नारी जीवन में शिक्षा का महत्व

नारी इस समाज का अहम हिस्सा हैं। इस समाज के निर्माण में नारी का विशेष स्थान रहा हैं । प्राचीन समय में नारी को पूजा जाता था उन्हें देवी का दर्जा दिया जाता था। उसे पुरूषों के सामान ही माना गया हैं । हर काम में नारी पुरूषों के सामान ही भागीदार रही हैं, फिर भी आज के दौर में महिला की दशा दयनीय बनी हुई हैं। यह पुरूष प्रधान देश, देश की बेटी को दबाता हैं। नारी तो सिर्फ आदर का एक नाम ही रह गयी हैं ,पुरूषों ने नारी को दासी बनाकर रखा हैं यहां तक की उसे शिक्षा के अधिकार से भी वंचित कर दिया । जिसके कारण एक स्त्री का वजूद खोने लगा हैं। औरत को चार दीवारी के अंदर रहने के लिए मज़बूर कर दिया । इस जीवन रूपी रथ के नारी और पुरूष दो पहियों की तरह हैं। अगर एक पहिया भी कमज़ोर होता हैं तो यह जीवन रूपी रथ वहीं खड़ा रह जाएगा, इसलिए महिला का शिक्षित होना ज़रूरी हैं ताकि गाड़ी सही तरीक़े से चलती रहें। अगर नारी पढ़ी लिखी होगी तो वो समाज के कार्यो में योगदान दे सकती हैं । परन्तु बदलते वक़्त ने सब कुछ बदल दिया स्त्री को शिक्षा के अधिकार से वंचित होना पड़ा । स्त्री पढ़ेगी तो वो अपने पति के काम में अपना योगदान दे सकेगी, परिवार को सुचारू रूप से चला पाएगी। उसे दूसरों पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा और अपने कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति भी सजग रहेगी । एक नारी अपने जीवन में 3 अहम भूमिका निभाती हैं । एक अच्छी बेटी, एक अच्छी पत्नी और एक अच्छी माँ और यह तीनों हिस्सें उसकी जीवन में अलग -अलग भूमिका निभाते हैं । और एक बेटी, पत्नी और एक मां उनके लिए कुछ करें इन सब की उम्मीद रखतें हैं । पर इन सब बातों के लिए ज़रूरी है एक नारी का शिक्षित होना कई बार पुरूष रात को क्लब जाते हैं नाईट पार्टी में जाते हैं समय बर्बाद करते हैं। अगर उनकी पत्नी शिक्षित होगी तो वो ऐसा नही करेंगे ब्लकि सारा समय अपनी वाइफ को देंगे और उनसे सब बातें शेयर भी करेंगे अगर स्त्री पर होने वाले अत्याचारों को रोकना हैं तो उसे शिक्षित करना पड़ेगा । जहां एक और आज नारी का एक वर्ग शिक्षा ग्रहण कर देश की बुंलदियों को छु रहा हैं, वहीं दूसरा वर्ग शिक्षा से कोसों दूर बैठा हैं । हर वर्ष हम महिला दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाते हैं लेकिन सच में हमारे देश में नारी को वो उच्च स्थान मिला हैं जो उसे मिलना चाहिए । देश का नारी वर्ग तभी खुश हो सकता हैं जब नारी का एक अशिक्षित भाग भी शिक्षित होगा और सही मायनों में उसी दिन ही महिला दिवस होगा, जिस दिन देश की हर नारी शिक्षित होगी । घर के चूल्हे चौकें से निकल कर अपनी एक अलग पहचान बनाएगी | पुरूष औरत को शिक्षा से वंचित रखकर उसे उसके अधिकारों और अपने अस्तित्व से वंचित रखना चाहता हैं, की कहीं औरत उसके बराबर न पहुंच जाएं । वह नारी को घर और घर के कामकाज तक ही रखना चाहता है जो की गलत हैं । प्राचीन समय से ही लोगों की यह धारणा हैं की नारी पढ़ कर क्या करेंगी नौकरी तो करनी नहीं हैं। न कोई नेता बनना हैं इसलिए गृहस्थी के काम में ही अपना ध्यान लगाएं । समाज की यही धारणा आज भी प्रचलित हैं, जिसके कारण आज भी लोग अपनी बेटियों को स्कूल भेजने की बजाए गृहस्थी के कामों को करवा रहें हैं। राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती , महात्मा गांधी जैसे अनेक समाज सुधारकों ने नारी को उचित स्थान दिलाने के लिए भरसक प्रयास किए ,लेकिन आज भी जीवन के हर क्षेत्र में उनके साथ भेदभाव के किया जा रहा हैं । किसी न किसी रूप में नारी का शैक्षणिक स्तर पर शोषण किया जा रहा है। महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार और छेड़छाड़, घरों, सड़कों, कार्यालयों सभी स्थानों पर देखी जा सकती है। बलात्कार, दहेज उत्पीड़न, हत्या आदि के मामले हर रोज अखबारों में छपते रहते हैं । बाल-विवाह की न जाने कितनी बच्चियां शिकार होती हैं । शैक्षणिक शोषण के अन्तर्गत बेटियों को स्कूल भेजने की जगह उनसे घर के काम करवाना, बेटी को पराया धन मानना, बेटे और बेटी में अंतर करके बेटी को शिक्षा से वंचित कर देना इन सब मानसिकताओं के कारण नारी का शोषण होता आया हैं । लेकिन सच तो यह है कि एक शिक्षित नारी ही अपने परिवार की अशिक्षित नारियों को पढ़ाकर अपने ज्ञान व विकसित क्षमता का लाभ पूरे परिवार को दे सकती हैं ।1
शिक्षा के कारण ही नारी सशक्त और आत्मनिर्भर बनकर अपने व्यक्तित्व का उचित रूप से विकास कर सकती है, परन्तु आज नारी क्षेत्र की मुख्य बाधाएँ हैं-महिलाओं का अशिक्षित होना, अधिकारों के प्रति उदासहीनता ,सामाजिक कुरीतियां तथा पुरुषों का महिलाओं पर स्वामित्व इन सभी समस्याओं से छुटकारा एक नारी पाना चाहती हैं तो उसका एकमात्र साधन हैं शिक्षा । वर्तमान समय में यह महसूस किया जा रहा है कि नारी शिक्षा को शिक्षा दिलवाने में ठोस कदम उठाने होंगे तभी समान विकास हो पायेगा । इसलिए नारी-शिक्षा की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहें हैं । आज भारत में लड़कियों के लिए अनेक विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय खोलें जा रहें हैं ताकि नारी भी शिक्षा ग्रहण कर सकें । महिलाओं को शिक्षित बनाने का वास्तविक अर्थ हैं उसे प्रगतिशील और सभ्य बनाना, ताकि उसमें तर्क–शक्ति का विकास हो सके। यदि नारी शिक्षित होगी तो वह अपने परिवार को ज्यादा अच्छी तरह से चला सकेगी। एक अशिक्षित नारी न तो स्वयं का विकास कर सकती है और न ही परिवार के विकास में सहयोग दे सकती हैं । इसलिए आज समाज नारी की शिक्षा पर ध्यान दें रहा हैं और उसे शिक्षित कर रहा हैं, ताकि देश उन्नति के पथ पर आगे बड़े ।

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