डाटा के उलझन से सुलझाए करियर की गुत्थी

-अरविंद बाली
कार्यवाहक सीईओ (टेलीकाॅम सेक्टर स्किल काउंसिल)

इंटरनेट और डिजिटलीकरण ने अब पूरी दुनिया में कारोबार और कामकाज करने के तरीके बदल दिए है। अब पूरी दुनिया में तकरीबन हरेक कारोबार में कंप्यूटर का दखल है। इसकी वजह से हर दिन बड़ी संख्या में डाटा तैयार हो रहा है। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में बिजनेस एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ रहा है। आज बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, ई-कॉमर्स और डाटा एनालिटिक्स से जुड़ी स्टार्टअप्स कंपनियां इसे ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर देइ रही हैं। कंपनियां भी इस क्षेत्र में लगातार निवेश कर रही हैं। ऐसे में डाटा वॉल्यूम बढ़ने से बहुत-सी कंपनियों के लिए डाटा एनालिस्ट और डाटा साइंटिस्ट्स को की जरूरत पड़ने लगी है। आईए जानते है क्या है डाटा साइंस और उसके साथ जुड़े करियर के अवसर…

  • क्या है डाटा साइंस?

डाटा साइंस के तहत डाटा का अध्ययन और विश्लेषण किया जाता है और उसी के आधार पर भविष्य की योजना बनाई जाती है। वैज्ञानिक तरीकों, प्रक्रियाओं और एल्गोरिदम आदि का उपयोग कर कई डाटा इकट्ठा कर जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया डाटा साइंस कहलाती है। डाटा-साइंस के तहत मैथमेटिक्स, स्टेटिस्टिक्स, इनफॉर्मेशन साइंस और कंप्यूटर साइंस की फील्ड्स से संबद्ध विभिन्न टेक्निक्स और थ्योरीज का इस्तेमाल करके सभी किस्म के स्ट्रक्चर्ड और अन-स्ट्रक्चर्ड डाटा से जानकारी और इनसाइट्स प्राप्त की जाती हैं और यह काम जो पेशेवर करते हैं, वे डाटा एक्सपर्ट्स या डाटा-साइंटिस्ट्स कहलाते हैं।

  • क्यों बढ़ रही है डाटा साइंस की मांग :-

आजकल कमोबेश सभी कंपनियां बिजनेस बढ़ाने के लिए डाटा को नए तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं। साथ में, बिजनेस प्रोसेस की लागत भी कम करना चाहती हैं और ग्राहकों को अच्छा शॉपिंग अनुभव भी देना चाहती हैं। इसलिए डाटा को फिल्टर करके सटीक जानकारी निकालना अब वक्त की मांग बन गया है। ऐसे में डाटा प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। स्टार्टअप के लिए अच्छे निवेशक ढूंढने हो या कंपनी का विस्तार करना हो, बहुत कुछ डाटा के विश्लेषण के बाद ही तय होता है। कंपनी में किसी कर्मचारी के काम का विश्लेषण करना हो या पूरी कंपनी के टर्नओवर का आंकलन, सब कुछ डाटा पर ही निर्भर है। इस वजह से डाटा साइंस का महत्व बढ़ता जा रहा है।

  • डाटा साइंस प्रोफेशनल की मांग अधिक :-

हाल ही में प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन ने ‘इमर्जिंग जॉब्स 2020’ नाम से उन जॉब्स की एक सूची जारी की है, जो वर्ष 2020 में डिमांड में रहने वाले हैं। इसमें से एक डाटा साइंस भी है। डाटा साइंस की मांग को देखते हुए भारत के कई आईआईटी संस्थानों के इंजीनियरिंग प्रोग्राम में अलग से एक मॉड्यूल के तौर पर इस विषय की पढ़ाई कराई जा रही है। कुछ निजी कॉलेजों व यूनिवर्सिटी में डिग्री कोर्स भी चलाया जा रहा है। मौजूदा वक्त को देखते हुए भारतीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधीन गठित टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा भी इस विषय में प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है।

