एक आम समस्या है गर्मियों में एड़ियों का फटना……कैसे पाएं निजात?

-शहनाज हुसैन
(अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ व हर्बल क्वीन)

गर्मियों में फटी एड़ियाँ आम समस्या है। अक्सर यह महसूस किया गया है की लगभग 25 प्रतिशत लोग गर्मियों में इस समस्या को झेलते है व महिलाएं इस समस्या से पुरुषों की बजाय ज्यादा पीड़ित होती हैं। मौसम बदलने का विपरीत असर हमारी सेहत, त्वचा के इलावा एड़ियों पर भी उतना ही पड़ता है। गर्मियों में तापमान बढ़ने से वातावरण में नमी में कमी आ जाती है जिसकी वजह से हमारी एड़ियों की त्वचा सूखी हो जाती है। जब रूखापन बढ़ जाता है तो फटी एड़ियों का स्वरूप ले लेता है।
हमारे पांव को नमी केवल पसीना निकलने से ही मिलती है जबकि गर्मियों के मौसम में हम अक्सर सैंडिल या खुली हवाई चप्पल पहनने में सहजता महसूस करते हैं जिसकी वजह से हमारे पैर मौसम की मार को सीधे झेलते है। इस मौसम में तेज गर्म हवाओं, धूल, आंधी की वजह से डिहाइड्रेशन की समस्या पैदा हो जाती है जिससे एड़ियाँ शुष्क होकर फटनी शुरू हो जाती हैं। इस मौसम में पांव लम्बे समय तक खुले वातावरण की मार झेलते हैं जिससे समस्या गम्भीर हो जाती है। मैडिकल के दृष्टिकोण से फटी एड़ियां कोई गम्भीर समस्या नहीं है लेकिन फिर भी अगर फटी एड़ियों की समस्या को शुरू में नजरअंदाज किया जाये तो एड़ियों के घाव गहरे होने शुरू हो जाते हैं और बाद में इनमे खून बहना शुरू हो जाता है जिससे पांवों में गन्दगी और संक्रमण प्रवेश कर जाते हैं तथा पांव की प्रकृतिक सुरक्षा खतम हो जाती है और असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। पांवों की फटी एड़ियाँ मौसम में नमी की कमी, त्वचा के रूखेपन और पांवों पर लगातार चलने के दवाब की वजह से त्वचा प्राकृतिक नमी को बरकरार रखने में कामयाब नहीं रहती जिसकी वजह से त्वचा में दरारें पर जाती हैं जिसे हम फटी एड़ियां कहते हैं।
अगर बचपन में बच्चों को फटी एड़ियों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो यह जेनेटिक समस्या है लेकिन अगर आपको व्यस्क होने पर फटी एड़ियों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो यह मौसम की मार, खानपान, प्रदूषण, पौष्टिक तत्वों की कमी या तनाव की वजह से हो सकता है। लेकिन अगर आप मधुमेह, त्वचा रोग, दाद, खाज, खुजली या जीवन शैली से जुड़ी बिमारियों से ग्रस्त हैं तो फटी एड़ियों की समस्या आपको गंभीर रूप से परेशान कर सकती हैं। मौसम में बदलाव के दौरान भीषण गर्मी में शरीर में नमी की कमी, विटामिन की कमी, डायबटीज, थायराईड, शरीर में मोटापे तथा 60 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों को फटी एड़ियों की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए यदि आपको फटी एड़ियों की समस्या से लगातार जूझना पड़ रहा है तो यह अनुवांशिक या स्वास्थ्य कारणों से भी हो सकता है।
पांव शरीर का आधार माने जाते हैं। पांव पर ही पूरे शरीर का भार होता है तथा पांव ही हमारे शरीर को गतिशील करते हैं। इसीलिए पांव का ख्याल अत्यंत महतवपूर्ण माना जाता है। लेकिन आप कुछ प्रकृतिक उपायों से इन फटी एड़ियों से छुटकारा पा सकती हैं। –

