एल.ई.डी. बल्ब मैन्युफैक्चरिंग में कैरियर की है अपार संभावनाएं

-नरेन्द्र कुमार महापात्रा
(सीईओ, इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल)
आज जमाना बदल गया है और लोग बिजली के इस्तेमाल को लेकर सतर्क हुए हैं। लंबे समय तक बिजली का उपयोग बना रहे, इसके लिए कम खपत और अधिक प्रकाष के बल्बों का चलन प्रारंभ हो गया है और बाजारों में इनकी बहुतायत है। एलईडी का अर्थ लाइट एमिटिंग डायोड है। दूधिया रोशनी वाले इस बल्ब के उपयोग के कई फायदे है। अन्य बल्बों की तुलना में इसकी रोशनी तो बेहतर होती ही है, अन्य मामलों में भी यह उनसे कई गुना बेहतर है। इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल के सीईओ नरेन्द्र कुमार महापत्रा ने बताया कि सामान्य बल्ब या सीएफएल की तरह बार आर आन आफ करने पर फ्यूज नहीं होता। सबसे बडा फायदा तो यह है कि बिजली की कम खपत करता है यानी एल.ई.डी. के एक इस्तेमाल से बिजली का बिल कम आता है। इसे यू समझें कि 100 वाॅट का एक बल्ब जलाने पर जितनी बिजली खर्च होती है, उतने में 10 एल.ई.डी. बल्ब वारंटी के साथ आते हैं। इन्हीं खूबियों के कारण शहर से लेकर गांव तक बड़ी संख्या में लोग आज इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

लागत एवं तैयारियां :- एलईडी लाइट्स बनाने के कारोबार में कुल कितनी पूँजी चाहिए, यह आपकी निवेष क्षमता और प्रोड्क्षन पर निर्भर करता है, क्योंकि जितनी वैरायटी के आप प्रोडक्ट बनाएंगी, उतनी पूंजी लगेगी। उतनी तरह की इसमें मशीनें लगेगी। कुल मिलाकर एल.ई.डी. लाइट्स का यह कारोबार 5 से लेकर 50 लाख रुपये तक में कर सकते हैं इसलिए यह कारोबार शुरु करने से पहले आपको अपनी पंूंजी के अनुसार निर्णय लेना होगा कि आप कौन-कौन सी एलईडी लाइट बनाना चाहते हैं। यदि एलईडी बल्ब, फ्लड लाइट, पैनल लाईट, फोकस लाइट जैसी सभी लाइट्स बनाने का कारोबार करना चाह रहे हैं तो फिर इसके लिए अधिक पूंजी चाहिए, क्योंकि इस प्रोडक्ट के लिए अलग मशीनें इस्तेमाल होती है। ऐसे में जितनी तरह की एलईडी लाइट्स आप बनाएंगे, उतनी तरह की मशीनें आपको खरीदनी होगी। ये मशीनें आटोमैटिक और मैन्युअल दोनों तरह की आ रही है। कीमत के हिसाब से उनकी क्षमताएं भी अलग अलग है, जैसे कुछ मशीनें बार में 10 लाइटें तैयार करती है, तो कुछ 100 और कुछ 1000 हजार लाइट्स लेकिन अगर आप सिर्फ एल.ई.डी. बल्ब ही बनाने का यूनिट लगना चाहते हैं तो फिर इसके लिए सिर्फ 5 से 10 लाख रुपये की पंूजी चाहिए। साथ में करीब 6 से 8 लोगों की श्रम शाक्ति चाहिए, लेकिन ये सभी लोग ट्रेंड होने चाहिए। ट्रेंड का मतलब इन्हें एलईडी लाइट्स की मैन्युफैक्चरिंग की पेशेवर जानकारी हो। खासतौर से सुपरवाइजर लैबल के लोग का ट्रेंड होना बेहद जरुरी है।

