ईसाइयों का प्रमुख तीर्थस्थान : मर्थोमा बिशप श्राइन

मर्थोमा बिशप श्राइन ईसाइयों का प्रमुख तीर्थस्थान है जो कि मुज़ीरिस विरासत परियोजना के अंतर्गत आता है। यह चर्च केरल के अज़हीकोड गांव में पेरियार नदी के तट पर कोडुन्गल्लुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

ईसाई मान्यता
यहां की मान्यता है कि सेंट थॉमस जो कि ईसा मसीह यानि यीशु के बारह अनुयायियों में से एक थे, 21 नवम्बर 52 ईस्वी को केरल के गांव कोडुन्गल्लुर जो उस समय मुजीरिस नाम से जाना जाता थे में पहुंचे थे। माना जाता है कि उन्होंने केरल में 7 चर्चों का गठन करवाया जिनमें से सबसे पहला कोडुन्गल्लुर गांव में बनवाया गया था।

प्राचीन इतिहास
कोडुन्गल्लुर एक प्राचीन बंदरगाह था जिसने अपने यहां मौजूद चर्च संबंधी महत्त्व और अपनी शौहरत टीपू सुल्तान के द्वारा हमले कराने के बाद खो दी थी और उस समय यहां का विकास भी काफी कम हो गया था। इसके ऐतिहासिक महत्त्व को दोबारा तब स्वीकारा गया जब सेंट थॉमस के भारत आने की 19वीं शताब्दी समारोह के अवसर पर वेटिकन शहर से केराला में मौजूद सेंट थॉमस ईसाइयों के लिए उपहार भिजवाया गया।
यहां सेंट थॉमस के दाहिने हाथ की हड्डी इटली के ओरटोना शहर से लाई गई और 6 दिसम्बर 1953 में इस पवित्र तीर्थस्थान में रखा गया। तब से यह तीर्थस्थान ईसाइयों के लिए एक महान तीर्थस्थल के तौर पर चर्चित है और दुनियाभर के तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है।

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