सर्वेक्षण : स्तन कैंसर के प्रकोप का मुकाबला करने के लिए सिर्फ 12 फीसदी ने ही लिया है कोई बीमा

नई दिल्ली। भारतीय महिलाओं में तमाम तरह के कैंसर की तुलना में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के मामले सामने आ रहे है, खासतौर पर शहरी महिलाओं में। एगॉन लाइफ इंश्योरेंस की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण का दावा है कि स्तन कैंसर के इलाज की बढ़ती लागत के बारे में कमोबेश सभी अवगत हैं लेकिन बहुत कम ऐसे लोग हैं, जो इस भारी खर्च को इंश्योरेंस कवर में शामिल करने जैसी जागरुकता दिखा रहे हैं।
स्टडी के अनुसार लगभग 58 प्रतिशत उत्तरदाताओं को यह पता था कि स्तन कैंसर के इलाज की लागत 5 लाख रुपए से भी ज्यादा बैठती है, लेकिन केवल 12 फीसदी ने ही ऐसे व्यय को कवर करने के लिए कोई बीमा उत्पाद लिया है। स्तन कैंसर के बारे में जागरुकता का पता लगाने के लिए आधुनिक युग के डिजिटल बीमाकर्ता एगॉन लाइफ इंश्योरेंस ने प्रमुख मेट्रो शहरों में 550 उत्तरदाताओं से संपर्क किया था।
एजीओएन लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिजिटल ऑफिसर मार्टिजन डे जोंग का कहना है, ‘स्तन कैंसर के बारे में व्यापक जागरुकता फैलाना और लोगों को शिक्षित करना बहुत महत्वपूर्ण है। इस बीमारी के बारे में एक व्यापक समझ ही कैंसर के इलाज से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल की लागत से अवगत रहने में मदद करेगी जो कि लगातार बढ़ रही है। जीवन बीमा कंपनी के रूप में, हमारा दायित्व है कि हम स्वस्थ जीवन और वित्तीय कल्याण को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी निभाएं।’
सर्वेक्षण से चैंका देने वाला एक और तथ्य सामने आया है कि 74 फीसदी उत्तरदाता इस तथ्य को लेकर आश्वस्त नहीं है कि पुरुषों में भी स्तन कैंसर हो सकता है। गौरतलब है कि जहां आमतौर पर स्तन कैंसर महिलाओं में अधिक होता है, वहीं लगभग एक फीसदी मामलों में पुरुष भी इसके शिकार पाए गए हैं।
संस्कृति का प्रभाव
अनुसंधान में पाया गया कि स्तन कैंसर के बारे में अपनी समझ कायम करने में भारतीय सांस्कृतिक कारकों का भी एक बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। भारतीय समाज में मानव-शरीर के कई पहलुओं को वर्जित विषय मान लिया गया है, जिनसे स्तन कैंसर पर खुल कर बात करने और गांठों की स्वयं जांच करने जैसी जरूरी जानकारी हासिल करने में संकोच होता है।
महिला उत्तरदाताओं में से करीब 51 फीसदी ने उपरोक्त कथन पर सहमति जताई जबकि 26 फीसदी ने स्वीकार किया कि माहवारी और सेक्सुएलिटी के आसपास रहस्यों का इतना ताना-बाना बुना हुआ है कि ऐसे रोगों के बारे में खुले तौर पर बात करने में शर्म महसूस होती है।
बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं ने कहा कि कई सांस्कृतिक कारकों ने विशेष रूप से महिलाओं को अपने परिवार के साथ कुछ शारीरिक बीमारियों पर चर्चा करने से रोक दिया, जो अंततः आवश्यक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने में देरी का कारण बन सकती है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि 24 फीसदी उत्तरदाताओं ने अपने मित्रों और परिवार के साथ स्तन कैंसर पर कभी चर्चा नहीं की है।
यह स्तन कैंसर को लेकर सतही सोच का ही नमूना है कि लगभग 60 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि हार्मोन संबंधी समस्याएं स्तन कैंसर का प्रमुख कारण हैं, जबकि 48 प्रतिशत कहते हैं कि यह रोग मूलतः वंशानुगत होता है। तथ्य यह है कि किसी व्यक्ति की जीवन शैली स्तन कैंसर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्वास्थ्य संबंधी आदतें
एगॉन लाइफ इंश्योरेंस ने स्तन कैंसर के कारणों को समझने के लिए विभिन्न डॉक्टरों से परामर्श किया। एक प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार, ‘लंबा प्रजनन काल, माहवारी की जल्दी शुरुआत, कच्ची उम्र में जल्दी तरुणाई, देर से रजोनिवृत्ति, कम बच्चे, सीमित स्तनपान, गंभीर तनाव जैसे कई कारण स्तन कैंसर के जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा मोटापे, शराब सेवन और धूम्रपान जैसे जीवन शैली से जुड़े कारक भी स्तन कैंसर को पनपाने में योगदान देते हैं।’
लगभग 53 प्रतिशत उत्तरदाता (महिलाओं और पुरुषों की समान संख्या) अपनी फिटनेस और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने वाली किसी भी गतिविधि में सक्रिय नहीं थे। यह चलन, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली को बढ़ावा और फिटनेस के लिए उपेक्षा को इंगित करता है। वास्तव में, लगभग 52 फीसदी उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने बमुश्किल ही कभी अपनी स्वास्थ्य जांच करवाई है।
श्री डे जोंग ने कहा, ‘खासतौर पर शहरी इलाकों में लोग एक भागमभाग वाला प्रतिस्पर्धी जीवन जी रहे हैं जबकि उन्हें फिटनेस में निवेश करने और खानपान की स्वस्थ आदतें डालने की जरूरत है। एगॉन लाइफ इंश्योरेंस स्वास्थ्य और स्वास्थ्य के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यही, वह मुख्य कारण है कि हमने इतनी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बना कर उनसे यह आंकड़ें हासिल किए ताकि हम ऐसे जोखिमों को उजागर कर सकें और किसी के भी जीवन में वित्तीय जागरुकता के साथ-साथ स्वास्थ्य से संबंधित खुशहाली को भी शामिल करवा सकें।’

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