छोटी, कम बजट की फिल्मों का दौर आ रहा है

सोच-समझकर, नाप-तोल कर बोलने से आपको यह पता चलता है की आप जो भी बोलेंगे गलत नहीं बोलेंगे इस आदत को मैंने जीवन में लागू किया है साथ ही वक्त का पाबंद होना आपकी तरक्की और आपके काम को हमेशा बढ़ावा देता है यह कहना था भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन का जो मारवाह स्टूडियो में चल रहे 10वें ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन पहुंचे, उन्होंने आगे कहा की कोई भी फिल्म नफरत नहीं सिखाती और जैसे-जैसे समाज बदलता है फिल्में उसके इर्द-गिर्द घूमने लगती है आज अगर हम कोई दहेज के ऊपर फिल्म बनाते हंै तो वो नहीं चलेगी और वही युवा पीढ़ी की समझ को देखते हुए फिल्म को बनाएं तो उसको वो देखना पसंद करते हैं, आजकल में देख रहा हूँ आर्ट मूवीज़ भी कमर्शियल मूवीज़ में तब्दील हो गयी है जो अच्छी बात है क्योंकि अच्छी चीज़ सब तक पहुंचनी चाहिए, हमारी फिल्म इंडस्ट्री सबसे ज़्यादा जॉब इस समय दे रही है और मेहनती और ईमानदार लोगों की ज़रूरत हर जगह होती है। इस अवसर पर लेखन ठाकुर तपस्वी, अरुण कुमार और अमिताभ बच्चन के डुप्लीकेट अमित श्रीवास्तव इस अवसर पर पहुंचे। ठाकुर तपस्वी ने कहा की फिल्में छोटी बड़ी नहीं होती बल्कि छोटे बजट की फिल्मों में काम करने का फायदा यह रहता है की आप निर्माता को ज़्यादा नुक्सान नहीं पहुंचाते और अब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री भी छोटी फिल्में बनाने के लिए आगे आ रही है और अब छात्रों को बहुत अच्छे मौके मिलेंगे अपनी बात को कहने के। इस अवसर पर संदीप मारवाह ने कहा की इस तरह के फेस्टिवल के ज़रिये छात्रों को बहुत कम समय में बहुत सी अच्छी बातों का ज्ञान हो जाता है, इन दो दिनों में हमने कई वर्कशॉप की जिसमें हमने स्कूली बच्चों को भी आज की फिल्म इंडस्ट्री के बारे में बताया और अच्छी बात यह है की आज का हर बच्चा हर सब्जेक्ट पर बात कर सकता है इसी से लगता है की देश तरक्की कर रहा है। इसी के साथ पेंटिंग प्रदर्शनी व् सांस्कृतिक कार्यक्रर्मों का भी आयोजन किया गया।

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