टेक्सटाइल डिजाइनिंग, करियर की एक राह यह भी

-डॉ. रूपक वशिष्ठ
सीईओ व डीजी, अपैरल मेडअप्स एंड होम फर्निशिंग सेक्टर स्किल काउंसिल

अब कपड़े इंसान की केवल जरूरत नहीं, बल्कि स्टेट्स सिंबल का हिस्सा है। यही कारण है टेक्सटाइल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह से टेक्सटाइल के क्षेत्र में करियर की संभावनाएं भी बढ़ गई है। यदि आप ग्लैमर, पैसा और प्रसिद्धि की चाह रखते हैं तो टेक्सटाइल डिजाइनिंग एक बेहतर विकल्प है। जहां अपने डिजाइनिंग और काबिलियत पर कामयाबी की नई इबारत लिख सकते है।
डिजाइनिंग के अन्य क्षेत्रों की तरह ही यह करियर भी क्रिएटिविटी से लबरेज है। एक टेक्सटाइल डिजाइनर को जहां सैंपल डिजाइन तैयार करने, स्केच तैयार करने तथा टैक्सचर एवं फैब्रिक संबंधी प्रयोग करने पड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर उसे क्लाइंट को अपने प्रोडक्ट या डिजाइन की ओर आकर्षित करने के लिए प्लानिंग एवं प्रेजेंटेशन पर भी विशेष ध्यान देने पड़ता है। उसे विस्तारपूर्वक अपने आइडियाज एवं कांसेप्ट को क्लाइंट को समझाना पड़ता है। डिजाइन संबंधी रिसर्च, डेवलपमेंट आदि सभी बिन्दुओं में बेहतर तालमेल बैठाना होता है। इसके अलावा उन्हें कलर, टेक्सचर एवं पैटर्न की बेसिक नॉलेज, टेक्सटाइल मैटेरियल का ज्ञान, बाजार के नए ट्रैंड्स, टीम भावना के साथ काम करने की दक्षता व कम्युनिकेशन स्किल्स को मजबूत बनाए रखने की जरूरत होती है। इन सब के बीच यह आवश्यक है कि क्रिएटिविटी दर्शाते हुए अपने क्लाइंट को दी गई समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की योग्यता होनी चाहिए। युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए भारत सरकार की गैर लाभकारी संस्था अपैरल मेडअप्स एंड होम फर्निशिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (एएमएच एसएससी) अलग-अलग जॉब रोल में प्रशिक्षण देती है।

क्यों है आने वाले वक्त में अवसर :-

वैश्विक स्तर पर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल एंड अपैरल निर्यातक देश है। नेशनल इनवेस्टमेंट प्रमोशन एंड फैशिलिटेशन एजेंसी के मुताबिक, यह क्षेत्र करीब 28 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। यह इंडस्ट्री 2021 तक 223 बिलियन डॉलर की हो जाएगी। कोरोनावारयस के संक्रमण के बाद की बहुत सारे इंटरनेशनल टेक्सटाइल एंड अपैरल कंपनियां भारत में शिफ्ट होना चाह रही है। इसकी वजह से भी देश में इस क्षेत्र में करियर के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा भारत सरकार टेक्सटाइल के निर्यात को बढ़ावा दे रही है।

कोर्स के लिए योग्यता :-

इसमें कोर्स करने के लिए छात्र की योग्यता कम से कम 10़2 होना आवश्यक है। स्नातक स्तर के पाठयक्रमों में प्रवेश 10़2 के बाद तथा पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के पाठयक्रमों में दाखिला ग्रेजुएशन के बाद मिलता है। कई यूनिवर्सिटी व प्राइवेट संस्थान तीन महीने के डिप्लोमा एवं दो साल के एडवांस डिप्लोमा पाठयक्रम भी कराते हैं, जिन्हें स्नातक के बाद किया जा सकता है। एएमएच एसएससी द्वारा भी इंडस्ट्री के अनुसार कई जॉब रोल में सर्टिफिकेट कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि इसके लिए किसी स्ट्रीम का निर्धारण नहीं किया गया है, लेकिन यदि आप आर्ट एंड क्राफ्ट के हुनरमंद है तो आपके लिए बेहतर हो सकता है। यूनिवर्सिटी और कॉलेज का दाखिला को लेकर अपना मापदंड है। कुछ प्रवेश परीक्षा के आधार पर तो कुछ मेरिट के आधार पर दाखिला देते है।

