दुल्हन खरीद की मंडी बना शेखावाटी

रमेश सर्राफ धमोरा
स्वतंत्र पत्रकार
दूसरे राज्यों से युवतियों की खरीद फरोख्त के धंधे और कन्या भू्रण हत्याओं के कारण राजस्थान के शेखावाटी में गड़बड़ाते लिंगानुपात की तरफ देश के लोगों का ध्यान खींचा है। शेखावाटी के झुंझुनू, सीकर व चूरू जिले का शायद ही कोई गांव होगा, जहां महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बंगाल, उड़ीसा, बिहार व उत्तर प्रदेश के कई गरीब इलाकों से एक से दो-तीन लाख रुपए तक में दलालों के जरिए युवतियां खरीद कर लाई गई और यहां कुंआरों को ब्याह दी गई। इन राज्यों के गरीब इलाकों की युवतियों को या तो हसीन सपने दिखाकर या बहला-फुसला कर देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता है। कुछ समय बाद उसे जरूरतमंद परिवारों के घर बहू बनाकर भेज दिया जाता है। इसके लिए लडके वाले के परिवारों से दलाल अच्छी-खासी रकम हासिल करते हैं। कई बार अत्यधिक गरीबी के कारण बहुत से परिवार वाले अपनी युवतियों को इन दलालों के हाथों में बेच देते हैं।
बेटियों के प्रति उदासीनता का नतीजा अब सामने आ रहा है। हरियाणा से सटे इस इलाके में महिला-पुरुष का अनुपात बिगड़ चुका है। लड़कियों की कमी के चलते युवाओं को दुल्हन मिलनी मुश्किल हो गई। इसी मजबूरी के चलते शादी कराने वाले गिरोह तैयार हो गए। देश के अन्य प्रदेश की लड़कियों से शादी कराकर ठग मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। ऐसे गिरोह का पूरा नेटवर्क होता है। गिरोह उन परिवारों को निशाना बनाता है जिनमें उम्रदराज लडके कुंवारे होते हैं। गिरोह के लोग किसी मंदिर या होटल में लडकी दिखाते हैं। लडके पक्ष की सहमति मिलने पर लडकी की दयनीय स्थिति बताते हुए रुपए की मांग करते हैं। मोटी रकम लेकर शादी करा देते हैं। हालांकि कुछ की गृहस्थी चल भी जाती है लेकिन अधिकांश दुल्हनें नकदी व जेवरात समेत भाग निकलती हैं।
शेखावाटी में यह कारोबार करोड़ों रुपए सालाना का है। मोटे अनुमान के मुताबिक अकेले झुंझुनू जिले में ही पांच हजार से ज्यादा ऐसी आयातित बहुएं होंगी। इनमें से कई युवतियों ने तो अपने आपको शेखावाटी के वातावरण में ढालकर अपना घर बसा लिया और बहुत से मामलों में ये घरों से जेवर-रूपये लेकर कुछ दिनों बाद ही फरार हो गईं। इस क्षेत्र में बहुओं को खरीद कर लाने का चलन सालों पुराना है। पहले इस क्षेत्र के लोग गुजरात की कपड़ा मिलों में काम करने जाते थे और अविवाहित युवक वहीं से बहू खरीद लाते थे। क्षेत्र में खरीदकर लाई गई बहुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका फायदा उठाते हुए शादी करवाने वाले दलालों की संख्या भी क्षेत्र में बढ़ गई है। ये दलाल हरियाणा के सीमावर्ती गांवों में काफी सक्रिय है।
झुंझुनू जिले में ज्यो-ज्यों शिक्षा का ग्राफ बढ़ रहा है, ठीक उसी रफ्तार से बेटियों की संख्या कम होती जा रही है। बेटियों की घटती संख्या का ही नतीजा है कि यहां के लाडलों के लिए दुल्हन मिलना मुश्किल हो गया है। दुल्हन नहीं मिलने के कारण युवकों के परिजन रूपए देकर दलालों के माध्यम से दूसरे राज्यों से दुल्हन खरीदकर ला रहे हैं। दुल्हन लाने वाले दलालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।
झुंझुनू जिला महिला शिक्षा में अव्वल हैं, इसलिए कम पढ़े लिखे तथा बिना नौकरी वाले लडकों को लड़कियां नहीं मिलती है। गड़बडाते लिंगानुपात, लड़कियों का लडकों की बजाए ज्यादा पढ़ी लिखी होना और सरकारी नौकरी में होनेे के कारण झुंझुनू के लडकों को दुल्हन मिलना मुश्किल हो गया है। यह वजह है कि महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, बंगाल आदि इलकों से दुल्हनें खरीदकर लाई जा रही है। कुछ परिवार इन बाहर से लाई गई लड़कियों से धोखाधड़ी के शिकार भी हुए हैं। ऐसा तब ही होता है, जब लडकी को किसी दलाल के माध्यम से लाया गया हो। यहां पर कई दलाल सक्रिय है, जो रुपए लेकर बाहर की लड़कियों की शादी करवाते हैं। ऐसी दुल्हनें घर से सामान समेट कर फरार हो जाती है। जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें ऐसी लड़कियों की पहले भी कई शादियां हो चुकी होती है।
रुपए लेकर लडकों की शादी करवाने वाले दलाल गांवों में लडकों की तलाश करते हैं। लडके वालों को कई झांसे दिए जाते हैं। लडकी की जो कीमत लगती है उसमें दलालों का भी कमीशन होता हैं। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में रुपए लेकर लडकों की शादी करवाने वाले कई बड़े गिरोह सक्रिय हैं।
शेखावाटी क्षेत्र के झुंझुनू, सीकर तथा चूरू जिलो के करीबन तीन सौ से अधिक गांवों में ऐसे कई मामले हैं। जिनमें खरीदकर लाई गई लड़कियां बहू बनकर रह रही है। दिल्ली और हरियाणा से सटी राजस्थान के क्षेत्रों में महिलाओं की तस्करी होती है, इस क्षेत्र में महिलाओं की खरीद-फरोख्त के काम में कुछ गिरोह सक्रिय हंै। क्षेत्र में तो कई बंगलादेशी लड़कियां भी हिन्दु नामों से यहां के लडकों से शादी कर रह रहीं हैं। मगर स्थानीय पुलिस के पास इस बात का कोई रिकार्ड नहीं हैं कि जिले में अन्य प्रान्तों से कितनी लड़कियां दुल्हन बनकर गांवों में लायी गयी हैं। उनमें से कोई विदेशी तो नहीं हैं। क्षेत्र में इस धन्धे में सैकड़ो गिरोह सक्रिय है। गिरोह संचालकों द्वारा एक से लेकर पांच लाख रूपये तक में सौदा किया जाता है जिसमें से पच्चीस से तीस प्रतिशत राशि दलाल लेता है शेष राशि दुल्हन के घर वालों को दी जाती हैं। बाहरी लड़कियों से शादी होने के कारण क्षेत्र में अपराध में भी तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में परिणाम भयावह हो सकते हैं। जिसका खामियाजा अन्ततरू समाज को ही उठाना पड़ेगा।

 

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