योग बनाए निरोग : वैज्ञानिक शोध ने भी माना

-अलका सिंह
योगा एक्सपर्ट, नई दिल्ली

योग का महत्व दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, योग करने से बेहतर होती है, मानसिक सेहत तथा योग करने से फेफड़ों की कार्यप्रणाली में सुधार होता है और दवाइयों की जरूरत कम होती है। रोज सुबह या शाम को नियमित सांस लेने वाले योगासन और ध्यान लगाने वाले आसन करें, इससे आपका जीवन रोग मुक्त सकारात्मक और आसान हो जाएगा। यह बात रिसर्च में सामने आई है कि अगर आप नियमित 15 से 20 मिनट तक रोज योग करेंगे, तो आप को अस्थमा से राहत मिलेगी और अटैक भी धीरे-धीरे होकर कम होकर खत्म हो जाएगा। योग में एक शोध के दौरान यह सामने आया कि जिन लोगों को एक बड़ा हार्ट अटैक पड़ा है। यदि वह रोजाना एक घंटा योग करते हैं, तो उनको दोबारा से हार्ट अटैक! की संभावना एकदम से खत्म हो जाती है। शोध में यह भी सामने आया है कि योग करने से ऐसे लोगों का हृदय ठीक गति से काम कर रहा होता है।

विज्ञान ने यह भी माना है योग बनाए निरोग

योगाभ्यास बिना किसी दवा या गोली के स्वयं अपने उपचार से करने की शरीर की क्षमता को जागृत करता है। दुनिया भर में योग की स्वीकार्यता बढ़ने के साथ-साथ वैज्ञानिक योग के गुणों का अध्ययन करने में जुटे हैं, भारतीय वैज्ञानिकों के नए अध्ययन में पता चला है कि योग आधारित जीवन शैली का हमारे जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। योग ने दुनिया को एलनेस से वैलनेस का रास्ता दिखाया है। एम्स में योग से होने वाले फायदों पर रिसर्च हो रहा है, पिछले एक साल से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर शोध चल रहा है, रिसर्च बताता है कि दवा के साथ-साथ योग करने पर बेहतरीन नतीजे नजर आए हैं। जिनको माइग्रेन है माइग्रेन में योगा, स्ट्रोक में भी योगा। देश में माइग्रेन की समस्या बढ़ रही है। न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने माइग्रेन में भी योग मे मिलने वाले फायदों को होते हुए देखा है। योग से खून की गुणवत्ता में भी परिवर्तन आते हैं। स्ट्रोक में भी योग से देखा गया है कि पेशेंट को काफी फायदा होता है योग बीमारियों से बचाव में कारगर है चाहे वह आम आदमी या डॉक्टर ही क्यों ना हो योग का फायदा सबके लिए है। वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि योग करने से आपकी आने वाली पीढ़ी ओजस्वी बनेंगी। अब तक के अनेक प्रयोग और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि ध्यान साधना से भय क्रोध चिंता तनाव अवसाद या मूड खराब रहने जैसी शिकायतें ना केवल घटते हैं, लंबे और नियमित अभ्यास द्वारा उनसे छुटकारा भी पाया जा सकता है। एम्स ने कई शोध करके योग की अहमियत पर मुहर लगा दी है। मोटापा तनाव मधुमेह में, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के इलाज में योग किया जाए, तो यह टॉनिक का काम करता है। इसे ध्यान में रखते हुए एम्स प्रोटोकॉल तैयार करने में लगा है कि किस बीमारी में कौन सा योग कौन सा आसन लाभदायक रहेगा, इसके लिए संस्थान के विभिन्न विभागों में योग से जुड़ी 20 परियोजनाओं पर शोध चल रहा है। योग को लेकर एम्स में होने वाले रिसर्च का इतिहास ,वैसे बेहद पुराना है योगियों के ज्ञान इंद्रियों पर विजय पाने को लेकर पहला शोध 1957 में हुआ था। जो 61-62 में पब्लिश भी हुआ अतिशयोक्ति को दरकिनार करते हुए वैज्ञानिकों ने यह बताया कि योग के जरिए योगी अपनी धड़कनों को रोक तो नहीं सकते लेकिन योगाभ्यास से उस पर एक हद तक काबू जरूर पा सकते हैं।
नियमित योगाभ्यास है सबसे कारगर। बीमारियों के साइड इफेक्ट रहित सुरक्षित दवा के समान है जो हमारी आधुनिक खान-पान, रहन-सहन की देन है जैसे -मधुमेह, कमर दर्द, हाथ पैर में दर्द, मेटाबॉलिज्म मे गड़बड़ी सांस, हदय और रक्त संचार की बीमारियां यहां तक कि मानसिक बीमारियां भी। महिलाओं की परेशानियां जैसे मासिक धर्म कष्ट, गर्भधारण होने ना होने की दिक्कतें या रजोविराम जैसी अवस्थाओं की शारीरिक ही नहीं, मानसिक परेशानियों को कम करने में योगाभ्यास से सहायता मिलती है।
पूर्वी जर्मनी के एक ताजा अध्ययन में देखा गया है कि उन्हें 10 सप्ताह तक हठयोग करने के बाद हृदय की धड़कन और रक्तचाप के बीच तालमेल रखने वाली तथाकथित रिफ्लेक्स प्रणाली में स्पष्ट सुधार आ गया। नार्वे के वैज्ञानिकों ने हाल ही में पाया कि हठयोग बहुत थोड़े ही समय में शरीर की रोग प्रतिरक्षण प्रणाली पर अनुकूल प्रभाव डालने लगता है, नियमित योग ना केवल तनाव घटाता है हड्डियों को भी मजबूत करता है। क्रॉनिक बीमारियों में मरीज के तनाव का स्तर तेजी से बढ़ता है जिससे उनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है ऐसी स्थिति में योग के जरिए उसमें आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है और लीवर और गोल ब्लैडर का मोटापा भी कम करता है योग से डायबिटीज बांझपन, कैंसर ,एड्स गठिया के साथ-साथ अन्य ऑटोइम्यून डिजीज को काबू करने में सफलता मिल रही है।
योगाभ्यास से हृदय के मरीजों को भी लाभ मिलता है। योग हृदय के ऐसे मरीजों के लिए भी बेहद उपयोगी है जिनकी बाईपास सर्जरी संभव नहीं हो सकती। विशेषज्ञों का कहना है कि योगिक क्रिया से रक्त में हानिकारक पदार्थों की बढ़ी मात्रा पर नियंत्रण होता है, जिससे रक्त में शुद्धता आती है और उसका सकारात्मक प्रभाव शरीर के सभी वाइटल ऑर्गन के कामकाज पर पड़ता है। इन्फ्लेमेशन पर कंट्रोल से बीमारियों पर नियंत्रण संभव हो जाता है। बच्चों में शुरू से ही योग की आदत बना दी जाए तो उन्हें बीमारी रहित भविष्य प्रदान किया जा सकता है, इससे बच्चों के तनाव का स्तर कम होता है और सकारात्मक नतीजे देखने को मिलते हैं। प्राणायाम करने वालों की याददाश्त, एकाग्रता में भी बढ़ोतरी देखी गई है, प्राणायाम करने वाले मरीजों की स्ट्रेस लेवल में भी गिरावट देखी गई है, प्राणायाम के नियमित अभ्यास द्वारा।

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