राष्ट्र-रक्षा और राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के साथ सीमा सुरक्षा बल ने मनाया 54वां स्थापना दिवस

नई दिल्ली। 6386 किलोमीटर लंबी भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा करने वाले देश के अग्रणी सीमा रक्षक बल ‘सीमा सुरक्षा बल’ ने राष्ट्र-रक्षा और राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के साथ अपना 54वां स्थापना दिवस मनाया। सीमा सुरक्षा बल के सभी प्रतिष्ठानों में यह स्थापना दिवस उत्साह और उमंग से मनाया गया। इस अवसर पर सीमा सुरक्षा बल के दिल्ली स्थित छावला परिसर में ‘स्थापना दिवस परेड’ का भव्य आयोजन किया गया। भारत सरकार के माननीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजीजू इस परेड के मुख्य अतिथि रहे।
परेड के दौरान सीमा सुरक्षा बल के विभिन्न दस्तों ने देश कोे इस बल की सामरिक शक्ति से परिचय कराया। परेड के दस्तांे में शामिल पैदल दस्ते, कैमल कंटिंजेंट, डाॅग स्क्वाॅयड, हाॅर्स स्क्वाॅयड, आर्टिलरी, सिगनल इत्यादि दस्तों ने शानदार मार्चपास्ट किया और सैन्य परंपरा के अनुसार माननीय मुख्य अतिथि महोदय को जोरदार सलामी दी। मुख्य अतिथि महोदय ने पूरे सम्मान और गरिमा के साथ परेड की सलामी ली और उसका निरीक्षण किया। इस अवसर पर श्री रजनी कांत मिश्र, महानिदेशक सीमा सुरक्षा बल ने अपने संबोधन में सीमा सुरक्षा बल के इतिहास को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए यह बताया कि किस तरह 25 बटालियनों की जनशक्ति से शुरू होने वाले इस बल ने आज स्वयं को 192 बटालियनों वाले विशाल सीमा प्रबंधन तंत्र के रूप में बदला है और किस प्रकार विभिन्न दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह करते हुए स्वयं को बहुआयामी बल के रूप में स्थापित किया है। महानिदेशक सीमा सुरक्षा बल ने अपने संबोधन के दौरान बल की उपलब्धियों, नई पहलों और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारियों का जिक्र करते हुए राष्ट्र को यह विश्वास दिलाया कि – ‘‘हम सीमाओं की पवित्रता को हर हाल में बनाये रखेंगे, चाहे इस पावन कार्य में हमें अपना जीवन ही बलिदान क्यूं ना करना पड़े।’’
सीमा सुरक्षा बल सहित देश के विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सदस्यों व उनके परिजनों की भारी उपस्थिति वाली इस परेड में पधारने से पूर्व माननीय मंत्री महोदय छावला स्थित सीमा सुरक्षा बल के ‘शहीदी स्मारक’ पर गये और बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। तत्पश्चात उन्होंने परेड की सलामी ली, निरीक्षण किया और परेड देखी। समारोह के अंत में माननीय मुख्य अतिथि महोदय ने सीमा सुरक्षा बल के विभिन्न सीमांतों/निदेशालयों/सदस्यों को उनके प्रशंसनीय कार्यों हेतु सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रस्तुत किये गये अपने संबोधन में माननीय मुख्य अतिथि महोदय ने परेड के शानदार प्रदर्शन के लिये परेड टुकड़ियों की प्रशंसा की। सीमा सुरक्षा बल शहीदों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि – ‘‘आपका बलिदान अतुल्य है और पूरे देष के लिये प्रेरणा का स्रोत है।‘‘ सीमा सुरक्षा बल सदस्यों के कल्याण के लिये बल द्वारा चलाई विभिन्न कल्याणपरक योजनाओं की प्रशंसा करते हुुए उन्होंने भारत सरकार द्वारा सीमा प्रहरियों को मजबूत और शक्तिशाली बनाने की प्रतिबद्धता को भी दुहराया। सीमा सुरक्षा बल सदस्यों को 54वंे स्थापना दिवस की शुभकामनाएं प्रदान करते हुए उन्होंने राष्ट्र के विकास में सीमा सुरक्षा बल की भूमिका पर इस तरह प्रकाश डाला – ‘‘राष्ट्र के विकास और उसकी सुरक्षा के बारे में आपका अमूल्य है। यह कहना उपयुक्त होगा कि आपका संगठन बेमिसाल है, आप बेजोड़ हैं और ‘‘कोई भी कार्य कहीं भी और कभी भी’’ करने में पूरी तरह सक्षम हैं।’’
विदित हो भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमाओं की सुरक्षा हेतु दिनांक 01 दिसंबर 1965 को गठित बल ’सीमा सुरक्षा बल’ विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है और वर्तमान समय में दो लाख 60 हजार सदस्यों की विशाल और समर्थ जनशक्ति से लैस है। यह बल ना सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा में प्रवीण है, अपितु आंतरिक सुरक्षा कत्र्तव्यों के निष्पादन में भी इसे महारत हासिल है। इस बल के सदस्यों के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को विधिवत मान्यता प्रदान करते हुए भारत सरकार ने इस बल को हजारों वीरता पदकों सहित अन्य ढेर सारे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया है। आज इस बल के पास 192 बटालियनें हैं, दो लाख 60 हजार से अधिक का विषाल, कुशल और समर्थ मानव संसाधन है।
अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र हैं, नवीनतम सीमा प्रबंधन तकनीक है, वाॅटर विंग, एयर विंग और आर्टिलरी जैसे भौतिक संसाधन हैं तथा हाॅर्स एवं डाॅग स्क्वाॅयड सहित कैमल विंग जैसे जैविक संसाधन भी। विभिन्न संसाधनों का यह मिश्रण और और सीमा सुरक्षा बल के प्रशिक्षण केंद्रों का सामरिक पैनापन, सीमा सुरक्षा बल को विशेष ताकत प्रदान करता है, सीमा प्रबंधन में अग्रणी बनाता है और सीमाओं पर ‘रक्षा की अग्रिम पंक्ति’ का मान दिलाता है। इस समन्वय के कारण ही यह बल जल, थल और नभ में एक साथ चलायमान एकलौता केंद्रीय सशस्त्र पुलिस है।

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