एक बार फिर से दिल्ली में आयोजित हो रहा है भारत का एकमात्र कथा वाचन उत्सव

नई दिल्ली। सद्गुरु, मोहित चौहान, इम्तियाज अली, शगुना गहलोते, जांथे ग्रेषम, गॉडफ्रे डंकन, पंकज त्रिपाठी और दानिश हुसैन के बीच क्या समानता है? ये सभी वैसे कथा वाचक के रूप में जाने जाते हैं, जो वास्तविक और काल्पनिक कहानियों के जरिए श्रोताओं को भाव विभोर करते हैं। इनकी कहानियां इतिहास, मिथकों, किंवदंतियों, देशी कहानियों, भाषाओं, योग और यहां तक कि फिल्म निर्माण से संबंधित घटनाओं पर केंद्रित होती हैं।
जब ये कहानीकार एक मंच पर एक साथ आते हैं, तो इसकी परिणति कथा वाचन की प्राचीन कला के उत्सव के रूप में होती है, एक ऐसे उत्सव के रूप में जो कथा वाचन का भारत का एकमात्र उत्सव है। ’कथाकार-इंटरनेशनल स्टोरीटेलर्स फेस्टिवल’ नामक यह उत्सव देहरादून में जन्मी तीन बहनों – प्रार्थना, रचना और शगुना गहलोते की पहल है, जिन्होंने नाटकीय प्रदर्शन, घुमंतु त्योहारों और किताबों के प्रकाशन के माध्यम से कथा वाचन की कला को बदल दिया।
इस उत्सव का आठवां संस्करण, नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में आयोजित किया जाएगा, इसमें भारत, ब्रिटेन, ग्रीस, अफ्रीका, रूस और ईरान की संस्कृति और वहां के इतिहास के आधार पर कथा वाचन के कुछ चुनिंदा स्वरूपों का प्रदर्शन किया जाएगा।
इस उत्सव की सहसंयोजिका प्रार्थना गहलोते कहती हैं, ‘‘कथा वाचन प्राचीन कला रूप है, जो हर संस्कृति और दुनिया के प्रत्येक हिस्से में मौजूद है लेकिन अभी तक इसे कला रूप के तौर पर पहचान मिलनी बाकी है। आम तौर पर कहानी वाचन को किसी रंगमंच में शामिल किया जाता है जो एक आधुनिक अवधारणा है। कथाकार इसी प्राचीन कला का उत्सव है। इसके जरिए इस कला रूप को पुनर्जीवित करने तथा इस कला रूप को मुख्यधारा की संस्कृति में शामिल करने के बारे में संवाद को आगे बढ़ाया जा रहा है।’’ पुरस्कार विजेता लेखिका कथाकार उत्सव के पहले दिन स्कूली बच्चों के लिए आयोजित एक सत्र में हिमालय क्षेत्र की रोचक कहानियों को पेश करेंगी। उन्होंने हिमालय की कहानियों की पुस्तक का सह-लेखन किया है।
कथाकार का मतलब कहानी कहने वाला होता है और कथाकार उत्सव की एक विषेशता यह है कि प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु – ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजुजु के साथ मिलकर 16 नवम्बर की शाम को आईजीएनसीए में तीन दिवसीय आयोजन का उद्घाटन करेंगे।
अपने अध्यात्मिक प्रवचनों एवं योग कार्यक्रमों के लिए जाने जाने वाले सदगुरू इस उत्सव के दौरान एक सत्र में गीतकार, संगीतकार और कंपोजर मोहित चैहान के साथ कथावाचक की भूमिका निभाएंगे। मोहित चैहान कथाकार उत्सव के संरक्षक भी हैं। एक अलग सत्र में, मोहित चैहान और फिल्म निर्माता इम्तियाज अली बॉलीवुड फिल्म ’रॉकस्टार’ के निर्माण के अपने अनुभवों तथा बचपन की कुछ यादों को भी साझा करेंगे।
