क्या ‘तेनाली रामा’ में रामा अपने पद से इस्तीफा दे देगा और राज्य छोड़कर चला जायेगा?

एक वर्षों पुरानी कथा की बुद्धिमानी भरी, त्वारित प्रस्तुति सोनी सब का ‘तेनाली रामा’ अपनी आकर्षक कहानी से लगातार दर्शकों को बांधे हुए है। राज्य में अपने कद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा रामा (कृष्णा भारद्वाज) आखिरकार ‘अष्टदिग्गज’- राजा के सलाहकार के स्तषर पर पहुंच चुका है। हालांकि, आगे आने वाले ट्रैक में वह खुद अपनी क्षमताओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
आखिरकार रामा ने बुद्धिमानों के दल, अष्टदिग्गज में अपनी जगह बना ली है, वहीं तथाचार्य (पंकज बेरी) तपस्यार करने के लिये दूर गये हुए हैं, जहां उन्हें एक बेहद बुद्धिमान बालक मिलता है, जिसका नाम महेश दास है। उस लड़के को बीरबल (भावेश बालचंदानी) के नाम से भी जाना जाता है। वह तथाचार्य को अपनी बुद्धिमानी और हाजिरजवाबी से प्रभावित करने में सफल हो जाता है। तथाचार्य उसे रामा के साथ प्रतियोगिता करने के लिये विजयनगर लेकर आता है। एक खाली चिट्ठी का मामला लेकर वह दरबार में पहुंचते हैं, रामा और बीरबल दोनों ही उसे सुलझाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, उस चिट्ठी को सुलझाने में बीरबल, रामा से जीत जाता है, जोकि विजयनगर पर हमले की चेतावनी के रूप में था और उन्होंने हमलावर कबीले को हराकर राज्या को सुरक्षित बचा लिया। बीरबल, रामा से ज्यादा योग्य हो गया, तथाचार्य, रामा के ओहदे पर सवाल उठाते हैं, जिसके परिणास्विरूप उसे कुछ चीजों में बीरबल के साथ मुकाबला करना होता है। आखिरकार रामा को यह महससू होता है कि बीरबल उससे ज्या दा बुद्धिमान है और वह राज्या छोड़कर जाने व अपना पद छोड़ने का फैसला करता है।
रामा की भूमिका निभा रहे कृष्णाय भारद्वाज कहते हैं, ‘‘रामा के लिये अपने ओहदे में ऊपर बढ़ना बहुत ही महत्वकपूर्ण था जिससे उसे दरबार में अपने महत्व का पता चला। हालांकि, अष्ट दिग्गबज में अपनी जगह बनाने और बीरबल के आने से रामा राज्ये में अपने कद को बचाने में लगा है। इस सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान उन ऐतिहासिक किरदारों को और भी जानने का मौका मिला, जोकि हमेशा ही ज्ञानवर्द्धक होता है।’’

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