गुणवता एवं आमदनी :- इस कारोबार में नई सोच वाले उत्साही लोगों के लिए बहुत स्कोप है। अभी ज्यादातर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां डिजाइन या पैटर्न काॅपी कर रही है। अगर किसी एक कंपनी ने कोई खास प्रोडक्ट तैयार किया, जो सभी अगले चार पांच साल तक उसी की नकल करते रहते हैं। ऐसे में अगर मार्केट में बढ़त हासिल करनी है तो अलग तरह के प्रोड्क्ट बनाएं। इस तरह जब तक अन्य कंपनियां आपकी नकल करेगी, तब तक आपको मार्केट में शुरुआती फायदा मिल जाएगा। ऐसा करके ही अपनी पहचान बना सकते हैं।
इसके अलावा टिकाउ प्रोडक्ट बनाएं और दाम ठीक रखें। अन्य प्रतिस्पर्धा प्रोडक्ट का भी तुलनात्मक अध्ययन करके देंखे कि अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट की कीमत क्या है, उनका आउटपुट क्या है इत्यादि।

तैयार प्रोडक्ट को मार्केट मंे बेचने के दो तरीके हैं :- एक तो यह है कि आप सीधे थोक और रिटेल दुकानों पर बेचना शुरु कर सकते हैं। दूसरा तरीको हे कि आप अपनी लाइट्स सिर्फ सरकारी विभागों को ही बेंचे। आप बाजार में स्थापित विभिन्न तरह के एलईडी ब्रांड्स की डीलरशिप लेकर भी अपनी मासिक आमदनी में इजाफा कर सकते हैं।

स्थान चयन एवं सावधानियां :- एलईडी लाइट्स चूंकि हर जगह इस्तेमाल हो रही है और उर्जा की बचत के लिए इसे प्रोत्साहन भी मिला रहा है, इसलिए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट जहां चाहें, वहां लगा सकते हैं। सिर्फ यह ध्यान रखें कि जहां भी यह यूनिट लगाएं वहां बिजली की 24 घंटे सुविधा हो। वैसे बडे शहरों में इस तरह के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। ऐसा इसलिए कि गांव कस्बों में प्लांट लगाने पर ट्रांसपोर्टेंशन खर्च बहुत ज्यादा आएगा। राॅ-मैटीरियल में भी दिक्कत आ सकती है, क्योंकि बहुत अधिक राॅ-मैटीरियल स्टाॅक करके रखा नहीं जाता है। ऐसे में अगर अचानक किसी खास चीज की आवश्यकता पढ़ गई तो छोटे शहरों में नहीं मिलेगा।

प्रशिक्षण :- जो लोग फै्रशर है या जिन्हें मैन्युफैक्चरिंग कारोबार की जानकारी नहीं है, उन्हें पहले तो इसका मूल अनुभव प्राप्त करना चाहिए। बहरहाल, अभी मार्केट में इसके लिए ट्रेनिंग की कोई खास व्यवस्था नहीं है। फैक्ट्रियां मंे जहां इस तरह के प्रोडक्ट बनते हैं, वहीं पर जाॅब करके या कुछ दिन ट्रेनिंग लेकर यह काम सीखा जा सकता है। आमतौर पर 1 से 2 महीनें में यह काम अच्छे से सीखा जा सकता है। अनुभव न होने पर तरीका है कि मैन्युफक्चरिंग यूनिट शुरु करते समय अपने साथ किसी अनुभवी व्यक्ति को रखें, जिससे आपको इस फील्ड की जानकारी मिल सके। इस तरह आगे चलकर आप भी कारोबार करना सीख जाएंगे।

रजिस्ट्रेशन :- एलईडी लाइट्स बनाने की फैक्टरी लगाने के लिए सबसे पहले तो बी.आई.एस. लाइसैंस लेना होता है। यह एक तरह से आईएसआई मानक जैसा ही लाइसेंस है। इसके अलावा कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा।

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