भारत के लिए लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है, लोकतंत्र तो भारत का स्वभाव और इसकी सहज प्रकृति है : प्रधानमंत्री मोदी

शिमला। भारत के प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने आज शिमला, हिमाचल प्रदेश में 82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) का उद्घाटन किया। लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरलाय राज्य सभा के उप सभापति, श्री हरिवंशय हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री जयराम ठाकुरय हिमाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष श्री विपिन सिंह परमार और अन्य विशिष्टजन भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, प्रधान मंत्री ने कहा कि भारत के लिए लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है। लोकतंत्र तो भारत का स्वभाव और इसकी सहज प्रकृति है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘आने वाले वर्षों में हमें देश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है, असाधारण लक्ष्य हासिल करने हैं। ये संकल्प ‘सबके प्रयासश् से ही पूरे होंगे।“ संघीय व्यवस्था में राज्यों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम ‘सबका प्रयास’ की बात करते हैं तो सभी राज्यों की भूमिका उसका बड़ा आधार होती है। प्रधानमंत्री ने भारत की कोविड-19 के खिलाफ सफल लड़ाई का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में देश में ऐसे कई काम हुए हैं, और ये सबके प्रयासों से हुए हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि हमारे विधानमंडलों के सदनों की परंपराएं और व्यवस्थाएं स्वाभाविक रूप से भारतीय होनी चाहिए, प्रधान मंत्री जी ने भारतीयता की भावना और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने वाली नीतियां और कानून तैयार किए जाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा “सदन में हमारा आचार-व्यवहार भारतीय मूल्यों के अनुसार होना चाहिए। यह हम सभी की जिम्मेदारी है”। भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें एकता की इस अखंड धारा को संजोने और उसका संरक्षण करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने प्रस्ताव रखा कि क्या साल में 3-4 दिन सदन में ऐसे रखे जा सकते हैं जिसमें समाज के लिए कुछ विशेष करने वाले जनप्रतिनिधि अपने सामाजिक जीवन के इस पहलू के बारे में देश को बताएं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे समाज के अन्य लोगों को भी काफी कुछ सीखने को मिलेगा।
यह प्रस्ताव करते हुए कि गुणवत्तापूर्ण वाद-विवाद के लिए अलग से समय का निर्धारण किया जाए, प्रधान मंत्री जी ने कहा कि एक ऐसी बहस होनी चाहिए जिसमें मर्यादा और गंभीरता की परंपराओं का पूरी तरह से पालन किया जाए और कोई किसी पर राजनीतिक छींटाकशी न करे। एक तरह से यह सदन का healthy time , healthy day होना चाहिए। प्रधान मंत्री ने श्एक राष्ट्र एक विधायी मंचश् का विचार भी रखा और कहा कि यह ऐसा पोर्टल हो जो न केवल हमारी संसदीय प्रणाली को आवश्यक technological boost दे, बल्कि देश की सभी लोकतांत्रिक इकाइयों को जोड़ने का काम भी करे।’ भारत के लिए अगले 25 वर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, प्रधान मंत्री ने सांसदों से केवल एक मंत्र अर्थात – कर्तव्य, कर्तव्य और कर्तव्य को चरितार्थ करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने कहा कि विधायी संस्थाओं का उद्देश्य प्रगतिशील कानून बनाने की दिशा में जनता और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है ताकि लोगों के जीवन में सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाया जा सके। श्री बिरला ने कहा कि एआईपीओसी में राज्य के तीनों अंगों के बीच आदर्श संतुलन बनाए रखने, विधायी निकायों को अधिक समर्थ और सक्षम बनाने, विधायी निकायों के नियमों और प्रक्रियाओं को बदलने से जुड़े मुद्दों पर लगातार चर्चा होती रही है ताकि ये निकाय लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रभावी मंच बनें और लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके।
विधानमंडलों की बैठकों की घटती संख्या और विधानमंडलों में गुणवत्तापूर्ण चर्चा के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए और आजादी का अमृत महोत्सव का उल्लेख करते हुए, श्री बिरला ने विधायी निकायों से प्रतिबद्धता के साथ एक ऐसा आदर्श दस्तावेज तैयार करने का आग्रह किया ताकि जब देश स्वतंत्रता प्राप्ति का शताब्दी समारोह मनाए, तो उस समय पूरे देश के सभी विधानमंडलों के नियमों और प्रक्रियाओं में एकरूपता हो जो जनता की आशाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप हो।
श्री बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआईपीओसी के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विधानमंडलों के कामकाज की समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यपालिका की बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विधायी निकायों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। इससे लोकतंत्र में लोगों की व्यापक और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी और जनप्रतिनिधियों की भूमिका अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी। श्री बिरला ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एआईपीओसी इन मुद्दों पर विचार-विमर्श करेगा और कुछ ऐसे संकल्प पारित करेगा जिससे विधायी निकायों की गरिमा और प्रतिष्ठा को और बढ़ाया जा सके।
