खराब ओरल हाईजीन 40 तरह की बीमारियां कर सकती है

आपका मुंह आपकी सेहत बनाए रखने में सहयोग करता है, क्योंकि मुंह में 600 से अधिक तरह के बैक्टीरिया होते हैं, जो खून के द्वारा विभिन्न अंगों में पहुंचकर समस्याएं पैदा करते हैं। अध्ययनों ने साबित कर दिया कि खराब ओरल हाईजीन के कारण 40 से अधिक प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। भारत के अग्रणी डेंटल एक्सपर्ट ले. जनरल विमल अरोड़ा, चीफ क्लिनिकल आॅफिसर, क्लोव डेंटल ने वल्र्ड ओरल हेल्थ दिवस के अवसर पर अद्वितीय अवेयरनेस ओरल केयर ड्राईव – ‘‘हंस दो’’ का अनावरण करते हुए यह बात कही।
हंस दो (HANS DO) का तात्पर्य हाईजीन अवेयरनेस एण्ड नीड सेंसिटाईजेषन आॅन डेंटल एण्ड ओरल केयर (Hygiene Awareness & Need Sensitization on Dental & Oral care) है। इस कार्यक्रम का उद्देष्य लोगों को ओरल एवं डेंटल केयर की जरूरत के बारे में जागरुक बनाकर उन्हें सेहतमंद कार्य अपनाने के लिए प्रेरित करना था। क्लिनिक की विषेश मोबाईल वैन में क्लोव डेंटल के डाॅक्टरों ने महीपालपुर के रंगपुर पहरी में इस कार्यक्रम के पहले एडिषन में 500 से अधिक लोगों की ओरल एवं डेंटल स्क्रीनिंग की। यहां काम करने वाली एक एनजीओ, बाल विकास धारा इस अवेयरनेस कार्यक्रम में क्लोव डेंटल की पार्टनर के रूप में षामिल हुई। बाल विकास धारा के देबेंद्र कुमार बरल ने कहा, ‘‘हम स्वास्थ्य की सामान्य समस्याओं पर काफी काम करते हैं, लेकिन यह अभियान अद्वितीय है और हमें इसमें क्लोव डेंटल के साथ साझेदारी करने की खुषी है।’’
इंडियन नेषनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम का उल्लेख करने वाली नेचर रिपोर्ट ने बताया कि महिलाओं व पुरुशों में अपर एयरो-डाईजेस्टिव ट्रैक्ट (मुंह, जीभ, ओरो-फैरिंक्स, हाईपोफैरिंक्स, लैरिंक्स एवं ओसोफेगस) के कैंसर में चिंताजनक वृद्धि हुई है। ये स्थान जोखिमयुक्त स्थलों के षोध तथा समय पर जांच के कार्यक्रम क्रियान्वित करने के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। 2009-10 में आयोजित ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया में सामने आया कि 35 प्रतिषत व्यस्क तम्बाकू का इस्तेमाल करते हैं। तम्बाकू से संबंधित कैंसर 2020 तक कैंसर के कुल 30 प्रतिषत मामलों का कारण बनेगा। विष्व में लिप और ओरल कैविटी के कैंसर के 30 प्रतिषत मामले भारतीय उपमहाद्वीप में होते हैं। मुंह और जीभ के कैंसर मिलकर फेफड़ों के कैंसर से भी ज्यादा होते हैं।
क्लोव डेंटल के सीईओ, अमर सिंह ने कहा, ‘‘मीडिया के कारण कैंसर की रोकथाम, देखभाल एवं इलाज की जागरुकता षहरी इलाकों में कई गुना बढ़ गई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों तथा षहरी झुग्गियों में यह काफी कम है। हंस दो का डिजाईन इस कमी को दूर करने के लिए किया गया है। इसका उद्देष्य लोगों को ओरल एवं डेंटल हाईजीन पर जागरुक बनाकर यह बताना है कि इसकी कमी से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां किस प्रकार हो सकती हैं। इस प्रोग्राम के माॅड्यूल में दिल्ली की कई झुग्गियों में अवेयरनेस मीट और डेंटल चेकअप कैंप का आयोजन षामिल है।
डाॅ. मेहरा ने कहा, ‘‘आपके मुंह की सेहत से आपका स्वास्थ्य जुड़ा है। दांतों की देखभाल केवल खूबसूरत मुस्कुराहट और ताजा सांस तक सीमित नहीं। आपके दांतों की स्थिति आपकी सेहत को प्रभावित करती है क्योंकि मसूढ़ों की बीमारी षरीर में स्वास्थ्य की अन्य समस्याओं से जुड़ी है। नियमित चेक-अप आपके डेंटिस्ट को यह समझने में मदद करता है कि आपको दांतों की कोई समस्या है या नहीं। इससे आपके मुंह को सेहतमंद रखने में मदद मिलती है। समस्याओं का इलाज न कराने से भविश्य में वो और ज्यादा गंभीर हो सकती हैं, इसलिए यह जरूरी है कि आप समय पर समस्याओं का पता लगाकर उनका इलाज करा लें।’’
क्लोव डेंटल ने अपनी समर्पित सेवाएं क्लोव डेंटल हेरिटेज के माध्यम से कमजोर वर्ग के समुदायों तक पहुंचाई हैं। यह क्लोव रिसर्च, ट्रेनिंग एवं सामुदायिक सेवाओं को एक ही छत के नीचे समायोजित करता है। क्लोव डेंटल हेरिटेज का उद्घाटन भारत के राश्ट्रपति, स्वर्गीय डाॅ. श्री एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। इस केंद्र के पास दो डेंटल चेयर हैं तथा यह गरीब समुदाय, खासकर स्थानीय फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को डेंटल सेवाएं प्रदान करता है। जनवरी, 2014 से क्लोव ने गरीब व्यस्कों व बच्चों के लिए कई डेंटल कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ये कार्यक्रम गुड़गांव में मदर टेरेसा अनाथालय, द हैप्पी स्कूल एवं यूनाईटेड नेषंस
इंटरनेषनल एसोसिएषन किंडरगार्टन में आयोजित किए गए।

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