  • अपनी त्वचा में यौवनता तथा ताजगी लाने के लिए अपने पाँव को सप्ताह में एक बार घर में ‘‘फुट ट्रीटमैंट‘‘ जरूर दें। पाँव को गर्म पानी में डुबोने से एड़ियों की त्वचा मुलायम होती है जिससे मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है। प्रतिदिन पाँव तथा एड़ियों की उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए नहाने से पहले अपने पाँव में शुद्ध बादाम तेल की रोजाना मालिश कीजिए! नहाने के बाद जब पाँव गीले हों तो पाँव पर क्रीम का इस्तेमाल कीजिए जिससे पाँव पर नमी बरकरार रखने में मदद मिलेगी। फुट क्रीम से पाँव की सर्कुलर मोशन में हल्के-हल्के मालिश कीजिए तथा इससे आपके पाँव मुलायम बने रहेंगे जिससे फटी एड़ियों की समस्या नहीं आएगी।
  • पाँव की समस्याओं के लिए शहद प्रकृतिक उपचार उपचार माना जाता है। शहद में एंटी बैक्टीरियल तथा एंटी माइक्रोबियल गुण विद्यमान होते हैं जो कि फटी एड़ियों को साफ करके इनका प्राकृतिक उपचार कर सकते हैं। तीन लीटर गुनमुने पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर इसमें 20 मिनट तक पाँव सोख कर रखने से पाँव में कोमलता आती है। आप शहद को ‘‘फुट सक्रब‘‘ या फुट मास्क के तौर पर भी प्रयोग कर सकते हैं।
  • आपकी रसोई में भी फटी एड़ियों का प्रकृतिक ईलाज उपलब्ध है। नींबू को काटकर इसका आधा भाग लेकर इसे चीनी में मिलाएं तथा इसे अपने एड़ियों पर आहिस्ता-आहिस्ता रगड़ें और बाद में एड़ियों को साफ ताजे पानी से धो लीजिए। इस प्रक्रिया को हफ्ते मे दो बार अपनाने से बेहतर सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
  • रात को साने से पहले गर्म पानी में नमक डालकर अपने पैरों को आधा घण्टा तक भीगो कर रखें जिससे आपकी एड़ियों की त्वचा मुलायम हो जाएगी तथा इसके बाद बाथिंग स्पंज से रगड़कर एड़ियों से मृत कोशिकाओं को आहिस्ता-आहिस्ता हटा दीजिए। कभी भी धातू के स्पंज का इस्तेमाल मत कीजिए क्योंकि इससे एड़ियों के घाव गहरे हो सकते हैं। पाँव को धोने के बाद त्वचा पर क्रीम की मालिश कीजिए ताकि त्वचा क्रीम को पूरी तरह सोख ले। नींबू तथा हल्दी के गुणों वाली क्रीम सबसे बेहतर होगी। रात को सोने से पहले फटी एड़ियों को साॅफ्ट काॅटन के कपड़े की पट्टी बांधकर सोने से फटी एड़ियों के घाव भरने में मदद मिलेगी। रात में सोने से पहले पाँव पर ‘‘फुटक्रीम‘‘ लगाकर पाँव को काॅटन के कपड़े की पट्टी बांधकर सोने से घाव को प्रकृतिक तरीके से ठीक होने में मदद मिलती है तथा बिस्तर भी खराब नहीं होता।
  • फटी एड़ियों के लिए नारियल तेल रामबाण की तरह काम करता है। नारियल तेल में विद्यमान एंटी इन्फलेमेन्टरी तथा एंटी माईक्रोबाईल गुण विद्यमान होते हैं। जिससे त्वचा की नमी बरकरार रखने में मदद मिलती है तथा नारियल तेल को सूखी त्वचा के उपचार के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। नारियल तेल त्वचा में नमी बरकरार रखने के इलावा त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में भी मददगार साबित होता है। नारियल तेल को प्रतिदिन उपयोग में लाने से फटी एड़ियों की समस्या से बचा जा सकता है तथा यह पाँव की बाहरी त्वचा के टिशू को मजबूत करता है, रात को सोने से पहले नारियल तेल से त्वचा की मालिश करने से सुबह आपके पाँव कोमल तथा मुलायम बनकर उभरेंगे। यदि आप फटी एड़ियों की समस्या से जूझ रहे हैं तो दिन में दो बार नारियल तेल से अपने पाँव की मालिश कीजिए।
  • फटी एड़ियों के उपचार में जैतून का तेल काफी प्रभावी माना जाता है। हफ्ते में दो बार जैतून के तेल की ट्रीटमैंट, फटी एड़ियों की समस्या का प्रभावी निदान प्रदान करती है। जैतून के गर्म तेल को काॅटन बाॅल से आहिस्ता-आहिस्ता पाँव में गोलाकार तरीके से लगाने से त्वचा तेल को सोख लेगी। उसके बाद पाँव को काॅटन के कपड़े से बांध लीजिए तथा थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से धो डालिए। रात को सोने से पहले प्रतिदिन जैतून के तेल से पाँव की मालिश करने से आपको बेहतरीन परिणाम मिल सकते हैं।
  • तिल का तेल फटी एड़ियों के पोषण तथा नमी प्रदान करने में प्रभावी माना जाता है। तिल के तेल में एंटी फंगल गुण होने के अलावा विटामिन, मिनरल तथा न्यूटरीऐंटस विद्यमान होते हैं। अपने पाँव में आहिस्ता-आहिस्ता तिल के तेल की मालिश कीजिए तथा तेल को आहिस्ता-आहिस्ता प्रकृतिक तौर पर पाँव को सोख लेने दीजिए तथा बाद में आप पाँव को सामान्य पानी में धो सकते हैं। तिल का तेल पाँव की त्वचा में कोमलता तथा नमी बरकरार रखता है तथा फटी एड़ियों का प्रकृतिक उपचार माना जाता है।
  • मौसम के हिसाब से पाँव में जूतों का चयन कीजिए। हवाई चप्पल, सैंडल आदि के उपयोग से परहेज कीजिए तथा बंद जूतों को प्रयोग में लायें। गर्मियों में हमेशा काॅटन के मौजे को प्राथमिकता दें क्योंकि सिंथेटिक्स के मौजे से पाँव की त्वचा रूखी हो सकती है। केमिकल युक्त साबून, शैम्पू के प्रयोग को जरूरत से ज्यादा उपयोग में ना लायें तथा विटामिन ई, कैल्शियम, जिंक, ओमेगा-3 आदि से भरपूर डाईट लें।
  • यह ध्यान रखें की अगर आपकी फटी एड़ियों की समस्या शारीरिक बीमारी या जीवन शैली से जुड़ी है तो आप किसी बिशेषज्ञ की सलाह के बिना कोई भी उपचार कतई न करें। किसी भी एक पोजीशन पर लम्बे समय तक खड़े न रहें तथा अपने पांवों की रोजाना उचित देखभाल करें।

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