिष्क, समय, ऊर्जा एवं मानवीय संबंध। ईश्वर द्वारा मनुष्य को प्रदान किए गए इन चार बेशकीमती उपहारों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर आप जीवन की किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं।
सफलता की शुरुआत आप के स्वयं की पहचान के साथ होती है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफलता, शांति एवं प्रसन्नता हासिल करने एवं उसका अभिवर्धन हासिल करने की असीम क्षमता के साथ ईश्वर का एक अद्वितीय सृजन होता है। स्वयं की क्षमता एवं अद्वितीयता की समझ एवं पहचान एक अद्भुत अनुभव है। मैक्स लुकाडो कहते हैं-आप एक दुर्घटना नहीं हो सकते. आप थोक में पैदा नहीं हुए। आप जैसे तैसे पुर्जों को जोडकर बनाए गए उत्पाद नहीं हैं। आप सर्वशक्तिमान स्त्रष्टा द्वारा जानबूझकर नियोजित, विशिष्ट उपहार में दिए गए तथा बड़े प्यार से इस धरती पर उतारे गए हैं। हममें से हरेक व्यक्ति का इस धरती पर आने का एक उद्देश्य होता है और हर व्यक्ति में अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कुछ अद्वितीयता होती है।
फिलहाल इस आलेख में मैं मस्तिष्क प्रबंधन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाल रहा हूं। मानव मस्तिष्क में असीम स्मरणशक्ति और सोचने की क्षमता होती है। विश्व का कोई भी कंप्यूटर एक स्वस्थ मस्तिष्क की बराबरी नहीं कर सकता, यहां तक कि महान वैज्ञानिक आइंस्टीन भी अपने मस्तिष्क के 15 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल का दावा नहीं कर सके थे, इस विश्व में हमारे मस्तिष्क के परे कुछ भी नहीं है।
वास्तव में, सिर्फ हमारे मस्तिष्क की वजह से ही हमारे लिए इस विश्व का कोई अर्थ है। हमें बचपन से ही खाना, पहनना, जीवन जीना, बातचीत करना, काम करना और आनंद लेना तो सिखाया जाता है, लेकिन यह नहीं सिखाया जाता कि हमें अपने मन व मस्तिष्क को कैसे इस्तेमाल करना चाहिए, जो हमारे लिए हर चीज को संचालित करता है। कल्पना करें, बिना हमारे मस्तिष्क के इस विश्व में हमारे अधीन अथवा हमारे आसपास की चीज का क्या अर्थ रह जाएगा? निस्संदेह, हमारे लिए अपने मस्तिष्क से परे किसी भी चीज का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए हमारी सभी उपलब्धियां हमारे मस्तिष्क के कौशलपूर्ण इस्तेमाल से सीधे संबंधित होती हैं।
सफलता की कला वास्तव में हमारे मस्तिष्क के दक्षतापूर्ण संचालन की एक कला है। यहां, यह समझना महत्वपूर्ण है कि साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर होता है। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी पूर्ण रूप से शिक्षित हो सकता है। अकबर महान इसका एक सर्वोत्तम उदाहरण हैं। बहुत से संत महात्मा एवं धार्मिक गुरु निरक्षर थे, किंतु वे काफी ज्ञानी थे। दूसरी ओर, हमारे देश में या विश्व में कहीं भी साक्षर और उच्च डिग्री प्राप्त लोगों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन उन लोगों की संख्या काफी कम होती है जो उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने तथा इस विश्व को कुछ अर्थपूर्ण योगदान दे जाने के लिए वास्तविक रूप से स्वयं को शिक्षित होने का दावा करते हैं।
सच्चे अर्थ में शिक्षा का सीधा संबंध आत्मबोध से होता है। अकादमिक शिक्षा हमें साक्षर और सूचनाओं एवं ज्ञान से समृद्ध बना सकती है, लेकिन उनका इस्तेमाल एवं अर्थवत्ता हमारी वास्तविक शिक्षा की शक्ति पर निर्भर करती है। गैलीलियो का कहना है कि आप व्यक्ति को कुछ भी नहीं सिखा सकते. आप उसे स्वयं के अंदर ढूंढने में केवल सहायता कर सकते हैं। ईश्वर ने पहले से ही हमारे मस्तिष्क को शक्ति प्रदान कर रखी है, हमें सिर्फ इस बात की खोज करनी है कि हम अधिकतम लाभ के लिए उसका कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। एक सच्चा शिक्षक वही है, जो अपने विद्यार्थी के मस्तिष्क की मौलिकता को मारे नहीं, बल्कि उसे आत्मानुभूति करने में सहायता प्रदान करे. मैं इस संबंध में गौतम बुद्ध के दर्शन में काफी विश्वास करता हूं। वे कहते हैं कि किसी भी चीज पर तब तक विश्वास मत करो, जब तक कि वह तुम्हारे अपने विवेक एवं अपनी सहज बुद्धि को स्वीकार्य न हो, चाहे जहां से तुमने उसे पढ़ा हो, या जिसने भी कहा हो, यहां तक कि मैंने भी कहा हो।
इस प्रकार सफलता की मेरी कला का उद्देश्य आप सबको उन गुणों को याद दिलाना है जो पहले से ही आप के मस्तिष्क में गहरे बैठे हुए हैं। आप को सिर्फ अनुभव करने और अपनी उच्च उपलब्धियों के लिए गति प्रदान करने की जरूरत है। यहां यह समझना प्रासंगिक होगा कि हम किसी भी चीज या उससे संबंधित चीज को सही परिप्रेक्ष्य में पहचान, समझ और व्यायाख्यित करने में असमर्थ होंगे, जिससे संबंधित सूचना हमारी स्मृति में न हो। दूसरे शब्दों में, हमें अपने मस्तिष्क से इच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए उपयुक्त मानव साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।
जिस प्रकार कंप्यूटर बिना उपयुक्त साफ्टवेयर के इच्छित परिणाम नहीं दे सकता, ठीक ऐसी ही स्थिति हमारे मस्तिष्क की होती है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आप को उपयुक्त साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है. सिविल सेवा के परीक्षा के मामले में, आप के व्यक्तित्व में प्रशासनिक गुणों वाले मानव साफ्टवेयर की जरूरत होगी। आप के पास इनमें से अधिकांश चीजें मौजूद हैं, बस आप को सिविल सेवाओं में अपनी भूमिका की जरूरतों के अनुरुप उनको परिमार्जित करने की आवश्यकता है। अब तक आप का मानव साफ्टवेयर शैक्षिक है और ये सब आप के व्यक्तित्व में अनियमित एवं अनियंत्रित तरीके से समाहित होते रहते हैं क्यों कि बचपन से ही आप के माता पिता, परिवार, स्कूल, कालेज, अन्य शैक्षणिक संस्थानों, मित्रों, संबंधियों, शिक्षकों, मीडिया एवं विभिन्न प्रकार के अध्ययन के द्वारा इसी प्रकार की प्रोग्रामिंग की जाती रही है।

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