फंगल संक्रमण देश के स्वास्थ्य सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती : आई.ए.डी.वी.एल

नई दिल्ली। त्वचा को बेहतर बनाए रखने हेतु रख-रखाव एवं संबन्धित मुद्दों पर दिल्लीवासियों में जागरूकरता फैलाने के उद्देश्य से एसोसिएशन ऑफ डर्माटोलॉजीस्ट्स, वेनेरियोलोजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (आई.ए.डी.वी.एल) ने नई दिल्ली में ‘वर्ल्ड स्किन हेल्थ डे’ मनाया। आई.ए.डी.वी.एल. त्वचा विशेषज्ञों का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा संगठन एवं भारत में त्वचा विशेषज्ञों का सबसे बड़ा आधिकारिक संगठन है। कार्यक्रम के दौरान त्वचा की स्वच्छता एवं देखभाल के संबंध में स्टेरॉयड क्रीम के दुरुपयोग, फंगल संक्रमण महामारी और त्वचा मामले से संबंधित झोलाछाप चिकित्सा से नुकसान एवं रोकथाम विषयों पर बात की गयी। भारत में स्टेरॉयड क्रीम के दुरुपयोग के मामले केवल ग्रामीण इलाकों मे ही नहीं, बल्कि शहर के पढे लिखे आबादी में भी देखने को मिलते है। स्टेरॉयड क्रीम और स्टेरॉयड संयोजित क्रीम का दुरुपयोग अभी तक अनियंत्रित रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय (डी.सी.जी.आई.) की तरफ से अभी तक पर्याप्त उपाय नहीं किया जा सका है। यह बेहद डरावना है कि कई दवा कंपनियों ने अपने नए एंटिफंगल फार्मूले जैसे फ्लुकोनाजोल पाउडर, इटराक्नाजोल पाउडर, क्रीम और एम्फोटेरिसिन बी जेल, इत्यादि को लाने के लिए अनुमति प्राप्त कर लिया है। आईएडीवीएल टास्क फोर्स के सदस्यों ने टोपिकल स्टेरॉयड एब्यूज (ई.टी.ए.टी.एस.ए) के खिलाफ कई बार भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (डी.सी.जी.आई) से संपर्क कर खतरनाक स्थिति के बारे में अवगत करवाया है। डी.सी.जी.आई की निष्क्रियता पर एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसकी दूसरी सुनवाई 12 अप्रैल 2018 को होगी।
टीसीएस और टीसीएस युक्त एंटिफंगल से जुड़े संयोजनों की आसान उपलब्धता को कड़ाई से नियंत्रित किया जाना चाहिए। स्टेरॉयड और उनके संयोजन को ष्चिकित्सक से परामर्श नुस्खेष् या “अनुसूची एचष् दवाओं के रूप में ही बेचा जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने संदिग्ध उपयोग के लिए उन्हें “अनुसूची एच” सूची से बाहर रखा है, जैसा की जनहित याचिका में बताया गया है।
सरकार को ज्यादातर दवा कंपनियों से प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन नियमों को डिफाल्टर्स के खिलाफ दंडात्मक कारवाई करते हुये कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए। तब जाकर, हम स्टेरॉयड संशोधित टिनिया एवं व्यापक तौर पर फैल रहे क्रोनिक डर्माटिफोटीस में कमी ला पाएंगे। नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सी.डी.एस.सी.ओ.) और अन्य सभी राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों को नए एफडीसी लाइसेंस जारी करने से पहले त्वचा विज्ञान विशेषज्ञों के सलाहकार पैनल की राय सक्रिय रूप से लेने की जरूरत है। उन्हें अब तक दिए गए लाइसेंसों को सरसरी तौर पर रद्द करना चाहिए। आई.ए.डी.वी.एल ने इस मुद्दे पर जनता, केमिस्ट और चिकित्सकों को जागरूक करने हेतु ठोस प्रयासों की शुरुआत की है। एसोसिएशन ने डी.सी.जी.आई और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट अधिकारियों के समक्ष कई बार अपनी बात रखी है। कई विकासशील देशों में अस्थायी एफडीसी और उनके संयोजन भी निर्यात किए जाते हैं। फार्मास्युटिकल उद्योग, निर्माण और निर्यात में विश्व स्तर पर प्रमुख उद्योग है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस अराजक स्थिति के लिए हम खुद जिम्मेदार है, जिससे आसानी से बचा जा सकता था। अंतर्राष्ट्रीय लीग ऑफ डर्माटोलॉजिकल सोसाइटीज (आई.एल.डी.एस) ने आई.ए.डी.वी.एल को एक समर्थन पत्र जारी कर सहयोग किया है।
