हर बेटी बने लक्ष्मीबाई

-विमल वधावन योगाचार्य, एडवोकेट (सुप्रीम कोर्ट)
कुछ दिन पूर्व रंगोली चन्देल नामक एक महिला अखबारों और सोशल मीडिया पर इसलिए चर्चा का विषय बन गई की उसने एक वीडियो के द्वारा यह वक्तव्य जारी किया कि देशभर में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वाले लोगों को लाईन में खड़े करके गोली से उड़ा देना चाहिए। वैसे इस वक्तव्य में कहीं भी साम्प्रदायिकता की झलक नहीं थी। परन्तु चोर की दाढ़ी में तिनका सिद्ध करते हुए कुछ मुस्लिम हितैशियों ने इस वक्तव्य का निष्कर्ष निकाला कि जैसे रंगोली ने मुस्लिम नर-संहार की बात की। मैं रंगोली का परिचय जानने के लिए जब इण्टरनेट पर छानबीन कर रहा था तो कंगना रनौत का एक वीडियो मेरे सामने आया जिसमें वह कह रही थी कि रंगोली ने कहीं भी यदि मुस्लिम नर-संहार की बात की हो तो मैं और मेरी बहन माफी मांगने के लिए तैयार हैं। इसके बाद मैं कंगना रनौत के जीवन के बारे में भी छानबीन करने लगा। मेरी छानबीन उक्त विषय से हटकर इन दोनों बहनों के व्यक्तिगत जीवन की ओर पहुँच गई। रंगोली और कंगना दोनों बहने हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले से सम्बन्धित हैं। कंगना अपने विद्यालय की पढ़ाई छोड़कर फिल्म उद्योग में अपना भाग्य अजमाने चली गई। फिल्म उद्योग में इसका कोई पारिवारिक सहारा नहीं था। किसी समाज या उद्योग में अकेली महिला को जीवन संघर्ष करते हुए जितनी यातनाएँ या कुदृष्टियाँ देखने को मिल सकती हैं उन सभी का सामना कंगना को भी करना पड़ा, परन्तु कंगना के अन्दर उसकी हिमाचली बहादुरी जागृत थी। इसलिए वह किसी कुदृष्टि का शिकार नहीं हुई बल्कि उसने हर कुदृष्टि का गला दबाकर ऐसी मानसिकताओं को समूल नष्ट करने में सफलता प्राप्त की। कंगना ने जब पहली बार एक उच्च दर्जे के नारी अपराधी के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस को मजबूरी में उस व्यक्ति को कहना पड़ा कि आज के बाद यदि कंगना को कुछ भी हानि पहुँचाई गई तो उसकी अमीरी भी रक्षा नहीं कर पायेगी। थाने में शिकायत के बाद उस अपराधी ने अपनी दिशा बदल ली। इस सफलता से कंगना को शेरनी बनकर घूमने का अवसर प्राप्त हो गया। इसी प्रकार कंगना ने कुछ और नारी अपराधियों को खुली चुनौती दी तो इसके बाद फिल्म जगत में कंगना की एक गजब की छवि बन गई। ईश्वरीय संयोग कहना चाहिए कि कंगना को ‘रिवालवर रानी’, ‘गैंगेस्टर’, ‘क्वीन’, ‘पंगा’ और ‘मणिकर्णिका’ (रानी लक्ष्मीबाई) जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएँ मिली। कंगना का वास्तविक जीवन इन फिल्मों की भूमिका से लगभग मैच कर रहा था। कंगना के जीवन को देखकर मुझे लगा कि हर लड़की को नारी अपराधियों के विरूद्ध इसी प्रकार लक्ष्मीबाई का रूप धारण करना चाहिए।
कंगना की तरह रंगोली भी अपने काॅलेज जीवन में एक ऐसे ही नारी अपराधी का शिकार हो गई। उसका एक सहपाठी पहले भी उसे तंग करता था, परन्तु रंगोली ने यह बात न माँ-बाप को बताई और न ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। रंगोली उस नारी अपराधी की मनोवृत्ति से बेखबर थी कि एक दिन उसने तेजाब फेंकवाकर रंगोली के चेहरे की सारी सुन्दरता नष्ट कर दी। रंगोली को अब एहसास हुआ कि यदि समय रहते उसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवा देती तो शायद यह नौबत न आती। इन दोनों बहनों के साथ घटित घटनाओं को देखकर मेरे मन में सहसा एक पुराने प्रश्न का सटीक उत्तर पैदा हो गया। महिलाओं पर कुदृष्टि केवल भारतीय समाज की समस्या नहीं है, बल्कि यह सारे संसार की समस्या है। परन्तु दुःखदाई यह है कि जितनी महिलाओं को कुदृष्टि का शिकार होना पड़ता है वे सभी पहले कदम पर ही ऐसे नारी अपराधियों के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करवाती। यदि पहली कुदृष्टि को ही शिकायत के रूप में पुलिस रिकाॅर्ड में दे दिया जाये और कत्र्तव्यशील पुलिस अधिकारी ऐसी प्रत्येक शिकायत पर संज्ञान लेकर कुदृष्टि डालने वाले युवकों को बुलाकर चेतावनी दे दें कि यदि इस प्रकार की शिकायत दुबारा आई तो उनके लिए बचना मुश्किल होगा। ऐसी शिकायतों के बाद तो धन-सम्पन्न और अत्यन्त प्रभावशाली लोगों को भी महिला के जीवन से हटना ही होगा। ऐसी प्रथम कुदृष्टि शिकायतों का दोहरा लाभ होगा। एक तरफ नारी अपराधी सचेत होकर अपना मार्ग बदल लेंगे और दूसरी तरफ पीड़ित लड़कियाँ अधिक घिनौने अपराधों का शिकार नहीं होंगी। इसके साथ-साथ समाज में उनकी छवि भी निडर लक्ष्मीबाई जैसी बन जायेगी।
भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकाॅर्ड ब्यूरो द्वारा एकत्रित आंकड़ों के आधार पर यह पता लगता है कि भारत में यदि 100 बलातकार होते हैं तो उनमें से 71 बलातकार पुलिस के सामने शिकायत के रूप में नहीं आते। इसका अर्थ है कि भारत की 71 प्रतिशत पीड़ित महिलाएँ अपराधी के डर से या सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि के डर से ऐसे अपराधियों के विरुद्ध शिकायत दर्ज नहीं कर पाती। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अक्सर बलात्कार जैसे अपराध अधिकतर पुराने जानकार लोगों के द्वारा होते हैं। यदि पीड़ित कन्या उनकी पहली कुदृष्टि पर ही सचेत होकर पुलिस में शिकायत कर देती या अपने परिवार के लोगों के सामने इसका उल्लेख कर देती तो सम्भवतः बलात्कार जैसी नौबत ही न आती। वैसे भी पहली कुदृष्टि की शिकायत और पुलिस के द्वारा ऐसी शिकायतों से निपटने की प्रक्रिया बहुत सरल होती है। पहली अवस्था में ही यदि अपराधी को धमका दिया जाये तो उसके कदम अवश्य ही ठिठक जाते हैं। परन्तु पहली कुदृष्टि की शिकायत न करने के कारण बलात्कार झेलना मजबूरी बन जाती है और पीड़िता उस मजबूरी के कारण ऐसे घिनौने अपराधों की शिकायत ही नहीं करती।
इस समस्या का समाधान कंगना रनौत जैसा जीवन प्रस्तुत करता है। जिसने एक धन-सम्पन्न और अत्यन्त प्रभावशाली व्यक्ति की पहली कुदृष्टि को ही पुलिस रिकाॅर्ड के रूप में परिवर्तित कर दिया। परिणामस्वरूप वह अपराधी के कदमों को बढ़ने से रोकने में सफल हो पाई। मेरे विचार में कंगना रनौत को सारे संसार की महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक जीवन समझा जाना चाहिए। कंगना रनौत के इस जीवन सिद्धान्त को लक्ष्मीबाई के नाम से और अधिक मजबूती और उत्साह मिल सकता है। वैसे अच्छा तो यही होता कि नारी अपराधियों के विरुद्ध लक्ष्मीबाई अभियान को कंगना रनौत स्वयं शुरू करती और धरातल पर सारे विश्व की महिलाओं को एक उत्साहवर्द्धक प्रेरणा देती। मैंने जब इस विषय पर कुछ महिला अधिवक्ताओं से बात की तो मेघा मेहता भाटिया ने इस सारे अभियान के लिए अपना जीवन लगाने की तत्परता दिखाई। इस युवती अधिवक्ता ने तो लक्ष्मीबाई अभियान को प्रारम्भ करने का बीडा भी उठा लिया। पहले कदम के रूप में सोशल मीडिया के माध्यम से सारे संसार की महिलाओं में यह विचार फैलाया जा रहा है कि अपने विरुद्ध किसी भी पुरुष को नारी अपराधी बनने से रोकने के लिए उसकी पहली कुदृष्टि को देखते ही पुलिस में शिकायत दर्ज करवा देनी चाहिए। अधिवक्ता मेघा मेहता ने फेसबुक पर ‘लक्ष्मीबाई (ब्रिगेड)’ नाम से एक अभियान की शुरुआत भी कर दी है। इसमें यदि किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत हो तो मेघा मेहता भाटिया का लक्ष्मीबाई ग्रुप (9999264228) देश के प्रत्येक प्रान्त और प्रत्येक जिले से जुड़ी महिला अधिवक्ताओं को उनकी सहायता के लिए खड़ा करेगा। इस लक्ष्मीबाई ग्रुप ने देशभर से महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ महिला अधिवक्ताओं को अपनी सेवाएँ देने के लिए जोड़ना भी शुरू कर दिया है। मुझे आशा है कि यह लक्ष्मीबाई अभियान भविष्य में महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई लहर पैदा करेगा। यदि कंगना रनौत जैसी कुछ शेरनियाँ इस अभियान के साथ जुड़ गई तो निःसंदेह लक्ष्मीबाई लहर एक विशाल क्रांति बनकर खड़ी हो जायेगी।

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