पारस हॉस्पिटल गुरूग्राम ने हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि

गुरूग्राम। पारस हॉस्पिटल जिसे टीएवीआर सहित कई आधुनिक कार्डियक प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए जाना जाता है, अब कोविड के इस दौर में ब्रेडीकार्डिया के मरीज में दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर लगाने वाला पहला अस्पताल बन गया है। ब्रेडीकार्डिया ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल बहुत धीमी गति से धड़कता है। हाल ही में गुरूग्राम से 83 वर्षीय एक व्यक्ति में यह पेसमेकर लगाया गया। डा अमित भूषण शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर एवं हैड ऑफ युनिट कार्डियोलोजी ने बताया कि ‘‘हालांकि हम अब तक 20 माइक्रा पेसमेकर लगा चुके हैं, लेकिन यह अपनी तरह का अनूठा तरीका है। 83 वर्षीय इस व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और कोरोना महामारी के चलते परिवार बार-बार अस्पताल नहीं आना चाहता था। मरीज के घर पर एक एक्सटर्नल लूप रिकॉर्डर डिलीवर किया गया, इसे 5 दिनों के लिए मरीज के कपड़ों के नीचे बेल्ट की तरह बांध दिया गया। यह रिकॉर्डर हर मिनट मरीज की ईसीजी रिकॉर्ड कर रहा था और ईसीजी में होने वाली किसी भी असामान्यता को डॉक्टर अपने मोबाइल फोन पर देख सकता है। दो दिनों के ईएलआर में, कई बार ईसीजी असामान्य हुई। हमने उसी समय फोन करके मरीज की स्थिति के बारे में पूछा, उन्हें चक्कर आ रहे थे। उन्हें तुरंत अस्पताल बुलाया गया और मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही एमरजेन्सी कार्डियक टीम तैयार थी। ईआर में की गई ईसीजी में मरीज की हार्ट रेट 23 प्रति मिनट आई, उसे अस्थायी पेसमेकर लगाया गया। पारम्परिक प्रक्रिया के बजाए लीडलैड मिनिएचराइज्ड पेसमेकर- माइक्रा को टांग की वेन्स के जरिए लगाया गया। इस प्रक्रिया के बाद मरीज को फॉलोअप के लिए अस्पताल आने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उसे मोबाइल के साइज की टेलीमेट्री डिवाइस दी गई, जिसे उसकी छाती से छूते ही सारा डेटा सेंट्रल लैब पर और फिर डॉक्टर के फोन पर पहुंच जाता है। लीडलैस पेसमेकर मात्र 2 ग्राम वजन का है।
‘‘अब हमारे पास ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए मरीज के अस्पताल आए बिना ही उसका निदान किया जा सकता है और बिना चीरा लगाए पेसमेकर लगाया जा सकता है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे टांग की वेन्स से स्टेंट लगाया जाता है। कोविड-19 के इस दौर में अन्य बीमारियों के मरीजों को घर पर ही रहने की सलाह दी जा रही है, ऐसे में यह आधुनिक तकनीक दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। एक बार पेसमेकर लगने के बाद मरीज को फॉलोअप के लिए अस्पताल नहीं आना पड़ेगा। यह इनोवेशन एमआरआई कम्पेटिबल है। पारम्परिक पेसमेकर की तरह इसमें तारें नहीं होतीं, इसलिए तारों के कारण इन्फेक्शन की संभावना कम हो जाती है।’’ डा अमित भूषण शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर एवं युनिट हैड कार्डियोलॉजी ने कहा, जो पारस हॉस्पिटल गुरूग्राम में दिल की बीमारियों के आधुनिक उपचार में अग्रणी हैं।
नए पेसमेकर को माइक्रा ट्रांसकैथेटर पेसिंग सिस्टम कहा जाता है, जो कई कारणों से अनूठा है। डिवाइस ऑटोमेटिक तरीके से मरीज की गतिविधि के स्तर के आधार पर पेसिंग थेरेपी को समायोजित कर लेती है। एमआरआई के अलावाएयरपोर्ट पर मरीज टीएसए स्क्रीनिंग भी की जा सकती है। ब्रेडीकार्डिया के मामले में पेसमेकर के इलेक्ट्रिक इम्पल्स या पेसिंग थेरेपी दिल की रिदम को सामान्य बनाने में मदद करती है।
‘‘मुझे खुशी है कि पेसमेकर लगाने के लिए मुझे किसी तरह का चीरा नहीं लगाया गया, कोविड महामारी के चलते नए तरीके से मेरा इलाज किया गया है। जब डॉक्टर ने हमें कैप्स्यूल के आकार के इस पेसमेकर के बारे में बताया, हम इसके बारे में नहीं समझ पाए। लेकिन अब मैं और मेरा परिवार बहुत खुश है। हाल ही मेरी ईसीजी रिपोर्ट के मुताबिक मेरे हार्ट में ब्लॉकेज था और हार्ट रेट सिर्फ 23 प्रति मिनट थी।’’ मरीज ने बताया।
माइक्रा ट्रांसकैथेटर पेसिंग सिस्टम, जिसे ग्रोइन में कीहोल पंक्चर के जरिए दिल में लगाया जाता है, इसे 2016 में यूएस फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा मान्यता दी गई है।

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