पावन होली के दौरान बालों तथा त्वचा की देखभाल

-शहनाज हुसैन
(अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ व हर्बल क्वीन)
वसन्त ऋतु में पड़ने बाले प्यार के त्यौहार होली का सबको वेशवरी से इन्तजार रहता है। रंगों के इस त्यौहार में पिचकारी, गुलाल, गुबारों के रँगों से सराबोर होने के लिए हम कब से तैयार बैठे हैं। होली का त्यौहार खुशियों, मस्ती, रोमांच तथा उत्साह लेकर आता है। लेकिन रंगों के इस त्यौहार को हम सब लोग उत्साह से मनाने के साथ ही रंग खेलने से ज्यादा रंग छुड़ाने, त्वचा एवं बालों को हुए नुकसान को लेकर टेंशन में ज्यादा रहते हैं क्यों कि ‘बुरा न मानो होली है’ कहकर रंग फेंकने बाले अल्हड़ युवक-युवतियों की टोलियां पिचकारी, गुब्बारों, डाई व गुलाल तथा बाजार में बिकने बाले जिन रंगों का प्रयोग करते हैं उनमें माइका, लेड जैसे हानिकारक रसायनिक मिले होते हैं, जिससे बाल तथा त्वचा रूखी एवं बेजान हो जाती है, बल झड़ना शुरू हो जाते हैं तथा त्वचा में जलन एवं खारिश शुरू हो जाती है। होली में उपयोग किये जाने वाले रंगों से त्वचा में एलर्जी, आँखों में जलन और पेट की अनेक समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। सबसे पहले आप यह कोशिश करें की आप आर्गेनिक/हर्बल रंगों से ही होली खेलें लेकिन इन रंगों की पहचान भी जरुरी है। होली के दौरान बाजारों में इको फ्रैंडली रंगों की भरमार आ जाती है। लेकिन यदि इन रंगों से किसी केमिकल या पेट्रोल की गन्ध आये या रंग पानी में आसानी से न घुलें तो आप इन्हें कतई न खरीदें क्योंकि तत्काल पैसा बनाने के चक्कर में लोग अक्सर त्योहारों को ही चुनते हैं। आर्गेनिक रँगों में डार्क शेड में चमकदार कण कतई नहीं होते इसलिए काला, सिल्वर, गहरा पीला रंग कतई न खरीदें।
यह कतई जरूरी नहीं है कि नामी गिरामी कंपनियों के आप बाजार में बिकने वाले महँगे हर्बल रंगों को ही चुने बल्कि बेहतर रहेगा अगर आप घर में ही हर्बल रंगों को बनायें। आप बेसन में हल्दी मिलाकर पीला हर्बल रंग पा सकते हैं। गेंदे के फूलों के पत्तों को पानी में उबाल कर पिचकारी के लिए पीला रंग बना सकते हैं जबकि गुड़हल फूलों के पत्तों के पाउडर को आटे के साथ मिलाने से लाल रंग बन जाता हैं। पानी में केसर या मेहंदी मिलकर नारंगी रंग बन जाता है। इसी प्रकार अनार के दाने पानी में मिलाकर गुलाबी रंग का पानी बन जाता है।
आज के युग में बाजार में बिकने बाले रंगों में हर्बल तथा प्राकृतिक उत्पाद नाममात्र ही होते हैं। लेकिन ऐसे में आप घर पर छुप कर कतई न बैठें। अगर आप कॉलोनी के पार्क में खुशनुमा माहौल में दिल खोल कर होली खेलना चाहते हैं तो जमकर रंग खेलने के बाद चुटकियों में रंग छुड़ाने के तरीके बता रही हैं सौंदर्य विशेषज्ञ शहनाज हुसैन।
होली का त्यौहार ज्यादातर खुले आसमान में खेला जाता है जिससे सूर्य की गर्मी से भी त्वचा पर विपरित प्रभाव पड़ता है। खुले आसमान में हानिकाक यू.वी. किरणों के साथ-साथ नमी की कमी की वजह से त्वचा के रंग में कालापन आ जाता है। होली खेलने के बाद त्वचा निर्जीव बन जाती है।

