कैंसर का करें मिलकर खात्मा

जहां भारत में प्रतिदिन 2000 लोग इस जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं वहीं रोजाना 1500 लोगों की मृत्यु हो जाती है। अतः हृदय रोग के बाद कैंसर भारत के लोगों में होने वाली दूसरी नंबर की आम बीमारी है। इन आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में 3.9 मिलियन लोग कैंसर पीड़ित हैं। हर साल 7 लाख नए कैंसर पेसेंटस की वृद्धि हो जाती है। इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम, डायग्नोसिस और इलाज संबंधी पर्याप्त सुविधा ना होने के कारण हर साल 3.5 लाख लोग अपनी जिंदगी से लड़ाई हार जाते हैं। इस प्रकार यह बीमारी स्किन कैंसर, लंग्स, ब्रेस्ट, रेक्टम, स्टोमक, प्रोस्टेट, लीवर, सर्विक्स, एसफगुस, ब्लेडर, ब्लड और माउथ कैंसर के रूप में बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। डॉ. जे.बी. शर्मा, सीनियर कंसलटेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, एक्शन कैंसर हॉस्पिटल के अनुसार पुरूषों में ओरल कैविटी, लंग्स कैंसर और महिलाएं में सर्विक्स, ब्रेस्ट कैंसर भारत में कैंसर के कारण होने वाली 50 प्रतिशत मृत्यु के लिए जिम्मेवार हैं। कैंसर से लोगों को जागरूक करने के लिए 4 फरवरी का दिन पूरे विश्व में वल्र्ड कैंसर डे के रूप में मनाया जाता है। कैंसर पीड़ित लोगों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से इस बार भी वल्र्ड कैंसर डे की थीम श्वी केन आई केन ही रखी गई है।
ऊपर दिये गए आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2020 तक इस रोग के कारण भारत में कैंसर के 17.3 लाख से अधिक नए मामले देखने को मिल सकते हैं। इस सूची में स्तन कैंसरए फेफड़े और गर्भाशय कैंसर टॉप लिस्ट में शामिल हैं। भारत में कुछ डिफरेंट काॅमन कैंसर हैं।
=ब्रेस्ट कैंसर – ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। सामान्य तौर पर महिलाओं में यह बीमारी 40 वर्ष की आयु के बाद होती है लेकिन पूअर लाइफस्टाइल, हाई स्ट्रेस लेवल, भोजन की अव्यवस्थित रूटीन, पर्याप्त नींद न लेने, मेनार्क की जल्दी शुरूआत, लेट मेनपाज़ और मेटरनल ऐज बढ़ने के कारण यह बीमारी महिलाओं में अब जल्दी ही शुरू होने लगी है। मुंबई, कोलकाटा, चेन्नई और दिल्ली जैसे मेट्रो सिटीज में 25 से 32 प्रतिशत महिलाओं में कैंसर की समस्या के लिए ब्रेस्ट कैंसर जिम्मेवार है।
=सर्वाइकल कैंसर- महिलाओं की कैंसर से मौत के लिए सर्वाइकल कैंसर दूसरा बडा कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो भारत में हर साल 33000 महिलाएं की सर्वाइकल कैंसर के कारण मृत्यु हो जाती है। यह सेक्सुअल एक्टिविटीज के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति में स्थांतरित ह्यूमन पेपीलोमा वायरस के कारण होता है।
=प्रोस्टेट कैंसर – पुरूष में होने वाला आम कैंसर है। भारत में इसकी प्रिवलेंस कम है लेकिन ़पूअर लाइफस्टाइल के कारण भारत में भी पुरूषों में प्रोस्टेट की समस्या बढने लगी है। यह बीमारी पुरूष के प्रोस्टेट ग्लेंड के टिश्यू में पैदा होती है। यह युरीनरी सिस्टम को प्रभावित करती है।
=कोलोन कैंसर – यह डाइजेस्ट सिस्टम को प्रभावित करने वाले सबसे काॅमन कैंसर में से एक है। सामान्य तौर पर यह 50 साल की उम्र के बाद होता है। स्मोकिंग, ओबेसिटी और इन्फलेमेट्री बाॅवेल डिजीज के कारण इस कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है।
=लंग कैंसर – यह सबसे खतरनाक कैंसर माना जाता है। यह पोलुटिड एनवायरनमेंट के बढ़ने, स्मोकिंग, तंबाकू चबाने और दूसरे कैंसर यौगिकों के कारण होता है। विश्व में हर साल 1.6 मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है।
=बोन कैंसर – यह बच्चों में होने वाला सबसे आम कैंसर है। यह बच्चों के आर्मस और पैरों के बोन टिश्यूज मंे होता है। जब मस्क्युलोस्केलेटन अपनी पूरी ग्रोथ में होता है तो उस समय यह जिंदगी के पहले 20 साल के दौरान शरीर पर अटैक कर सकता है।
