क्या है हेमोक्रोमाटोसिस?

– डाॅ. रविंदर पाल सिंह मल्होत्रा
डायरेक्टर, सेंटर फॉर लीवर ट्राप्लांट एंड गैस्ट्रो साइंसेज
हेल्दी ह्युमन क्लीनिक, नई दिल्ली
जब शरीर मे आयरन यानी लौह तत्व बहुत ज्यादा हो जाता है तो हेमोक्रोमाटोसिस की स्थिति बन जाती है। आपके शरीर को हीमोग्लोबीन बनाने के लिए आयरन की जरूरत होती है। हीमोग्लोबीन आपके रक्त का वह हिस्सा है जो सभी कोशिाकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाता है, लेकिन जब शरीर में आयरन बहुत ज्यादा हो जाता है तो यह लीवर और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है और मधुमेह या ऑर्थराइटिस जैसी अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।
गंभीर रोझें से बचने के लिए हेमोक्रोमाटोसिस का उपचार कराया जाना चाहिए, क्योंकि उपचार नहीं हुआ तो हेमोक्रोमाटोसिस के कारण आपके शरीर में आयरन जमा होता रहेगा, जब आयरन का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाए तो यह विभिन्न अंगों और टिशयूज को नुकसान पहुंचा सकता है।
हेमोक्रोमाटोसिस का सबसे सामान्य कारणा वंशानुगत होता है। यानी यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में चला जाता है, इसे वंशानुगत या प्राथमिक हेमोक्रोमाटोसिस कहते है। लेकिन कई लोगों में यह बहुत ज्यादा बार रक्त चढाने, रक्त सम्बन्धी समस्याओं, लीवर सम्बन्धी रोगों या शराब के अत्यधिक सेवन से भी होता है। इसे द्वितीयक (सेकेणडरी) हेमोक्रोमाटोसिस या अभिगृहित (एक्वायर्ड) हेमोक्रोमाटोसिस भी कहते है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में आयरन जमा होने की समस्या ज्यादा होती है। महिलाओं में मासिक धर्म और गर्भावस्था के कारण यह समस्या ज्यादा नहीं हो पाती।

  •  इसके लक्षण क्या है?
    इसके लक्षण आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र से पहले नजर नहीं आते, क्योंकि अतिरिक्त आयरन किसी भी व्यक्ति के जीवन के दौरान बहुत धीमी गति से जमा होता है और लगभग तभी दिखते हैं जब एक निश्चित मात्रा में अतिरिक्त आयरन जमा हो जाता है। प्रारम्भिक लगभग काफी हद तक अस्पष्ट होते है. ऐसे में इस रोग को कोई अन्य रोग मानने की गलती भी हो जाती है।प्राथमिक लगभग कुछ ऐसे होते है-
    1. थकान
    2. कमजोरी
    3. जोडों में दर्द
    4. वजन कम होना
    5. पेशाब ज्यादा होना
  • हेमोक्रोमाटोसिस का पता कैसे चलता है?
    आपका डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच करे और आपके अब तक के स्वास्थ्य यानी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछे। यदि उसे हेमोक्रोमाटोसिस का संदेह हुआ तो वह आपके शरीर में आयरन की मात्रा का पता लगाने के लिए रक्त की जांच कराएगा। ज्यादातर मामलों में हेमोक्रोमाटोसिस एक जीन के कारण होता है जो एक पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है, यह ऑटोसोमल रिसीसिव डिसऑर्डर है जो माता-पिता से बच्चे को मिल सकता है।
    एक रक्त जांच से हेमोक्रोमाटोसिस का पता जल्दी चल सकता है। यदि आपको यह रोग है तो आप यह पता कर सकते हैं कि आपके बच्चे को भी यह रोग है या नहीं, परिवार के अन्य सदस्यों की जांच भी कराई जा सकती है। एक जेनेटिक काउंसलर से यह परामर्श लिया जा सकता है कि जेनेटिक टेस्टिंग आप और आपके परिवार के लिए उपयुक्त है या नहीं।
  • इसका उपचार कैसे होता है?