  • होली के पावन त्यौहार में अपनी त्वचा की रक्षा केे लिए होली खेलने से 20 मिनट पहले त्वचा पर 20 एस.पी.एफ. सनस्क्रीन का लेप कीजिए। यदि आपकी त्वचा पर फोड़े-फुन्सियां आदि हैं तो 20 एसस.पी.एफ. से ज्यादा दर्ज की सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए। ज्यादातर सनस्क्रीन में माइस्चराईजर ही विद्यमान होता है। यदि आपकी त्वचा अत्याधिक शुष्क हैं तो पहले सनस्क्रीन लगाने के बाद कुछ समय इंतजार करने के बाद ही त्वचा पर माइस्चराईजर का लेप करें।
  • आप अपनी बाजू तथा सभी खुले अंगों पर माईस्चराइजर लोशन या क्रीम का उपयोग करें।
  • होली खेलने से पहले सिर के बालों पर हेयर सीरम या कंडीशनर का उपयोग करें। इससे बालों को गुलाल के रंगों की वजह से पहुंचने वाले सुखेपन से सुरक्षा मिलेगी तथा सूर्य की किरणों से होने वाले नुकसान से भी बचाव मिलेगा।
  • आजकल बाजार में सनस्क्रीन सहित हेयर क्रीम आसानी से उपलब्ध हो जाती है। थोड़ी से हेयर क्रीम लेकर उसे दोनों हथेलियों पर फैलाकर बालों की हल्की-हल्की मालिश करें। इसके लिए आप विशुद्ध नारियल तेल की बालों पर मालिश भी कर सकते है। इससे भी रसायनिक रंगों से बालों को होने वाले नुकसान को बचाया जा सकता है।
  • होली के रंगों से नाखूनों को बचानें के लिए नाखूनों पर नेल वार्निश की मालिश करनी चाहिए। होली खेलने के बाद त्वचा तथा बालों पर जमें रंगों को हटाना काफी मुश्किल कार्य है। उसके लिए सबसे पहले चेहरे को बार-बार साफ निर्मल जल से धोएं तथा इसके बाद क्लींजिंग क्रीम या लोशन का लेप कर लें तथा कुछ समय बाद इसे गीले काटन वूल से धो डाले। आंखों के इर्द गिर्द के क्षेत्र को हल्के-हल्के साफ करना न भूलें। क्लीजिंग जैल से चेहरे पर जमें रंगों को धुलने तथा हटाने में काफी मदद मिलती है। अपना घरेलू क्लीनजर बनाने के लिए आधा कप ठण्डे दूध में तिल, जैतून, सूर्यमुखी या कोई भी वनस्पति तेल मिला लीजिए। काटन वूल पैड को इस मिश्रण में डूबोकर त्वचा को साफ करने के लिए उपयोग में लाऐं। शरीर से रसायनिक रंगों को हटाने में तिल के तेल की मालिश महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इससे न केवल रसायनिक रंग हट जाऐंगे बल्कि त्वचा को अतिरिक्त सुरक्षा भी मिलेगी।
  • तिल के तेल की मालिश से सूर्य की किरणों से हुए नुकसान की भरपाई में मदद मिलती है। नहाते समय शरीर को लूफ या वाश कपड़े की मदद से स्क्रब कीजिए तथा नहाने के तत्काल बाद शरीर तथा चेहरे पर माइस्चराईजर का उपयोग कीजिए। इससे शरीर में नमी बनाए रखने में मदद मिलेगी।
  • यदि त्वचा में खुजली है तो पानी के मग में दो चम्मच सिरका मिलाकर उसे त्वचा पर उपयोग करें तथा इससे खुजली खत्म हो जाऐगी। इसके बाद भी त्वचा में खुजली जारी रहती है तथा त्वचा पर लाल चकत्ते तथा दाने उभर आते है तो आपकी त्वचा को रंगों से एलर्जी हो गई तथा इसके लिए आपको डाक्टर से आवश्यक सलाह मशवरा जरूर कर लेना चाहिए। बालों को साफ करने के लिए बालों में फंसे सुखे रंगों तथा माईका को हटाने के लिए बालों को बार-बार सादे ताजे पानी से धोते रहिए। इसके बाद बालों को हल्के हर्बल शैम्पू से धोएं तथा उंगलियों की मदद से शैम्पू को पूरे सिर पर फैला लें तथा इसे पूरी तरह लगाने के बाद पानी से अच्छी तरह धो डालिए।
  • बालों की अंतिम धुलाई के लिए बियर को अन्तिम हथियार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। बीयर में नीबूं का जूस मिलाकर शैम्पू के बाद सिर पर उडेल लें। इसे कुछ मिनट बालों पर लगा रहने के बाद साफ पानी से धो डालें।
  • होली के अगले दिन दो चम्मच शहद को आधा कप दही में मिलाकर थोड़ी सी हल्दी में मिलाए तथा इस मिश्रण को चेहरे, बाजू तथा सभी खुले अंगों पर लगा लें। इसे 20 मिनट लगा रहने दें तथा बाद में साफ ताजे पानी से धो डालें। इससे त्वचा से कालापन हट जाएगा तथा त्वचा मुलायम हो जाएगी। होली के अगले दिनों के दौरान अपनी त्वचा तथा बालों को पोषाहार तत्वों की पूर्ति करें। एक चम्मच शुद्ध नारियल तेल में एक चम्मच अरण्डी का तेल मिलाकर इसे गर्म करके अपने बालों पर लगा लीजिए। एक तौलिए को गर्म पानी में भीगों कर पानी को निचोड दीजिए तथा तौलिए को सिर पर लपेट लीजिए तथा इसे 5 मिनट तक पगड़ी की तरह सिर पर बंधा रहने दीजिए। इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराईए इसे खोपड़ी पर तेल को जमने में मदद मिलती है। एक घण्टा बाद बालों को साफ ताजे पानी से धो डालिए।

 

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