इस रूप में हैं अवसर :-

  • टेक्सटाइल या फैब्रिक डिजाइनर – किसी भी टेक्सटाइल या फैब्रिक डिजाइनर का काम कपड़े के ऊपर प्रिंट को डिजाइन करना होता है। इसके अलावा ये डिजाइनर फैब्रिक के ऊपर प्रिंट या टेक्सचर को भी डिजाइन करते हैं।
  • एंब्रॉयडरी डिजाइनर – आमतौर पर एंब्रॉयडरी का काम भी टेक्सटाइल डिजाइनर ही करते हैं। किसी भी प्लेन अथवा प्रिंट फैब्रिक को कैसा लुक देना है, यह तय करना एंब्रायडरी डिजाइनर के जिम्मे होता है।
  • डाइंग एवं प्रिंटिंग कंसल्टेंट – इसके अंतर्गत यह तय किया जाता है कि डाइंग एवं प्रिंटिंग की प्रक्रिया कैसी होगी या किस कपड़े पर किस तरह का प्रिंट होना है, क्लाइंट को किस तरह का प्रिंट चाहिए इत्यादि।

टेक्सटाइल लैब मैनेजर :-

इनका काम मुख्यतः टेक्सटाइल लैब में होता है। कपड़े पर कौन सा रंग जमेगा या कौन सा फाइबर प्रयोग में लाना है, यह सब जिम्मा लैब मैनेजर का होता है। इनके ऊपर पूरे लैब की जिम्मेदारी भी होती है।

फैब्रिक रिसोर्स मैनेजर :-

फैब्रिक रिसोर्स मैनेजर का काम यह पता करना होता है कि फैब्रिक या कॉटन कहां से उपलब्ध हो सकता है या उसकी कीमत कितनी होगी। क्लाइंट की डिमांड जिस फैब्रिक की है, उसे कहां से लाया जा सकता है।

टेक्सटाइल की पढ़ाई के लिए है सुविधा :-

टेक्सटाइल में पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप और बैंकों से लोन दोनों सुविधाएं मिल जाती है। इसमें स्कॉलरशिप दो रूपों में दी जाती है। एक तो गरीब या निर्धन छात्रों को (जिनका परिणाम पूर्व कक्षाओं में अच्छा रहा है) कॉलेज की ओर से फीस में कमी अथवा फीस माफी के रूप में। उन्हें साल या कोर्स के अंत में स्कॉलरशिप देकर खर्चे को लौटा दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर टेक्सटाइल कंपनियां छात्रों को मदद पहुंचाने के उद्देश्य से भी स्कॉलरशिप प्रदान करती हैं। राज्य अथवा केंद्र सरकार भी समय-समय पर स्कॉलरशिप प्रदान करती है। टेक्सटाइल डिजाइन को प्रोफेशनल कोर्स की श्रेणी में रखा जाता है, अतरू इसके लिए लोन का प्रावधान भी उसी लिहाज से तय होता है।

नौकरी के अवसर :-

बाजार में आए बदलाव को देखते हुए कहा जा सकता है इसमें रोजगार के व्यापक अवसर मौजूद हैं। प्रोफेशनल्स किसी भी गारमेंट मैनुफैक्चरिंग कंपनी, फैशन डिजाइनिंग एजेंसी, टेक्सटाइल रिटेल में पार्ट टाइम या फुलटाइम जॉब पा सकते हैं। हालांकि उन्हें शुरू में टेक्सटाइल डिजाइनर के अधीन होकर काम करना पड़ता है। एक्सपोर्ट हाउस में भी भारी संख्या में टेक्सटाइल डिजाइनरों को रोजगार मिलता है। कुछ सरकार द्वारा प्रायोजित ऐसी प्राइवेट सिल्क, हैंडलूम, खादी, जूट एवं क्राफ्ट की संस्थाएं भी रोजगार प्रदाता के रूप में जानी जाती हैं। विभिन्न संगठनों के साथ जुड़कर फ्रीलांस वर्क भी किया जा सकता है।

वेतन :-

इस क्षेत्र में वेतन काफी आकर्षक होता है। टेक्सटाइल डिजाइन से पास हुए नए छात्रों को 12,000-15,000 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है। एक दो साल का अनुभव होने पर उसमें वृद्धि होती है। सामान्य एक्सपोर्ट हाउस भी अनुभवी टेक्सटाइल डिजाइनरों को 25,000-40,000 रुपए प्रतिमाह का वेतन देते हैं, जबकि फ्रीलांस टेक्सटाइल डिजाइनरों को उनके असाइनमेंट के आधार पर भारी आमदनी होती है।

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