आई.ए.डी.वी.एल के अध्यक्ष डॉ. रमेश भट ने स्वागत भाषण देकर कार्यक्रम की शुरुआत की, वही डॉ. रोहित बत्रा एवं डॉ. दिनेश ने कार्यक्रम का संचालन किया। आई.ए.डी.वी.एल के पूर्वअध्यक्ष डॉ. मारफेटिया ने आई.ए.डी.वी.एल, संगठन के अब तक के सफर और एजेंडा के बारे में बात की। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने टोपिकल स्टेरॉयड क्रीम के दुरुपयोग, एवं उसके रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की।
इसके अलावा, त्वचा विशेषज्ञों और परिवारिक चिकित्सकों ने पिछले 5-6 वर्षों में पूरे देश में फंगल इन्फेक्शन (जिसे आम तौर पर दाद संक्रमण के रूप में जाना जाता है) में असामान्य वृद्धि के बारे में चिंता जाहिर की। उपरोक्त संक्रमण बहुत व्यापक स्तर पर व बेहद संक्रामक है, इनमें वर्तमान में उपलब्ध तमाम किस्मों के इलाज के लिए प्रतिरोधी क्षमता लिए हुये हैं, ये देश में स्वास्थ्य सेवा पर बड़ा बोझ है। इस दौरान आई.ए.डी.वी.एल के अध्यक्ष डॉ. रमेश भट एम और पूर्व अध्यक्ष डॉ. मारफेटिया ने फंगल संक्रमणों पर अपनी महत्वपूर्ण राय रखी।
बताया गया की फंगल सुपर बग के खतरे को रोकने के लिए, आई.ए.डी.वी.एल ने आई.टी.ए.टी.एस.ए. टोपिकल स्टेरॉयड एब्यूज अगेन्स्ट आईएडीवीएल टास्क फोर्स और आई.ए.डी.वी.एल टास्क फोर्स ऑन डिसकिलेंटिटेंट टिनिया (आईटीआरटी) का गठन किया है, ताकि डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, आम जनता को इसके संबन्धित सामान्य उपायों के प्रति जागरूक करने हेतु रणनीति बनाया जा सके।
स्टेरॉयड संयोजन क्रीम के इस्तेमाल के दुरुपयोग से बचाव की आवश्यकता है, वही उपयोगी दवाइया विभिन्न परिस्थितियों व उच्च मूल्य के कारण आम जनता की पहुँच से दूर है। जबकि तमिलनाडु में, यह दवाएं सरकारी अस्पतालों में आम जनता के लिए निःशुल्क उपलब्ध है। बीमा नियामक प्राधिकरणों से अनुरोध है कि वे बीमा कवरेज के तहत इस श्रेणी की दवाओं पर भी विचार करें, इससे इन परिस्थितियों में मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।
आई.ए.डी.वी.एल. ने भारत सरकार के राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के साथ मिलकर कुष्ठ रोगों के संचरण को कम करने और विटिलिगो (लियकोडर्मा) से जुड़ी सामाजिक कलंक को मिटाने हेतु जागरूकता और उन्मूलन के लिए काम में सहयोग किया है। इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुये “स्किन सफर” अभियान तीन महीने की अवधि में कश्मीर से कन्याकुमारी तक चलाने की योजना बनाई गई है। इस दौरान त्वचा स्वच्छता और बीमारियाँ, कुष्ठ रोग की शीघ्र पहचान और उपचार के बारे में वृहत तौर पर जागरूकता फैलाई जाएगी। आई.ए.डी.वी.एल के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. नरसिंह राव ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन हेतु चलाये जा रहे प्रयासों व जागरूकता अभियान के बारे में विस्तार से बताया।
त्वचा रोग, चिकित्सा में एक उपजाऊ जमीन की तरह उभरा है, जहाँ गैर जिम्मेदाराना व क्वेकरी नियमों को ताक पर रखकर एवं अधिकारियों की आंखों से बचते हुये प्रचलन में आ रहा है। इस संबंध में, क्वेकरी के खिलाफ आई.ए.डी.वी.एल ने क्वैकरी आई.ए.डी.वी.एल. टास्कफोर्स अगेन्स्ट क्वेकरी (आई.टी.ए.क्यू) टास्क फोर्स का गठन किया है, जो सामान्य लोगों को क्वेकरी से बचने एवं उसे खत्म करने के हेतु संबंधित अधिकारियों के साथ सम्पर्क करने के बारे में भी जागरूक करेगी। इस दौरान आई.ए.डी.वी.एल के उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश गिरधर ने विटिलिगो, क्वेकरी और इंश्योरेंस से संबंधित चिंताओं पर चर्चा की।
मीडिया के साथ बातचीत में क्रम में सभी सम्मानित सदस्य, वीके शर्मा, दीपिका ने भाग लिया। वही डॉ. उमाशंकर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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