88 साल की हो गईं सुरों की महारानी “लता मंगेशकर”

जन्मदिन मुबारक

आज हम बात कर रहे हैं सिनेमाजगत में मशहूर एक हस्ती के बारे में जिसे सुरों की महारानी कहा जाता है आज वो 88 साल की हो गई हैं। लता जी ने महज़ 13 साल की उम्र में लता मंगेशकर जी ने अपनी जिंदगी का सबसे पहला गाना सन 1942 में रिकॉर्ड किया था। यह गीत एक मराठी फिल्म के लिए था। वहीं अब लता मंगेशकर बॉलीवुड में कम ही गाने गाती हैं। उनका फिल्मी गाना आखिरी बार साल 2015 में आया था। 1942 से लेकर 2015 तक लता दी ने इंडस्ट्री को 73 साल दिए। लता जी ने अब तक 20 से अधिक भाषाओं मे 25000 से अधिक गाने गाए हैं।
लता मंगेशकर का जन्म इंदौर में कलाकारों के परिवार में हुआ। उनके पिता थिएटर कंपनी के मालिक थे वहीं मंगेशकर सिस्टर्स संगीत की छांव में पली बढ़ीं। इस दौरान मंगेशकर परिवार के बच्चों को क्लासिकल म्यूजिक से रूबरू करवाया गया। पिता के देहांत के बाद लता मंगेशकर मुंबई आ गईं। इस उन्होंने मास्टर और मेंटर विनायक की गाइडेंस में काम किया। विनायक 1930 के फिल्म मेकर थे और लता मंगेशकर के फैमिली फ्रेंड थे। वहीं उनकी जिंदगी में गुलाम हैदर ने भी अहम कि रदार निभाया। गुलाम हैदर ने ही लता मंगेशकर को पहला ब्रेक दिया था। उस वक्त सुरैया, शमशाद बेगम और नूर जहां का जमाना था। इन बड़ी नामी हस्तियों का संगीत की दुनिया में जादू चला हुआ। इन सबके बीच लता मंगेशकर बिलकुल नई थीं। तभी भारत पाक विभाजन के बाद लता मंगेश्कर को बेहतरीन मौके मिलने शुरु हुए।
इस बीच फिल्म ‘ताजमहल’ से लता मंगेश्कर का गाया हुआ गीत, ‘आएगा आने वाला’ आया। इस गाने से सबने अंदाजा लगा लिया की लता मंगेशकर काफी दूर तक जाएंगी। 1950 से लेकर 60 के दशक तक लता ने हर तरह के गाने गाए। भजन ‘अल्लाह तेरो नाम’ से लेकर डांस नंबर तक उन्होंने कई सुपरहिट्स गाए। लता जी का गाना ‘होंठों पे ऐसी बात’, ‘लग जा गले’ जैसे गानों ने उन्हें पहचान दिलाना शुरू कर दिया था। वहीं लता मंगेशकर का गाया एक देशभक्ति गीत लोगों के दिल को ऐसे छुआ कि आज तक लोगों के दिलों से वह दूर नहीं हुआ।
पहली बार लता ने वसंग जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म कीर्ती हसाल के लिये गाया। उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता फ़िल्मों के लिये गाये इसलिये इस गाने को फ़िल्म से निकाल दिया गया। लेकिन उसकी प्रतिभा से वसंत जोगलेकर काफी प्रभावित हुए। पिता की मृत्यु के बाद , लता को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्हें अभिनय बहुत पसंद नहीं था लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु की वजह से पैसों के लिए उन्हें कुछ हिन्दी और मराठी फ़िल्मों में काम करना पड़ा।
लता मंगेशकर ने अभिनेत्री के रूप में भी काम किया। उनकी पहली फ़िल्म पाहिली मंगलागौर (1942) रही, जिसमें उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया जिनमें, माझे बाल, चिमुकला संसार (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी मां (1945), जीवन यात्रा (1946), माँद (1948), छत्रपति शिवाजी (1952) शामिल थी। बड़ी मां में लता ने नूरजहां के साथ अभिनय किया और उसके छोटी बहन की भूमिका निभाई आशा भोंसले ने। उन्होंने खुद की भूमिका के लिये गाने भी गाये और आशा के लिये पार्श्वगायन किया।
इतना संघर्ष करने के बाद आज लता जी उस मकाम पर हैं जहां होने की हर किसी की ख्वािहश होती है।

-शबनम

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