छात्र के पैर को बिना काटे कैंसर ट्यूमर को बाहर किया गया

गाजियाबाद। 21 वर्षीय आयूष वहाने के पैर की हड्डी में कैंसर था। हालांकि, उसे लगा था कि वह अब कभी नहीं चल पाएगा लेकिन मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, वैशाली में छात्र के पैर को बिना काटे ट्यूमर को बाहर कर दिया गया। सफल सर्जरी के अगले दिन ही छात्र अपने पैरों की मदद से चल सका।
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बोन एंड सॉफ्ट टिशू कैंसर यूनिट के हेड, डॉक्टर विवेक वर्मा ने बताया कि, “हमें खुशी है कि हम उस युवा छात्र के पैरों को बचाने में कामयाब रहे। हमने कैंसर वाली हड्डी को निकालकर उसकी जगह ट्यूमर प्रोस्थेटिक लगा दिया जिसके बाद अगले दिन से आयूष आसानी से चल पा रहा था। यह केस इस बात को साफ करता है कि भले ही कोविड-19 के कारण इलेक्टिव प्रक्रियाओं को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है लेकिन इस प्रकार के कैंसर के मामलों में देर नहीं की जा सकती है। एक तरफ जहां कोविड-19 देशभर से 3 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, वहीं कैंसर इसका 100 गुना ज्यादा यानी कि लगभग 3 लाख लोगों की जान ले चुका है। इसलिए कोविड-19 के दौरान भी कैंसर के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।”
कुछ हफ्ते पहले ही पता चला कि आयूष के पैर की हड्डी में कैंसर है।सभी जांचों के बाद पता चला कि छात्र ओस्टिओसर्कोमा से ग्रस्त था। इस कैंसर में घुटने और टखने को जोड़ने वाली हड्डी के ऊपरी भाग में अपरिपक्व हड्डी विकसित होने लगती है। आयूष का इलाज कीमोथेरेपी के साथ शुरू किया गया था। पैर को काटने की बात को सुनकर आयूष और उसका परिवार पूरी तरह निराश हो चुका था।
ऑनलाइन सर्च करने पर उन्हें डॉक्टर विवेक वर्मा के बारे में पता चला। जिसके बाद उन्होंने आयूष की मेडिकल रिपोर्ट डॉक्टर विवेक को भेजी, जिन्होंने आयूष के परिवार को आश्वासन दिया कि लिंब सेविंग सर्जरी की मदद से पैर को बिना काटे इलाज संभव है। हालांकि, आयूष को रायपुर से दिल्ली तक ले जाना काफी मुश्किल रहा। पूरा देश लॉकडाउन में होने के कारण उन्हें कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं मिल रहा था। इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र के डीएम से इजाजत ली जिसके बाद उन्हें प्राइवेट वाहन से जाने की इजाजत मिल तो गई लेकिन केवल एक अटेंडेंट के साथ। गाड़ी में कोई तीसरा व्यक्ति सफर नहीं कर सकता था।
डॉक्टर वर्मा ने न सिर्फ ट्यूमर को बाहर किया बल्कि सभी प्रभावित मांसपेशियों को भी निकाल दिया। इसके बाद उन्होंने रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया की जिसके लिए उन्होंने ट्यूमर प्रोथेसिस का इस्तेमाल किया। अगले दिन से आयूष ने अपने पैरों के सहारे चलना शुरू कर दिया। इलाज में कोई कमी न रहे इसके लिए सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी की शुरुआत की गई। मरीज आयूष वहाने ने बताया कि, “मेरा पैर बचाने के लिए मैं मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों का दिल से शुक्रगुजार हूं। पैर को खोने की बात सुनकर में डिप्रेशन में जा चुका था लेकिन अब में फिर से एक सामान्य जीवन जी सकता हूं और अपने सभी सपने पूरे कर सकता हूं। मुझे बेहद खुशी है कि मैं फिर से चल पा रहा हूं।”
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक कोविड ग्रीन अस्पताल है, जो वायरस से बचाव के लिए सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करता है। इसमें प्रवेश के दौरान थर्मल स्क्रीनिंग, कोविड स्क्रीनिंग, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और जगह-जगह पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल आदि शामिल है। इसके अलावा मरीज से कोई भी बाहरी व्यक्ति मिलने नहीं आ सकता है।

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