=ओरल कैंसर – भारत में मिलियन लोग तंबाकू चबाते हैं और स्मोकिंग करते हैं जिससे उन्हें ओरल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। यह भारत के तीन बड़े कैंसर में गिना जाता है। देश में बढ़ रहे कैंसर में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ओरल कैंसर की है। यह टंग और माउथ के बेस में होता है। बाद में धीरे-धीरे चीक, लिप्स, साइनस स्पेस और गले तक पहुच जाता है।
=स्टोमक कैंसर – हेलीकोबेक्टर संक्रमण, चेंजिग लाइफस्टाइल, तंबाकू चबाने और एल्कोहल के इस्तेमाल से स्टोमक कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यह पेट की गेस्िट्रक लाइनिंग में पैदा होता है और आंतों में फैल जाता है।
=इनके अलावा कई और प्रकार है जैसे ब्रेन ट्युमर, पैंक्रियास कैंसर, लिवर कैंसर, थ्रोइड कैंसर, गाल ब्लैडर कैंसर, स्किन कैंसर इत्यादि।
कैंसर के लक्ष्ण :
-लगातार सिरदर्द रहना।
-वजन या भूख का कम होना।
-हडि्डयां शरीर के किसी हिस्से में क्रोनिक दर्द होना।
-लगातार थकावट, जी मिचलाना, उल्टी होना।
-शरीर में लगातार बुखार का बना रहना।
-एब्नाॅर्मल ब्लीडिंग शरीर की किसी ओपनिंग से।
-शरीर के किसी भाग में अल्सर, जो इलाज के बावजूद न ठीक हो।
-शरीर पर कही काला तिल बनना जिसका आकार बढ़ता जा राहा हो ।
-बार बार संक्रमण होना।
हेल्दी डाइट कैंसर का रिस्क फैक्टर कम करने में मददगार
-विभिन्न वेजीटेबल, फ्रूट, सोए, नट‍्स, होल ग्रेन और बीन्स से भरपूर प्लांट बेसड संतुलित डाइट कैंसर से लडने में काफी हद तक मददगार हो सकती है।
-प्लांट बेसड फूड में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
-फलों में एंटीआॅक्सीडेंट जैसे बेटा केरोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और सेलेेनियम होते हैं। ये विटामिन कैंसर से बचाव करते हैं और शरीर में सेल्स को बेहतर ढंग से फंक्शन करने में मदद करते हैं।
-फ्रूट वाली डाइट लंग और स्टोमक कैंसर से बचाव करती है।
-लाइकोपीनसे भरपूर फूड जैसे टमाटर, अमरूद, वाटरमेलन प्रोस्टेट कैंसर के रिस्क फैक्टर को कम करते हैं।
कैंसर का डायग्नोस
बायोप्सी टेस्टर : शरीर के किसी हिस्से में लम्प हो जाता है तो उसमें कैंसर के पनपने की संभावना का पता लगाने के लिए लंप का एक टुकड़ा लिया जाता है और इस दौरान लंप में मौजूद सेल्स और टिश्यूज का लैब में टेस्ट किया जाता है। जिससे कैंसर की पुष्टि हो जाती है।
इमेजिंग टेस्ट : इसके अलावा कैंसर की पुष्टि के लिए लंप का इमेंजिंग टेस्ट भी किया जाता है। इस प्रक्रिया में माइक्रोस्कोप के द्वारा कैंसर का पता लगाया जाता है। जरूरी नहीं है कि सभी लंप कैंसर हों। सच यह है कि सभी टयूमर कैंसर नहीं होते हैं।
कैंसर ट्रीटमेंट
इसके ट्रीटमेंट के कई प्रकार हैं। लेकिन इलाज कैंसर के अनुसार ही किया जाता है।
-सर्जरी
-कीमोथेरेपी
-रेडियोथेरेपी
-इम्यूनोथेरेपीए
-टारगेटिड थेरेपी
-हार्मोन थेरेपी
– स्टेम सेल ट्रांसप्लांट
– प्रिसिशन मेडिसिन

आयुर्वेद के अनुसार जीवा अार्युवेद के डायरेक्टर और आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रताप चौहान आहार व जीवनशैली के बारे बताते हैं।

-कैंसर से लड़ने वाले प्राकृतिक रसायन युक्त आहार लेने से कैंसर से लड़ने में सहायता मिलती है और रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
-आसानी से पचने वाले आहार लें ताकि शरीर में विषैले पदार्थ एकत्रित न हों।
-चीनी का सेवन कम करें।
-धूम्रपान और मद्य से बचें।
-भरपूर मात्रा में फल, सब्जी और साबूत अनाज खाएं।
-उच्च वसा युक्त भोजन खासकर जानवरों से प्राप्त होने वाले भोजन के सेवन से बचें।
-पंचकर्म थेरेपी कैंसर में लाभदायक होता है।

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