  • डाटा साइंस के स्किल गैप को समझे :-

देश-दुनिया में डाटा साइंस प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। जितनी इनकी डिमांड है, उस हिसाब से प्रोफेशनल्स नहीं मिल पा रहे हैं। आउटबाउंड हायरिंग स्टार्टअप बिलॉन्ग की टैलेंट सप्लाई इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में चार गुना तेजी से डाटा साइंटिस्ट्स की मांग बढ़ी है। पिछले एक साल में डाटा साइंटिस्ट्स की मांग में 417 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, 2021 तक देश में डाटा साइंटिस्ट सहित डाटा से जुड़े करीब 7.5 लाख से अधिक विशेषज्ञों की मांग होगी। डाटा साइंटिस्ट के अलावा, डाटा आर्किटेक्ट और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मांग भी बढ़ रही है। एक जॉब पोर्टल सर्वे के मुताबिक, फिलहाल सर्विस प्रोवाइडर के बीच 2.5 लाख, स्टार्टअप में 25 हजार, आईटी कंपनियों में 26 हजार, अन्य क्षेत्र की कंपनियों को 1. 40 लाख और विदेशी कंपनियों में 92 हजार डाटा साइंटिस्ट्स की जरूरत है। कुल 5.11 लाख डाटा साइंटिस्ट की मांग की तुलना में देश में महज 1.44 लाख कुशल प्रोफेशनल्स मौजूद हैं। इस वजह से इस क्षेत्र में करियर के बेहतरीन अवसर उपलब्ध है।

  • डाटा साइंटिस्ट का क्या है जॉब रोल :-

डाटा साइंटिस्ट गायब हुए डाटा को खोजने में मुख्य भूमिका निभाता है। साथ ही, यह तकनीक का इस्तेमाल करके डाटा का अध्ययन और उस पर निर्णय लेता है। डाटा साइंटिस्ट खोए हुए डाटा खोजने, गड़बड़ियों को दूर करने और तमाम खामियों से बचाव करने में मददगार होते हैं। डाटा को जुटाकर उनके अध्ययन और एनालिसिस के माध्यम से भविष्य की योजना बनाई जा सकती है। साथ ही, डाटा साइंटिस्ट अपनी कंपनी के लिए डाटा एनालिसिस करते हैं, जिससे उसे बिजनेस में फायदा हो।

  • इस रूप में बना सकते है करियर :-

डाटा साइंस में करियर के कई पहलू है। इसका चयन कैंडिडेट को खुद करना होगा। डाटा साइंटिस्ट, डाटा एनालिस्ट, सीनियर इंफॉर्मेशन एनालिस्ट, इंफॉर्मेशन ऑफिसर, डाटा ऑफिसर, सॉफ्टवेयर टेस्टर, सपोर्ट एनालिस्ट और बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर करियर बना सकते हैं। इस फील्ड में सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में जॉब के बहुत मौके हैं। कंपनियों, संस्थानों और हेल्थकेयर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में इसकी डिमांड बढ़ी है। आने वाले दिनों में डिजिटल क्षेत्र में भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

  • कहां मिलेंगे करियर संवारने के मौके :-

अगर प्राइवेट सेक्टर की बात करें, तो आइटी, बैंक्स, इंश्योरेंस, फाइनेंस, टेलीकॉम, ई-कॉमर्स, रिटेल और आउटसोर्सिंग कंपनीज में ऐसे प्रोफेशनल्स की बहुत डिमांड है। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन, यूटिलिटी, ऑयल, गैस, माइनिंग, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्टेशन समेत अन्य कंपनियों में भी काफी संभावनाएं हैं। देश के अलावा डाटा प्रोफेशनल्स की डिमांड अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में भी बहुत है। वहां भी नौकरी पा सकते है। गूगल, अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियां में भी डाटा साइंटिस्ट्स के लिए अवसर निकलते रहते है। इसके अलावा अब सरकारी क्षेत्र में इसकी जरूरत होने लगी है। नई योजना बनाने के लिए अब डाटा विश्लेषण पर अधिक जोर दिया जा रहा है। जिससे सरकारी नौकरी के अवसर भी सामने आ रहे है।

  • कितनी मिलती है तनख्वाह :-

भारत में एक डाटा साइंटिस्ट औसतन 8.50 रुपये सालाना कमाता है। इस पेशे में कुछ वर्ष के अनुभव के बाद सैलरी पैकेज में अच्छा-खासा इजाफा होता है। यह काफी हाई-पेइंग जॉब की श्रेणी में शामिल है। विदेशों में डाटा साइंटिस्ट्स को करीब 70-80 लाख रुपए सालाना तक मिल सकता है।

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