स्टाइनबाईस विश्वविद्यालय बर्लिन द्वारा वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रबंधन में मास्टर्स डिग्री

नई दिल्ली, निशा जैन। जर्मनी के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय स्टाइनबाईस यूनिवर्सिटी बर्लिन ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एशिया में मास्टर्स डिग्री की शुरुआत की है। इस कोर्स को पूरी तरह एशिया के लिए ही डिजाइन किया गया है जिससे भारत के प्रधानमंत्री ‘श्री नरेंद्र दामोदर मोदी’ द्वारा चलाए गए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तकनीकी ढांचे को सुदृढ़ और विकसित करने में मदद मिलेगी। स्टाइबाईस यूनिवर्सिटी ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री के भारतीय यूनिवर्सिटियों से बातचीत कर रही है। अन्य विश्वविद्यालय और संस्थानों ने स्टाइबाईस यूनिवर्सिटी से जुड़ने हेतु रुचि दिखाई है। यह कोर्स स्टाइनबाईस ग्लोबल इंस्टीट्îूट ट्युबीनगन (एसजीआईटी), जर्मनी के द्वारा संचालित किया जाएगा साथ ही आईवोरी एज्युूकेशन के सहयोग से पूरे एशिया में इसे विस्तारित भी किया जाएगा।
इस सहकार्यता के अंतर्गत आईवोरी एज्यूकेशन विश्वविद्यालयों, सरकारों, निजी इंस्टीटूशन और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने का कार्य करेगा। साथ ही यह तकनीकी, छात्र प्रबंधन और मार्केटिंग में सहायता देने का कार्य भी करेगा।
यह ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट के क्षेत्र में अभी तक की पहली ऐसी मास्टर्स डिग्री है जिसमें आधुनिक शिक्षा प्रक्रिया के साथ तकनीकी, प्रबंधन और मार्केटिंग को रणनीतिक ढांचा प्रदान किया जाएगा और इसे अमल में लाया जाएगा। यह कोर्स विद्यार्थियों को पेड प्रोजेक्ट में भी मदद करेगा।
इस रोज़गार युक्त स्टडी कोर्स के ढांचे में एक ठोस तकनीकी प्रोजेक्ट को तब्दील किया जाएगा, जैसे कि नैनो टेक्नोलॉजी, मेडिसिन, बायोटेक्नोलॉजी, आईटी, कंस्ट्रकशन आदि। इस प्रोजेक्ट में- विदेशांे में उत्पादन के कारखाने लगाना, नई उत्पादन प्रक्रिया का इस्तेमाल करना, अंतर्राष्ट्रीय सेवा संस्थान की स्थापना करना, आईटी प्रोजेक्ट्स को अमल में लाना, उत्पादन प्रक्रिया का बेहतर तरीके से प्रयोग करना या कंपनी में नोलेज मैनेजमेंट का उपयोग करना आदि शामिल होगा।
एसजीआईटी और प्रोग्राम के निदेशक प्रो. बरट्राम लोहमुलर का कहना है कि “मेक इन इंडिया एक ऐसी सशक्त पहल है जिसमें भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में उचित जगह बनाने की ताकत है। इस प्रोग्राम के द्वारा हम पेशेवर लोगों और कंपनीज को ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट के क्षेत्र में उत्कृष्टता विकसित कराने का प्रयास करेंगे। आईटी के क्षेत्र में पूरे विश्व में भारत की भूमिका काबिल ए तारीफ है। इसके द्वारा जिन क्षेत्रों से भारतीय कंपनीज को फायदा होता है, उनमें तकनीकी उत्कृष्टता विकसित करने में भी मदद मिलेगी। इस कोर्स की फीस को भी न्यूनतम रखा गया है।प्रो. लोहमेलरपिछले 20 वर्षों से जिआइजेड से जुड़े हुए हैं और भारतीय प्रबंधकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
इस दो साल के कोर्स को अंग्रेजी भाषा में कराया जाएगा। चूंकि यह एक जर्मन मास्टर्स डिग्री है इसीलिए जो लोग जर्मनी में काम करने के इच्छुक हैं उन्हें उदार वीजा नीति का फायदा भी मिल सकता है। भारत में यह कोर्स अगस्त 2018 से शुरू होगा।
आईवोरी एज्युकेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक निदेशक कपिल रामपाल का कहना है कि “हम इस कोर्स को विकसित करने के लिए पिछले तीन सालों से एसजीआईटी के साथ काम कर रहे हैं। प्रतिभागी अपनी नौकरी छोड़े बिना ही जर्मन मास्टर डिग्री के साथ ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट में ज्ञान और उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं। इस कोर्स को पूरा करने के लिए जर्मनी में रूकने का समय भी हमने बहुत कम रखा है।“

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