टीआईएसएस, मआईटी और टाटा ट्रस्ट् की संयुक्त पहल सीएलआईएक्स को यूनेस्को का प्रतिष्ठित किंग हमाद बिन इसा अल-खलीफा पुरस्कार मिला

मुंबई/नई दिल्ली। द कनेक्टेड लर्निंग इनिशियेटिव (सीएलआईएक्स) को यूनेस्को का प्रतिष्ठित किंग हमाद बिन इसा अल-खलीफा पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यह टाटा इंस्टिट्यूट आॅफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस), मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) और टाटा ट्रस्ट्स की त्रिपक्षीय पहल है। यह अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में सूचना एवं संवाद प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग के लिये दिया जाता है।
सीएलआईएक्स का चयन 79 देशों के 143 आवेदनों में से किया गया और यह इस पुरस्कार के संस्थापना वर्ष 2006 के बाद सम्मानित एकमात्र भारतीय पहल है। इस पहल का चयन यूनेस्को के महानिदेशक ने एक अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक मंडल की संस्तुतियों के आधार पर किया, जिसमें प्रबुद्ध शिक्षा विशेषज्ञ, नौकरशाह और शिक्षाविद् शामिल थे, जो पाँच देशों में शिक्षा में आईसीटी के लिये कार्यरत हैं।
कनेक्टेड लर्निंग इनिशियेटिव (सीएलआईएक्स) एक साहसी और खोजपरक प्रयोग है, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रदान करता है, ताकि भारत के वंचित समुदायों से आने वाले हाई स्कूल के छात्रों की शिक्षा में सुधार हो सके। कक्षा में गतिविधि, प्रयोगशाला गतिविधि, आईटी सम्बंधित गतिविधि और शिक्षण के परिणामों की समीक्षा और मूल्यांकन जैसे चार अभिगमों द्वारा सीएलआईएक्स का लक्ष्य हिंदी, तेलुगु और अंग्रेजी में उच्च गुणवत्ता का शिक्षण अनुभव प्रदान करना है। सीएलआईएक्स प्रमाणित, व्यवहारिक, वैचारिक शिक्षण और मूल्यों, कुशलता तथा प्रतिस्पद्र्धात्मकता के विकास पर केन्द्रित है। सीएलआईएक्स ने कुल 478 सरकारी सेकंड्री स्कूलों में शिक्षा के परिणाम सुधारने में सहायता की है, जिनमें 2130 शिक्षक और 32437 विद्यार्थी छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना से आते हैं। वर्तमान में सीएलआईएक्स गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और डिजिटल साक्षरता के लिये तीन भाषाओं में 15 माॅड्यूल्स की पेशकश उन विद्यालयों में करता है, जिनमें आईसीटी प्रयोगशालाएं सक्रिय हैं। शिक्षक पेशेवर विकास कार्यशालाओं में 1767 शिक्षकों ने भाग लिया है और वह मोबाइल फोन द्वारा चालित कम्युनिटीज आॅफ प्रैक्टिस पर हैं।
सीएलआईएक्स की परियोजना निदेशक एवं टाटा इंस्टिट्यूट आॅफ सोशल साइंसेस में प्रोफेसर पदमा सारंगपानी ने कहा, ‘‘हमने तकनीक से रचनात्मक प्रशिक्षण को विस्तार दिया है- जहाँ छात्र सोचते हैं, समस्याएं सुलझाते हैं, खोज करते हैं, संवाद करते हैं और मिल-जुलकर काम करते हैं तथा शिक्षक सक्रिय शिक्षण प्रदान करते हैं। यह पाठ्यक्रम का बदलाव है, जो हमारी शिक्षा प्रणाली को चाहिये, बड़े पैमाने पर, जैसा कि नेशनल क्यूरिक्यूलम फ्रेमवर्क 2005 में निर्दिष्ट है। खोज से सीखने का छात्रों का उत्साह, आईसीटी को अपने शिक्षण में शामिल करने का शिक्षकों का उत्साह और मिजोरम, राजस्थान, तेलंगाना तथा छत्तीसगढ़ सरकारों का आईसीटी स्कूल लैब्स के छात्रों द्वारा उपयोग से खुश होना हमारे लिये प्रेरणा का बड़ा स्रोत रहा है।’’
