RAIN की लगातार माॅनिटरिंग से संभव हो पाएगा हैकर्स के बारे में जान पाना

कंप्यूटर हैकर्स का पता लगाने के हैक्टिक प्रोसेस के बदले रिसर्चर्स ने एक नई तकनीक निकाली है जिसे नवल सेना के रिसर्चर्स ने भी अप्रूव किया है। उन्होंने साइबर सिक्योरिटी को ऐसे ऑटोमेटेड किया है जिससे उसपर अटैक करने वाले की सारी डिटेल निकाली जा सकेगी। इस प्रक्रिया को रिफाइनेबल अटैक इनवेस्टिगेशन कहा जाता है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि अटैकर्स चाहे कितनी भी कोशिश कर ले खुद से जुड़े सबूत छिपाने की लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होगा। फॉरेंसिक टेकनीक के जरिये आप कंप्यूटर के हाल ही के स्टेटस और नेटवर्किंग को पहचान सकते हैं। जिसके जरिये अटैक के तरीके को जान सकते हैं।
डिजीटल लाग्स में कोई इनफोर्मेशन ज्यादा देर के लिये रिकॉर्ड नहीं की जा सकती है, अपने डाटा स्टोरेज की कमी की वजह से। कुछ के सिर्फ स्नैपशॉट ही मिल सकते हैं जिसमें की पूरे तरह से जानकारी मिलनी संभव नहीं है लेकिन रिफाइनेबल अटैक इनवेस्टिगेशन (RAIN) की लगातार मॉनिटरिंग से यह संभव हो सका है। रेन दरअसल लगातार मॉनिटरिंग करता है। उस दौरान अगर कुछ ज्यादा काम की इनफॉर्मेशन होती है तो वह उसे फिल्टर कर लेता है जिससे की स्टोरेज के फुल होने की दिक्कत नहीं आती है और अटैकर्स के साइबर अटैक का टाइम और लोकेशन फाइंड हो जाती है। रेन हाई लेवल के मिलिट्री और कंप्यूटर नेटवर्क की सिक्योरिटी को इंप्रूव करने में मदद कर सकता है।

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