पारस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कैंसर रोगियों से ऑन्कोलॉजिस्ट के संपर्क में रहने का आग्रह किया

गुरुग्राम। कई कैंसर मरीजों को कोरोनोवायरस महामारी के दौरान हॉस्पिटल में जाकर अपना ट्रीटमेंट जारी रखने में डर लग रहा है। गुरुग्राम के पारस अस्पताल ने एक रोबस्ट कैंसर केयर फैसिलिटी को लगाया है जिससे मरीजों की पर्याप्त जांच और रोकथाम के उपाय हों सके। पारस हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के पारस कैंसर सेंटर के चेयरमैन डॉ (कर्नल) आर रंगा राव ने कहा कि हॉस्पिटल हेल्थ केयर सिस्टम ने कम्युनिटी को जरूरी मेडिकल केयर प्रोवाइड कराने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर तब जब कोई संकट हो। उन्होंने कैंसर मरीजों से अपने ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ संपर्क में रहने का आग्रह किया अगर उनके लिए हेल्थ सेंटर में आना मुमकिन न हो तो वो डिजिटल माध्यम से अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क में रह सकते हैं।
उनके ट्रीटमेंट प्रोसीजर को और अधिक सटीक बनाने के लिए, हॉस्पिटल ने कैंसर के मरीजों को तीन केटेगरी हाई प्रायोरिटी (क्यूरेटिव इंटेंट), मीडियम प्रायोरिटी और लो प्रायोरिटी (पैलिवेटिव इंटेंट) में बांटा है। हाई प्रायोरिटी में ऐसे मरीज शामिल हैं जिनकी कंडीशन बहुत क्रिटिकल है मतलब जिनकी जिन्दगी दांव पर लगी है/या वे जो क्लीनिकली अनस्टेबल है/या जहां नियोजित उपचार के परिणामस्वरूप एक महत्वपूर्ण लाभ (जैसे जीवन को लंबा करना या जीवन की गुणवत्ता में सुधार) की संभावना है। मीडियम प्रायोरिटी में ऐसे मरीज शामिल हैं जिनकी कंडीशन खराब है लेकिन उनकी जिन्दगी खतरे में नहीं है औरु उनका इलाज कुछ दिन के लिए टाला जा सकता है। हालांकि 6-8 हफ्ते की ज्यादा देरी परिणाम या लाभ पर प्रभाव डाल सकती है। अंतिम, लो प्रायोरिटी में वे मरीज शामिल हैं जिनके हालत इतनी स्टेबल है कि वह सीओवीआईडी -19 प्रकोप के बाद अपना इलाज करवा सकते हैं और अपने इलाज में इतनी देरी कर सकते हैं। इसमें ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिनके ट्रीटमेंट से उन्हें कोई लाभ (जीवन को लम्बा करने या जीवन की गुणवत्ता में सुधार) होने की संभावना नहीं है, ऐसे मरीजों को कम प्रायोरिटी दी जाती है।
पारस हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के पारस कैंसर सेंटर के चेयरमैन डॉ (कर्नल) आर रंगा राव ने कहा, “हमारी मल्टीडिस्प्लीनरी टीम प्रत्येक मरीज की पर्सनल लेवल पर रिव्यु करती है ताकि यह तय हो सके कि कोई चेंज होने पर इलाज की जरूरत हो। इसलिए अपने डॉक्टर या नर्स से टेलीफोन या ईमेल माध्यम से संपर्क में रहना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके ट्रीटमेंट को कैसे और क्यों मॉडिफाई की जरूरत है। आपके हेल्थ को होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए कैंसर ट्रीटमेंट प्लान को कोविड-19 से होने वाले रिस्क को कम करने के लिए एडॉप्ट किया जा सकता है। एडॉप्शन की रणनीति मेडिकल गोल के आधार पर भिन्न हो सकती हैय उदाहरण के लिए, क्यूरेटिव ट्रीटमेंट को जारी रखने की संभावना यह सुनिश्चित करने के लिए सबसे अच्छा मौका है रिजल्ट अच्छे आएं। पैलिएटिव थेरेपी से गुजर रहे मरीजों में कोविड 19 के खतरे को पोटेंशिअल ट्रीटमेंट से ठीक किया जा सकता है। हमारा हॉस्पिटल अपडेट केस डिफिनिशन के आधार पर स्क्रीनिंग प्रश्नावली का उपयोग कर रहा है। पब्लिक एरिया में लगे पोस्टर के चिन्ह लक्षण वाले मरीजों से लेके हेल्थ केयर वर्कर को अलर्ट कर रहे हैं। सभी मरीज ER और स्क्रीनिंग के जरिये या तो आई पी डी या ओ पी डी में एडमिट किये जा रहे हैं। इसके अलावा, सभी हेल्थ केयर प्रोफेशनल इन्फेक्शन की रोकथाम और नियंत्रण के लिए विभिन्न स्वास्थ्य निकायों द्वारा सुझाए गए उपायों और नियमों का पालन कर रहे हैं।’
अब कई कैंसर मरीज ओरल कीमोथेरेपी और कीमोथेरेपी ड्रग के घरेलू इंफ्यूजन का विकल्प चुन रहे हैं लेकिन डॉक्टर यह नहीं सुझाते हैं क्योंकि वे अनिश्चित हैं कि मरीज सही ढंग से अपना इलाज करा रहे हैं या नहीं। यहां तक कि ASCO (अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी) ने कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट के लिए भी कुछ तथ्य निर्धारित किया है, जिसके अनुसार जो मरीज डीप रिमिशन में है और जो मेंटेनेंस थेरेपी करा रहे हैं, कीमोथेरेपी को रोकना एक विकल्प हो सकता है। इसी तरह, उन लोगों के लिए जिनमें एडजुवेंट कीमोथेरेपी का लाभ छोटे और जहां गैर-प्रतिरक्षा दमनकारी होने की उम्मीद है ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं (उदाहरण के लिए, हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव अर्ली ब्रेस्ट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी या प्रोस्टेट कैंसर), कोविड-19 के जोखिमों को देखते हुए कीमोथेरेपी को छोड़ना उचित हो सकता है।

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