ओपल लर्निंग के असोसिएट डीन, जे-डब्ल्यूईएल, मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी के कार्यकारी निदेशक एम.एस. विजय कुमार ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि खुलेपन, संपर्कशीलता और शिक्षा के सिद्धांतों के लिये इस परियोजना की प्रतिबद्धता भारत और अन्य किसी भी स्थान पर शिक्षा में परिवर्तन के लिये एक उपयोगी माॅडल के रूप में कार्य करेगी। यूनेस्को से किंग हमाद बिन इसा अल-खलीफा पुरस्कार प्राप्त करना अभिभूत करने वाला और ऊर्जावर्द्धक है। यह सम्मान इस परियोजना के प्रत्येक पहलू (पाठ्यक्रम की तैयारी, तकनीकी अनुप्रयोग, शिक्षक की तैयारी) में अभी तक के संयुक्त प्रयास के लिये है और वैश्विक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये नवोन्मेषी समाधानों पर केन्द्रित होने की प्रेरणा देता है।’’
टाटा ट्रस्ट्स के मैनेजिंग ट्रस्टी आर. वेंकटरमनन ने कहा, ‘‘कनेक्टेड लर्निंग इनिशियेटिव (सीएलआईएक्स) को मिला यूनेस्को का पुरस्कार शिक्षा की जटिल चुनौतियों के लिये समाधान खोजने के टाटा ट्रस्ट के दृष्टिकोण की पुष्टि करता है। यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों और तकनीक के अर्थपूर्ण उपयोग से संभव हो पाया है। सीएलआईएक्स नवोन्मेष, गठबंधन और खुलेपन के सिद्धांतों का उदाहरण है। हम शिक्षा में गुणवत्ता और समानता के लिये सीएलआईएक्स के लागूकरण हेतु कई साझीदारों के साथ कार्य करने के लिये प्रतिबद्ध हैं।’’
इस पहल में प्लेटफाॅर्म-आधारित मिश्रित-शिक्षा और शिक्षा में संवादपरक तकनीकों में एमआईटी की अग्रणी स्थिति, विद्यालय और शिक्षकों की शिक्षा में प्रभावी कार्यक्रमों में टीआईएसएस का अनुभव और भारत के वंचित समुदायों की सहायता के लिये टाटा ट्रस्ट की प्रतिबद्धता का संगम है। सरकारी हाई स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ काम करने के लिये इस पहल के अंतर्गत भारत के चार राज्यों के साथ भागीदारी की गई थी। इसके अंतर्गत शिक्षा शोध एवं अभ्यास केन्द्र एकलव्य जैसे गैर-लाभान्वी संगठनों और पाठ्यक्रम विकास तथा लागूकरण के लिये होमी भाभा सेंटर फाॅर साइंस एज्युकेशन और यूनिवर्सिटी आॅफ मिजोरम जैसे शिक्षा संस्थानों के साथ भी कार्य किया गया।
इस वर्ष के संस्करण का थीम था, ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने के लिये आईसीटी का उपयोग’, जिसका दर्शन था स्थायी विकास के लक्ष्य (एसडीजी) 4 के लिये आईसीटी के उपयोग में नवोन्मेष को बढ़ावा देना। वर्ष 2006 से यह पुरस्कार शिक्षा में आईसीटी के खोजपरक अभ्यासों को समर्पित है, जिसका लक्ष्य विश्वभर में शिक्षा प्रणालियों का विकास करना और उच्च गुणवत्ता के तथा समावेशी अवसरों को सभी के लिये प्रस्तुत करना है। शिक्षा के लिये आईसीटी को मुख्यधारा में लाने के मोरक्को के राष्ट्रीय कार्यक्रम (प्रोग्राम डे जनरलइजेशन डेस टेक्नोलाॅजीस डे आई‘ इंफोर्मेशन एट डे ला कम्यूनिकेशन पोर आई‘एनसाइनमेन्ट प्रोग्राम जीनी) को भी यह पुरस्कार मिला।

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