मोहित चैहान ने कहा, ‘‘संगीत की तरह, कहानी सुनाना सबसे सरल कला रूप है और यह संस्कृति का सबसे बड़ा वाहक और धारक भी है। उसका जीवन काल भी अनंत है। हालांकि, कथाकार उत्सव के संरक्षक के रूप में, मैं कहूंगा कि मौखिक कथा वाचन के इस कला स्वरूप का समर्थन किया जाना चाहिए क्योंकि यह कला रूप समाप्ति की ओर अग्रसर है। जब किसी व्यक्ति की कहानियों को एक साथ रखा जाता है तो ये कहानी दुनिया की जीवन कथा का रूप ले लेती हैं। यह उत्सव इस दिषा में एक अनुभव होगा क्योंकि इसमें भारत एवं विदेष से कई कथा वाचक हिस्सा ले रहे हैं।’’
यह उत्सव भारत की कथा वाचन की चुनिंदा पहल में से एक है और इस उत्सव के दौरान कई दुर्लभ कथा स्वरूपों को प्रस्तुत किया जाएगा जैसे कोलकाता के सुदीप गुप्ता द्वारा डाॅल्स थियेटर, कल्याण जोशी द्वारा राजस्थान का ‘फड’ (स्क्रॉल) कथा वाचन, आदिनाथ बापुराव विभुते द्वारा छत्रपति षिवाजी महाराज का जीवंत कथा वाचन ’पोवाड़ा’ और रितु वर्मा द्वारा ’पांडवानी’ कथाएं (महाभारत के पांडव भाइयों के बारे में)।
उत्सव के आयोजकों में से एक शगुना गहलोते, महात्मा गांधी के जन्म के 150 साल पूरे होने के सिलसिले में ’बापू की कहानी’ पेष करेंगी। जाने-माने रंगमंच कलाकार दानिष हुसैन ’किस्सा उर्दू की आखरी किताब का’ एक समकालीन रूपांतरण प्रस्तुत करेंगे, जो मूल रूप से पाकिस्तानी कवि इब्न-ए-इंशा द्वारा लिखी गई है।
ब्रिटेन में कथा वाचन को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके गुयाना मूल के कलाकार गॉडफ्रे डंकन पारंपरिक शैली में अफ्रीका की कहानियों को पेष करेंगे। टीयूयूपी (द अनप्रीसिडेंटेड, अनआर्थोडाॅकस प्रीचर – अप्रत्याशित अपरंपरागत प्रचारक’) प्रसिद्ध पौराणिक भारतीय कथा – विक्रम-बेताल की कहानियां भी प्रस्तुत करेंगे।
उत्सव में शामिल होने वाले अन्य विदेशी कलाकारों में इस्ट ससेक्स स्थित जांथे ग्रेषम भी शामिल हैं, जो ब्रिटेन, ग्रीस, रूस और ईरान जैसे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से कहानियों को पेष करेंगे। पोलैंड के स्टोरीटेलिंग संग्रहालय के निदेशक माइकल मालिनोव्स्की, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मध्य यूरोपीय देश की किंवदंतियों और मिथकों को पेश करेंगे। अंत में प्रसिद्ध भारतीय कलाकार पंकज त्रिपाठी मंचन के रूप में कथा वाचन कला के बारे में बात करेंगे।
इस उत्सव की शुरूआत पहली बार 2010 में स्वयंसेवी संस्था – निवेश एवं हिमालयन हब फार आर्ट कल्चर एंड हेरिटेज (एचएचएसीएच) की ओर से यूनेस्को की सहायता से हुई थी। यह घुमंतु साहित्य महोत्सव – ‘घुमक्कड़ नारायण’ का हिस्सा है। घुमक्कड नारायण भारत के पहले ब्रेल संपादक ठाकुर विष्व नारायण सिंह के जीवन से प्रभावित है।
इस महोत्सव में सुबह के सत्र मुख्य तौर पर स्कूली बच्चों के लिए समर्पित है और षाम के कार्यक्रम सभी उम्र वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इस उत्सव का उद्देष्य इस भ्रम को दूर करना है कि कथावाचन केवल बच्चों का शौक है। हर साल इस उत्सव में दस हजार से अधिक लोग आते हैं।
सुबह के सत्र आईजीएनसीए के केन्द्रीय लाॅन में सुबह 9 बजे से 12 बजे तक होंगे। शाम के सत्र उसी जगह पर शाम 5 बजे से 10 बजे तक होंगे। इस उत्सव के बारे में जानकारियां https://www.ghummakkadnarain.org पर पाई जा सकती है।

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