पानी में अधिक फ्लोराइड से खराब हो रही है हड्डियां

विश्व आर्थराइटिस दिवस : 12 अक्तूबर

नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर समेत देश के अनेक हिस्सों में भूजल में फ्लोराइड की अधिक मौजूदगी के कारण हड्डियां खराब हो रही है और अर्थराइटिस और ओस्टियो आर्थराइटिस जैसी जोड़ों की समस्याएं बढ़ रही है।
देश के जिन इलाकों में भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई जाती है उनमें दिल्ली के कई इलाके भी शामिल है। जब कोई व्यक्ति व्यक्ति मानक सीमा से अधिक घुलनशील फ्लोराइड-युक्त पानी लगातार पीता है तो फ्लोरोसिस होने का खतरा होता है। जिन इलाकों पानी पेयजल की आपूर्ति नहीं है वहां लोग गहरे कुंए या बोरवेल से निकाले गए पानी पीते है जिसमें फ्लोराइड तथा भारी धातु मात्रा में और अधिक होती है। इंडियन कार्टिलेज सोसायटी तथा आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. राजू वैश्य ने बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी के लगातार पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती है, जोड़ों में कड़ापन आ जाता है और उनमें आर्थराइटिस एवं ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याएं हो जाती है। गंभीर स्थिति में हाथ-पैर की हड्डियां टेड़ी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि फ्लोरोसिस कई तरह की होती है। अस्थि फ्लोरोसिस हड्डियों पर असर करता है। यह युवा तथा प्रौढ़ दोनों को हो सकता है। इसके प्रभाव से शरीर के विभिन्न जोड़ों में दर्द होने लगता है। जिन जोड़ों जहाँ इसका प्रभाव ज्यादा होता है वे हैं गर्दन, कुल्हे, बाहें और घुटने। इसके कारण मरीज का चलना-फिरना दूभर हो जाता है और चलने पर असहनीय दर्द होता है। अस्थि फ्लोरोसिस होने पर जोड़ों तथा अस्थियों का लचीलापन समाप्त हो जाता है और जोड़ों में कठोरता आ जाती है। अस्थि फ्लोरोसिस को शुरुआती दौर में पहचान पाना बहुत मुश्किल है और जब यह अपनी चरम सीमा पर पहुँचने वाला होता है तभी पहचाना जाता है। बीमारी के बढ़ जाते पर रीढ़ भी बाँस की तरह सीधा हो जाती है। मरीज न तो झुक सकता और न ही घुटने मोड़ सकता है।
नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हास्पीटल के वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डा. राजू वैश्य ने बताया कि जिन इलाकों के पानी में फ्लोराइड अधिक है वहां के लोगों के पैर की हड्डियां टेढी हो जाती है जिसके कारण लोग लंगड़ा कर चलते हैं। लंगड़ा कर चलने के कारण घुटने जल्दी खराब होते हैं और घुटने को बदलने की नौबत आ जाती है।
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार लगभग छः करोड़ भारतीय फ्लोरोसिस की चपेट में आ चुके हैं जिनमें बच्चों और महिलाओं की संख्या करीब साठ लाख है। लगभग 20 राज्यों में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखते हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, तथा राजस्थान, आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु में तो यह अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी है जहाँ 50 से 100 प्रतिशत तक जिले प्रभावित हो चुके हैं।
देश में उत्तर प्रदेश, आन्ध प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़िसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के कई इलाकों में फ्लोराइसिस का प्रकोप है। उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर के अलावा वाराणसी, कन्नौज, प्रतापगढ़, फरुखाबाद, रायबरेली, उन्नाव, सोनभद्र आदि इलाकों में इस बीमारी का प्रकोप है। दिल्ली में ही पश्चिम जोन, उत्तर-पश्चिम जोन, पू्र्वी जोन, उत्तर पूर्वी जोन, मध्य जोन, दक्षिणी जोन, दक्षिण-पश्चिम जोन में इस बीमारी का प्रकोप है।

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