श्री बिरला ने यह जानकारी भी दी कि इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान पीठासीन अधिकारी पिछले सौ वर्ष में लिए गए निर्णयों और उनके कार्यान्वयन के तौर- तरीकों की समीक्षा करेंगे। श्री बिरला ने आशा व्यक्त की कि इस सम्मेलन में लिए गए निर्णय देश में लोकतंत्र को मजबूत और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर राज्य सभा के उपसभापति, श्री हरिवंश ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सदी है। विधानमंडलों को नई वास्तविकताओं का सामना करना चाहिए और आभासी मुद्राओं, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे समकालीन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। उपसभापति जी ने कहा कि यदि इसमें संस्थागत परिवर्तन की आवश्यकता है, तो उन्हें किया जाना चाहिए। सक्रिय विधानमंडलों की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने सांसदों और विधायकों से विधायी निकायों को समकालीन वास्तविकताओं और भावी लक्ष्यों के अनुरूप बनाने के तौर-तरीकों का पता लगाने का आग्रह किया। उन्होंने अनावश्यक कानूनों को निरस्त करने और नए कानूनों की सीमा निर्धारित करने पर भी जोर दिया। सदन में व्यवधान के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए, श्री हरिवंश ने सांसदों से विधानमंडलों के सुचारू कामकाज के लिए सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष, श्री विपिन सिंह परमार ने अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के शताब्दी वर्ष में शिमला में 82वां सम्मेलन आयोजित करने के लिए लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह शिमला की देवभूमि के लिए उल्लेखनीय क्षण होगा। उन्होंने स्मरण दिलाया कि इस सम्मेलन की शुरुआत 1921 में शिमला में हुई थी और उसके बाद कई अवसरों पर यहां महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। श्री परमार ने यह भी बताया कि शिमला में ही हुई इस सम्मेलन के बैठक के दौरान स्वायत्त विधायी सचिवालय और महिलाओं के लिए मतदान अधिकार जैसे महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समय आ गया है कि धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश विधान सभा के केंद्र में राष्ट्रीय ई-विधान और ई-गवर्नेंस अकादमी की स्थापना पर विचार किया जाए।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा में ई-विधान और ई-गवर्नेंस की पहल का उल्लेख करते हुए, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा ने सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं, जिससे लोगों को बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की स्थापना के समय सीमित संसाधन थे, परंतु समय के साथ हिमाचल प्रदेश ने जीवन के सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। मुख्यमंत्री ने एआईपीओसी के शताब्दी वर्ष सम्मेलन के लिए शिमला को चुनने के लिए लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला का आभार व्यक्त किया। यह जानकारी देते हुए कि इस वर्ष हिमाचल प्रदेश की स्थापना के भी 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चैतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। कोविड महामारी से निपटने के लिए राज्य के प्रयासों का उल्लेख करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि राज्य में शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है और 75 प्रतिशत आबादी को टीकाकरण की दूसरी खुराक दी जा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा में विपक्ष के नेता, श्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 1925 में श्री विट्ठलभाई पटेल इस सम्मेलन के अध्यक्ष बने जिसके बाद कई महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए हैं जिनमें भारत की स्वतंत्रता और महिलाओं के मतदान के अधिकार के संकल्प भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभा के उचित कार्य संचालन में पीठासीन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और अब समय आ गया है कि अध्यक्षपीठ की स्थिति को और मजबूत किया जाए और ऐसे प्रयास किए जाएं कि सदन के कीमती समय का प्रभावी ढंग से उपयोग हो। उन्होंने कहा कि समय के साथ पीठासीन अधिकारियों से जुड़ी कई परंपराएं फली-फूली लेकिन यह भी सच है कि ऐसी कई परंपराओं का ह्रास हुआ है। सम्मेलन में ऐसे मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए। श्री अग्निहोत्री ने कहा कि दल-बदल से संबंधित कानून की समीक्षा इस सम्मेलन के समक्ष एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि इस क्षेत्र में न्यायपालिका के हस्तक्षेप की काफी गुंजाइश है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पीठासीन अधिकारियों की शक्तियों के युक्तिकरण पर भी चर्चा की जानी चाहिए ताकि अध्यक्षपीठ की गरिमा को बढ़ाया जा सके।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा के उपाध्यक्ष, श्री हंस राज ने धन्यवाद ज्ञापित दिया।
शिमला, हिमाचल प्रदेश में 82वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) वर्ष 1921 में शिमला में ही शुरू हुए इस सम्मेलन के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा में लोकसभा सचिवालय द्वारा ‘1921 से 2021 तक अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की यात्रा’ पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलनों के सौ साल के इतिहास को दर्शाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *