एसआरएम यूनिवर्सिटी ने फुएल सेल आधारित एक ट्रेन प्रोटोटाइप के लिए इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई के साथ करार किया

एसआरएम यूनिवर्सिटी, एपी – अमरावती और एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी ने इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई के साथ एक करार किया है। यह फुएल सेल आधारित ट्रेन प्रोटोटाइप बनाने के लिए है। एसआरएम एक अग्रणी विश्वविद्यालय है जो उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान में लगा हुआ है। और आईसीएफ रेल मंत्रालय के तहत एक प्रोडक्शन यूनिट है जो कोच का निर्माण करने के काम में लगा हुआ है।
फुएल सेल्स की फॉस्सिल फुएल एंजिन के मुकाबले उच्च कार्यकुशलता है। इंटरनल कंबस्टन इंजन के मुकाबले ये बगैर शोर के काम करते हैं। हाइड्रोजन आधारित फुएल सेल्स भी फॉस्सिल फुएल जलने से होने वाले प्रदूषण को खत्म कर सकते हैं क्योंकि जब ये उपयोग में होते हैं तो कार्बन डायऑक्साइड (एक ग्रीन हाउस गैस) नहीं बनाते हैं।
एसआरएम एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स की अवधारणा बनाने और उसे तैयार करने के लिए जिम्मेदार होगा। इनमें फुएल सेल्स, बैट्रियां, सुपर कैपेसिटर्स, डीसी / डीसी कनवर्टर और कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं जबकि आईसीएफ उपकरण का विकास डीसी लिंक से आगे करेगा और यह कोच में स्विचर के आगे होगा। प्रस्तावित फुएल सेल पावर्ड ट्रेन में प्रोटोन एक्सचेंज मेमब्रेन फुएल सेल (पीईएमएफसी) होगा जो लिथियम आयन बैट्री और सुपर कैपेसिटर के साथ होगा।
मेन प्रोटोटाइप का विकास दिसंबर 2018 तक होना है और उम्मीद की जाती है कि फुएल सेल आधारित यात्री ट्रेन दिसंबर 2019 से जनता को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए काम करने लगेगी ।
डॉ. डी नारायण राव, प्रो. वीसी, एसआरएम यूनिवर्सिटी, एपी अमरावती ने कहा, “हाइड्रोजन आधारित पीईएम फुएल सेल सबसे अच्छे अक्षय ऊर्जा स्रोतों में से एक है और इसकी कार्यकुशलता बढ़ती जाती है जबकि कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन शून्य है। लोकोमोटिव के रूप में 100 अश्व शक्ति के फुएल सेल पावर्ड स्विचर कोच का समानांतर विकास यात्री ट्रेन और दो कोच के साथ किया जाएगा। प्रत्येक कोच 65 यात्री की क्षमता वाला होगा और 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर चलेगा।”

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