    हेमोक्रोमाटोसिस का उपचार निम्न तरह से होता है’-
    1. फ्लेबोटोमी
    यह सबसे सामान्य उपचार है, यह रक्तदान की तरह है और नियमित रूप से किया जाता है।
    2. चेलेशन थैरेपी (इसे चेेलेटिंग,जेन्ट्स भी कहते हैं)
    यह एक दवाई है जो आपके शरीर से अतिरिक्त आयरन कम करने में मदद करती है। यह उन लोगों के लिए काम ली जा सकती है जो फ्लेबोटोमी नहीं करा सकते।
  •  इसका उपचार
    1. आपके रक्त से सुरक्षित और तेजी से अतिरिक्त आयरन कम कर सकता है।
    2. रोग और इसकी सम्भावित जटिलताओं को बढने से रोक सकता है।
    3. विभिन्न अंग जैसे लीवर और हृदय का नुकसान होने से बचा सकता है।
    ज्यादातर लोगों को जीवनपर्यंत इसका उपचार लेना पड़ता है, लेकिन कुछ ऐसे भी होते है, जिनका आयरन स्तर सामान्य हो जाता है और जिनमें हेमोक्रोमाटोसिस स्पष्ट रूप से किसी अन्य रोग के कारण या किसी अन्य रोग के उपचार के कारण (जैसे रक्त चढ़ाने से) होता है, ऐसे लोगों को आगे उपचार की जरूरत नहीं होती।
  •  क्या हेमोक्रोमाटोसिस से बचा जा सकता है?
    आपके परिवार में किसी को हेमोक्रोमाटोसिस से है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि आपको स्वतः ही यह रोग हो जाएगा। यदि आपको यह पता चल जाता है कि आपमें हेमोक्रोमाटोसिस पैदा करने वाला जीन है तो आपको हेमोक्रोमाटोसिस होने की सम्भावना ज्यादा रहती है। आपका डॉक्टर या जेनेटिक काउंसलर आपको जीन टेस्ट के परिणाम समझने में मदद कर सकता है। आप लक्षणों पर ध्यान दें ताकि आपको हेमोक्रोमाटोसिस हो तो उसका जल्द से जल्द उपचार हो सके. समय पर उपचार हो जाता, तो ज्यादतर लक्षण खत्म हो जाते हैं और आगे की परेशानियों से भी बचा जा सकता है।
  • आप घर पर अपनी देखभाल कैसे कर सकते है?
    1. घर पर आप कुछ ऐेसे उपाय कर सकते है, जिससे आपको भोजन या पेय पदार्थो में आयरन की ज्यादा मात्रा न मिले।
    2. शाराब का सेवन न करें या सीमित मात्रा में करें।
    3. यदि आप शराब पीते हैं तो आप भोजन से ज्यादा मात्रा में आयरन ग्रहण करते है जो आपके लीवर को नुकसान (सिरोसिस) पहुंचा सकता है।
    4. प्रतिदिन विटामिन सी देने वाले पदार्थों का 200 मिलीग्राम से ज्यादा सेवन न करें। विटामिन सी की अधिक मात्रा से भी भोजन से आयरन अधिक मिल जाता है। जिन भोज्य पदार्थो में विटामिन सी प्राकृतिक रूप से उपलब्ध है, उन्हें पीया या खाया जा सकता है।
    5. ऐसे पोष्टिक तत्व और विटामिन न लें, जिनमें आयरन हो।
    6. यदि आप फ्लेबोटोमी उपचार करवा रहे हैं तो आपको डॉक्टर से अपने भोजन में बदलाव के बारे में पूछना चाहिए। यदि आपको अपने भोजन में आयरन की मात्रा कम करनी है तो आपको लाल मांस और आयरन फोर्टीफाइड भोजन जैसे अनाज आदि कम खाना चाहिए।
    7. आपको चाय या कॉफी पीना चाहिए। इससे आपका शरीर भोजन से कम मात्रा में आयरन ग्रहण करेगा, इन्हें पीने से उपचार नहीं बदलेगा।
    8. लोहे के बर्तन काम न लें, क्योंकि इनमें खाना पकाने से कुछ आयरन तो भोजन में जाएगा ही।
    9. कच्चा सी फूड न खाएं, क्योकि इनमें ऐसा बैक्टिरिया हो सकता है जो हेमोक्रोमाटोसिस से पीडित लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *